Bharat Ke Lok Nritya | 10 Best राज्य, लोक नृत्य का अर्थ और महत्व

BHARAT KE LOK NRITYA

भारत के लोक नृत्य

Bharat ke Lok Nritya भारतीय संस्कृति को विशिष्टता के शिखर पर विराजमान करते हैं।

नृत्य कला सांस्कृतिक मान्यताओं, धार्मिक परम्पराओं और सामाजिक विविधता के परिचायक हैं।

नृत्य कला तीज, त्योहारों, संस्कारों व धार्मिक अनुष्ठानों में नवीन चेतना, उत्साह, उमंग व प्रसन्नता को उत्पन्न करने में सहायक होते हैं।

यह राज्य, स्थान, जाति, धर्म, प्रदेश तथा संस्कारों के आधार पर भिन्न भिन्न होते हैं, और संबन्धित प्रदेश की परंपरा व संस्कारों को उद्घाटित करते हैं।

मधुर संगीत, घुंघुरुओं की झंकार, वाद्य यंत्रों की सरगम के साथ कदम ताल का संयोजन किसको अपनी ओर आकर्षित नहीं करता।

यही कारण है कि ये भारतीयों की संस्कृति की पहचान, दिल की धड़कन, मन का सुकून, भावना प्रदर्शन का माध्यम, उल्लास बिखेरने का साधन तथा अभिव्यक्ति का उदघाटन है।

लोक नृत्य विभिन्न शुभ अवसरों पर, हर्षौल्लास, उमंग तथा तनाव से मुक्ति प्रदान करते हैं। संगीतमय रंगारंग नृत्य की प्रस्तुति सभी का मन मोहने में सक्षम प्रतीत होते है।

जिसप्रकार भारत की विभिन्न मान्यताएँ, परंपराए, भाषाएँ और सभ्यताएं मिलकर भारत के अस्तित्व को उजागर करती हैं, उसीप्रकर नृत्य कला भारतीय सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हैं।

प्रस्तुत विषय विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे– यूपीएससी, राज्य पीएससी, रेलवे, बैंक एवं एसएससी आदि के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।

इसलिए प्रतियोगी परीक्षाओं की आवश्यकता तथा जानकारी के महत्व को दृष्टि में रखते हुए आज मैं प्रस्तुत पोस्ट के माध्यम से भारत के लोक नृत्य का अर्थमहत्व तथा संबंधित राज्य और लोक नृत्यसंबंधी महत्वपूर्ण व रोचक जानकारी साझा कर रही हूँ

तो आइए सर्वप्रथम संगीत के सुरों तथा वाद्य यंत्रों की ध्वनि से सुसज्जित नृत्य कला का अर्थ व महत्व विषय का अध्ययन करें।   

लोक नृत्य का अर्थ महत्व

भारत में  लोक नृत्य भिन्न – भिन्न राज्यों में वहाँ की संस्कृति तथा सभ्यता के आधार पर प्रतिस्थापित है। विभिन्न राज्यों की संस्कृतियों के द्वारा ही भारत की संस्कृति का निर्माण होता है।

इस दृष्टि से लोक नृत्य भारत की संस्कृति को प्रदर्शित करते हैं। अब नृत्य व भारत के लोक नृत्य के अर्थ को समझना आवश्यक है।

शरीर के अंगों की मुद्राए, चेहरे के हाव – भाव, कदमों की नियंत्रित गति तथा संगीत के संयोजन के साथ भावों की अभिव्यक्ति के प्रदर्शन को नृत्य कहते हैं।

नृत्य कला चौसठ कलाओं में एक महत्वपूर्ण कला है। इसमें संगीत का भी विशेष महत्व होता है। संगीत के अभाव में नृत्य का प्रदर्शन अधूरा व नीरस सा प्रतीत होता है।

संगीत और नृत्य मन की भावनाओं को प्रकट करने का अच्छा माध्यम होता है। लोक नृत्य जिसे फोक डांस, सामाजिक नृत्य, स्वाभाविक नृत्य, जन जातीय नृत्य तथा प्राकृतिक नृत्य की संज्ञा दी जाती है।

यह विभिन्न राज्यों के स्थानीय लोगों द्वारा प्रदर्शित किए जाते हैं। लोक नृत्य में किसी विशेष शास्त्रीय नियम व अनुशासन की आवश्यकता नहीं होती है।

ये मानव मन को आनंदित करके जीवन में उमंग की लहर चलाते हैं। लोक नृत्य पारंपरिक तरीके से विभिन्न शुभ अवसरों, धार्मिक अनुष्ठानों व सांस्कृतिक उत्सवों में सम्पन्न किए जाते हैं।

