Bharat Ka Parichay | 4 Best हिमालय पर्वत, प्रकार, महान और लघु हिमालय

BHARAT KA PARICHAY

भारत का परिचय

Bharat Ka Parichay अत्यंत प्राचीन एवं गौरवपूर्ण है। भारत की प्राचीनता देश की सभ्यता, संस्कृति, राष्ट्रभाषा हिन्दी, विभिन्न कलाओं जैसे- वास्तुकला, ललितकला, भारतीय नृत्य कला के अंतर्गत शास्त्रीय नृत्य व लोक नृत्य कला, संगीतकला, अभिनय कला के माध्यम से उजागर होती है।

भारत के परिचय की बात करें तो भारत के मस्तक पर सुशोभित हिमालय पर्वत की विशालता व अडिगता है। गंगा, यमुना, ब्रम्हपुत्र, सतलज, गोदावरी, सरस्वती जैसी रजत सम भारत की नदियों का पवित्र प्रवाह तथा प्राकृतिक सौन्दर्य बिखेरती भारत की झीलों की सुंदरता भी भारत की शोभा प्रदान करने में सक्षम हैं।    

भारतीय सभ्यता और संस्कृति विश्व की प्राचीनतम धरोहर है। भारतीय संस्कृति का संदेश मानव जीवन में योग व त्याग का समन्वय है। योग जीवन को संतुलित करता है, और त्याग संयमित। ऐसा ही प्राचीन, संयमित, पवित्र, संस्कारित व नियंत्रित है- भारत देश

प्रस्तुत विषय सी॰बी॰एस॰ई॰, आई॰सी॰एस॰ई॰, यू॰पी॰ बोर्ड तथा अन्य राजकीय बोर्ड की हाईस्कूल, इंटरमिडियट परीक्षाओं के साथ – साथ बैंक, एस॰एस॰सी॰, रेलवे, आर॰आर॰बी॰ व यू॰पी॰एस॰सी॰ के लिए भी महत्वपूर्ण है।

तो आइए भारत का सामान्य परिचय प्राप्त करते हुए भारत के भाल पर शोभायमान हिमालय पर्वत का अध्ययन करें।

भारत का परिचय

इतिहास के अनुसार भारत देश दस हजार वर्ष पुराना है। मोहन जोदाडो तथा हड़प्पा संस्कृति भारत की प्राचीनतम संस्कृति थी। इसके बाद आर्य जाति का आगमन भारत में हुआ। आर्य सांस्कृतिक रूप से सभ्य जाति के लोग थे। आर्यों के आगमन व निवास के कारण इसे आर्यावर्त नाम से भी जाना जाता है। पुरातन युग में महाप्रतापी राजा दुष्यंत हुए। इनका विवाह कर्ण्व ऋषि की पुत्री शकुंतला के साथ सम्पन्न हुआ।

शकुंतला ने शक्तिशाली पुत्र भरत को जन्म दिया। बाद में इसी युवराज भरत के नाम पर देश का नाम ‘भारतवर्ष’ रखा गया। तत्पश्चात अनेक संस्कृतियों और सभ्यताओं के लोग भारत में आकर निवास करते रहे। यही कारण है कि भारत देश में विभिन्न संस्कृतियों व विविध सभ्यताओं का सम्मिश्रण है।

हमारा देश वह है जहाँ गंगा, यमुना, सतलज, कृष्णा, गोदावरी, सिन्ध तथा ब्रम्हपुत्र जैसी शीतल चाँदी सदृश्य नदियाँ प्रवाहित होती हैं। क्षेत्र विस्तार की दृष्टि से भारत का परिचय संसार के सातवें महादेश के रूप में दिया जाता है, तथा जनसंख्या के अनुसार विश्व में दूसरे स्थान का सबसे बड़ा जनतंत्र है।

भारत देश ऋषियों का तपोवन, रमणीय स्थलों का उपवन तथा उच्च हिमालय पर्वत श्रंखलाओं का समन्वय है। भारत न केवल सांस्कृतिक दृष्टि से अभिन्न है, बल्कि इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि भी विशिष्ट है। भारत देश की निर्माण सीमा ऐतिहासिक है। अत: भारतवर्ष का इतिहास वृहद एवं विशाल रहा है।

भारत देश की एकता का एक प्रमुख आधार दर्शन एवं साहित्य हैं। हमारे देश का दर्शन है – सर्व समन्वय की भावना। साहित्य के क्षेत्र में भी यही समन्वय देखा जा सकता है। देश का साहित्य विभिन्न क्षेत्र के लोगों द्वारा लिखा गया किन्तु क्षेत्रवादिता और प्रांतीयता से अछूता रहा।

हमारे देश का साहित्य एकता के सूत्र में बंधने, सदभाव की भावना को विकसित करने, देशभक्ति का संदेश देने व संवेदना के भावों को जाग्रत करने का परिचायक है। भाषा की दृष्टि से भी भारत अत्यंत विविधतापूर्ण है। हमारे देश की भाषा एक नहीं अनेक हैं। यहाँ पर लगभग पंद्रह भाषाएँ व्यवहार में लाई जाती हैं।

इन सभी भाषाओं की बोलियाँ अर्थात उपभाषाएँ भी हैं। सभी भाषाओं को भारत के संविधान में मान्यता प्राप्त है। रामचरितमानस, श्रीमद्भगवतगीता, विष्णुपुराण आदि ग्रंथ विभिन्न भाषाओं में रचित हैं, किन्तु सभी ग्रंथो में व्यक्त हुई भावना हमारी राष्ट्रियता, धार्मिकता व ऐतिहासिकता को ही प्रकाशित करती है।

तुलसीदास, सूरदास, कबीरदास, नानक, मीरा, रवीन्द्रनाथ टैगोर, तिरुवल्लुवर आदि कवियों की रचनाएँ भाषा की दृष्टि से भिन्नतापूर्ण हैं, लेकिन इनकी भावात्मक एकता राष्ट्र के सांस्कृतिक मानस को ही पल्लवित व पुष्पित करती हैं। विशाल, विविध, विशिष्ट व अद्भुत भारत की विशेषताओं को कुछ शब्दों में वर्णित करना संभव ही नहीं। हमें सदैव अपनी सांस्कृतिक परम्पराओं, धार्मिक मान्यताओं और सामाजिक एकता को बनाए रखना होगा।

जहाँ एक ओर भारतदेश की संस्कृति, भाषा, साहित्य, दर्शन, इतिहास, सभ्यता तथा कलाओं में विशिष्टता पाई जाती है, ठीक उसी प्रकार भारत का भौगोलिक परिचय भी श्रेष्ठ, विस्तृत व उपयोगी है। प्रस्तुत लेख में अब हम भारतदेश के भौगोलिक स्वरूप का अध्ययन करेंगे।

भौतिक आधार पर भारत का विस्तार 8 डिग्री॰ 4’उत्तर -37 डिग्री॰ 6उत्तर, 68 डिग्री॰ 7पूर्व – 97 डिग्री॰ 25पूर्व है। पूर्व से पश्चिम तक दूरी 2933 किमी॰ तथा उत्तर से दक्षिण तक दूरी 3214 किमी॰ है। समुद्री सीमा 6100 किमी॰, स्थली सीमा 15200 किमी॰ है।

भारत का सम्पूर्ण क्षेत्रफल 3287263 वर्ग किमी॰ निश्चित किया गया। जिनमें पहाड़ियाँ 18॰6% 2135 मी॰, पठार 27॰7% 305 से 915 तक तथा मैदान 43% तक विस्तृत है। भारतदेश में 25 राज्य तथा 7 केंद्र शासित प्रदेश हैं। भारत के भौतिक स्वरूप के आधार पर और अध्ययन की सुविधा की दृष्टि से भारत को चार प्रमुख प्राकृतिक भागों में विभक्त किया गया है –

  • उत्तर का पर्वतीय क्षेत्र, हिमालय पर्वत व हिमालय रेंज
  • उत्तर का विशाल मैदान या सतलज, गंगा, ब्रम्हपुत्र का मैदान
  • दक्षिण का पठार
  • तटीय क्षेत्र

अब हम भारत के उत्तर का पर्वतीय क्षेत्र व हिमालय पर्वत श्रंखला की विस्तृत जानकारी प्राप्त करेंगे। तो आइए वृहद, अडिग, हिम आच्छादित, भारत का ताज हिमालय की विशालता व नैसर्गिक सौन्दर्य का अध्ययन करें।

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हिमालय पर्वत

हिमालय श्रंखलाओं में प्रमुख व महत्वपूर्ण शिखर सागर माथा हिमाल, अन्नपूर्णा, लांगतंग, गौरीशंकर, धौलागिरि, कंचनजंघा आदि हैं। हिमालय में विश्व की अधिकांश ऊँची श्रंखलाए विराजमान हैं। हिमालय में 7200 मीटर ऊँचे 100 से अधिक शिखर समाहित हैं। अत: विश्व के अधिकतर ऊँचे शिखर हिमालय में ही स्थित हैं।     

हिमालय शब्द संस्कृत के दो शब्दों – हिम + आलय से मिल कर बना है। हिम का अर्थ बर्फ तथा आलय का अर्थ घर होता है। इस आधार पर हिमालय शब्द का अर्थ है बर्फ का घर अर्थात हिम से परिपूर्ण व बर्फ से घिरा हुआ क्षेत्र।

उत्तरीय पर्वतीय क्षेत्र जिसे हिमालयन रेंज भी कहा जाता है उसे मध्य एशिया यूरोप तक फ़ैली श्रंखलाओं का क्रम माना जाता है। इनके बीच पामीर की गाँठ पाई जाती है। अध्ययन की सुविधा की दृष्टि से हिमालय श्रंखला को चार श्रेणियों में विभक्त किया गया है –

महान हिमालय, लघु हिमालय, शिवालिक हिमालय तथा ट्रांस हिमालय।

महान हिमालय

महान हिमालय हिमालय पर्वत की सबसे ऊँची श्रेणी है। इसकी लम्बाई पूर्व से पश्चिम दिशा में 2400 किमी॰ बलूचिस्तान से लेकर बर्मा तक है। इस श्रेणी को हिमादरी, मध्य हिमालय, मुख्य हिमालय एवं बर्फ़ीला हिमालय कहा जाता है। इसकी औसत ऊँचाई 6000 मी॰ तथा औसत चौड़ाई 25 किमी॰ है।

महान हिमालय श्रेणी पर संसार की सर्वाधिक ऊँची चोटियाँ पाई जाती हैं जिनमें माउन्ट एवरेस्ट प्रमुख है। इसके अन्य नाम सागर माथा, गौरी शंकर, छोमों लाग्मा आदि कहा जाता है। अन्य चोटियाँ हैं – नन्दा देवी, गोसाइथान, कंचनजंघा, मकालू, अन्नपूर्णा एवं धौला गिरि हैं। गंगा व यमुना नदियाँ महान हिमालय से ही निकलती हैं।    

लघु हिमालय

महान हिमालय के दक्षिण में तथा उसी के समानांतर हिमालय की दूसरी श्रेणी पाई जाती है जिसे लघु हिमालय कहा जाता है। लघु हिमालय को हिमांचल श्रेणी भी कहा जाता है। इसकी लम्बाई 2400 किमी॰ मानी जाती है। इसकी औसत ऊँचाई 3000-4500 मी॰ तथा चौड़ाई 80-100 किमी॰ है।

लघु हिमालय की प्रमुख चोटियाँ धौलाधर, पीर पंजाल, महाभारत लेख, चूरिया रेंज, मंसूरी रेंज हैं। जिनमें पीर पंजाल सबसे लम्बी पर्वत श्रेणी है। इस पर्वतमाला में महत्वपूर्ण घास के मैदान पाये जाते हैं। जिन्हें कश्मीर में गुलमर्ग व सोनमर्ग तथा उत्तराखण्ड में वुग्याल एवं पयार कहते हैं।

लघु हिमालय के मध्यवर्गीय भागों में हरी – भरी घाटियां हैं, जो दून के नाम से जानी जाती हैं। इस श्रेणी में अन्य महत्वपूर्ण, रोचक एवं रमणीय स्थल भी हैं जैसे – शिमला, मंसूरी, नैनीताल, डलहौजी, अल्मोड़ा, दार्जिलिंग और रानीखेत।

शिवालिक हिमालय

शिवालिक हिमालय को बाह्य या उप हिमालय भी कहते हैं। इसकी लम्बाई 2000 किमी॰ के लगभग मानी जाती है। शिवालिक हिमालय लघु हिमालय के दक्षिण में उसके समानांतर में विद्यमान है। इसकी ऊँचाई 600 मी॰ से 1500 मी॰ तथा चौड़ाई 40-50 किमी॰ तक पाई जाती है।

शिवालिक हिमालय का सबसे नवीन भाग माना जाता है। लघु हिमालय से शिवालिक को अलग करने वाली घाटी पश्चिम में ‘इन’ तथा पूर्व में ‘द्वार’ कहलाती है। इसको पूर्व में चूरिया एवं भूरिया, मध्य में गोरखपुर डुडवा, पश्चिम में हिमांचल एवं कश्मीर तथा अरुणाचल प्रदेश में डाकला, मिरी व मिसमी कहा जाता है।

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ट्रांस हिमालय

विषय के अंतर्गत ट्रांस हिमालय महान हिमालय के उत्तर में तथा तिब्बत के दक्षिण में स्थित है। इसकी लम्बाई 960 किमी॰ तथा चौड़ाई मध्य में 250 किमी॰, किनारे पर 40 किमी॰ मानी जाती है। ट्रांस हिमालय 4100 से 5700 मी॰ ऊँचा है।

कुछ खगोल वैज्ञानिकों के अनुसार हिमालय श्रंखलाओं को चार अन्य भागों में विभक्त किया गया जिनमें सिडनी वूरीड प्रमुख हैं-

पंजाब हिमालय

यह हिमालय सिंध से सतलज तक फैला है। इसकी लम्बाई 562 किमी॰ है। इसकी प्रमुख चोटी ब्रम्ह्स्थल है।

कुमायूं हिमालय

यह हिमालय सतलज से काली नदी तक विस्तृत है। इसकी लम्बाई 320 किमी॰ है। प्रमुख श्रेणी बद्रीनाथ, केदारनाथ, त्रिशूल, गंगोत्री व यमुनोत्री में स्थित हैं।

नेपाल हिमालय

यह हिमालय काली नदी से तिस्ता नदी तक फैला है। इसकी लम्बाई 800 किमी॰ है। एवरेस्ट, गोसाइथान, धौलागिरि, अन्नपूर्णा, कंचन जंघा तथा मकालू आदि इसकी चोटियाँ हैं।

असम हिमालय

इस हिमालय का तिस्ता से ब्रम्हपुत्र तक इसका विस्तार है। इस हिमालय पर्वत की लम्बाई 750 किमी॰ है। असम हिमालय कि प्रमुख चोटियाँ कला काँगड़ी, चमलहारी, कावरू पोहनी है।

आशा करती हूँ कि भारत का परिचय तथा भारत का शिरोधार्य हिमालय पर्वत श्रंखलाओं संबंधी जानकारी आप सभी पाठकों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी। इस विषय के दूसरे भाग में भारत की प्रसिद्ध नदियों व प्रमुख झीलों से संबन्धित आवश्यक तथा महत्वपूर्ण ज्ञान प्रदान करने का प्रयास किया जाएगा।

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