इस प्रकार मनोरंजन के क्षेत्र में लोक नृत्य का अत्यधिक महत्व है। मानव जीवन विभिन्न कलाओं से सम्पन्न एवं सुसज्जित होता है। कलाएं मानव मन की भावनाओं व कौशल को उजागर करती हैं।

जिस देश में जितनी अधिक कलाओं का प्रचलन होता है। वह देश उतना ही अधिक समृद्धशाली  माना जाता है। इस दृष्टि से भारत देश सर्वाधिक धनी व समृद्धि सम्पन्न देश है।

भारत देश की विभिन्न कलाओं चित्रकला, मूर्तिकला, हस्तकला, संगीत कला, अभिनयकला के समान ही लोक नृत्य भी अत्यंत प्राचीन,एवं गौरवपूर्ण है।

लोक नृत्य का इतिहास उन्नीसवी शताब्दी से भी पहले का है। अत: प्राचीनता व समृद्धि संपन्नता के आधार पर भी इनका विशेष महत्व है।   

ये अन्य देशों की अपेक्षा भारतदेश को अधिक विशिष्ट बनाते हैं, क्योकि सरलता पूर्वक, मोहक स्वरूप में अपने भावों, संस्कृति, सभ्यता और परम्पराओं को प्रदर्शित करने की अद्भुत कला अन्यत्र दुर्लभ है।

साधारण, सरस, सजीव, संगीतमय, भावुक तथा प्रभावशाली प्रस्तुति के फलस्वरूप लोक नृत्य का महत्व अधिक बढ़ गया है।

ये भारतवासियों में आनंद, उल्लास, उमंग, हर्ष और प्रसन्नता को जाग्रत करने के साथ – साथ समाज में नवीन चेतना व ऊर्जा का संचार भी करते हैं।

लोक नृत्य जनसंस्कृति व परम्पराओं को प्रदर्शित करने का मनोहारी माध्यम हैं। धार्मिक, सांस्कृतिक, सामाजिक उत्सवों, ऋतुओं के अनुसार तथा फसलों के मौसम में लोक नृत्य का प्रदर्शन किया जाता है।

यह हमारी सामाजिक परंपरा व मान्यताओं को जीवंत रखते हैं। लोक नृत्य सौहार्द्य, आपसी मेलजोल, एकता भाव व प्रेम को प्रसारित करके सामाजिक सम्बन्धों को प्रगाढ़ता प्रदान करने में भी विशेष रूप से सहायक हैं।

भारत में नृत्य कला की परंपरा अनादिकाल से चली आ रही है। लोक नृत्य का महत्व शब्दों में प्रकट करना संभव ही नहीं है। हम इसे परिभाषित अवश्य कर सकते है,

किन्तु उन भावों को समझना, आनंद लेना और मुग्ध हो जाना तो बस लोक नृत्य के प्रदर्शन से ही संभव है। जैसा कि हम जानते है कि प्रत्तेक राज्य के लोक नृत्य भिन्न – भिन्न होते है।

संबंधित राज्य और उनके लोक नृत्य

लोक नृत्य देश कि संस्कृति और सभ्यता का अनमोल अंग हैं। सभी राज्यों की प्रथक – प्रथक संस्कृति को यह प्रकट करते हुए देश में अपनी अलग पहचान स्थापित करते हैं। भारत अनेक राज्यों का समग्र स्वरूप है।

सभी राज्य मिलकर भारत की संस्कृति को निर्मित करते हैं और लोक नृत्य उन्हीं संस्कृतियों को विश्व में उजागर करने में सहायक सिद्ध होते हैं। अब हम संबंधित राज्य और उनके लोक नृत्य का अध्ययन करेंगे।

पंजाब

पंजाब उत्तर – पश्चिम भारत का एक राज्य है। यह भारत का सर्वाधिक समृद्धिशाली राज्य है। इसकी राजधानी चंडीगढ़ है। पंजाब राज्य में 20 जिले हैं।

पंजाब की आधिकारिक भाषा पंजाबी है। यहाँ के प्रसिद्ध दर्शनीय स्थलों में अमृतसर, गोल्डेन टेम्पल, जगतजीत पैलेस, रायपुर किला, भटिंडा प्राणी उद्यान, नूरपुर किला, रॉक गार्डेन आदि है।

भांगड़ा व गिद्दा पंजाब के प्रमुख लोक नृत्य हैं। भांगड़ा पुरुषों के द्वारा किया जाता है, और गिद्दा महिलाओं द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। यह दोनों ही लोक नृत्य सांस्कृतिक अवसरों पर आयोजित किए जाते हैं।

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राजस्थान

राजस्थान राज्य की राजधानी जयपुर है। क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत गणराज्य का सबसे बड़ा राज्य है। राजस्थान को अत्यधिक रंगीन राज्य भी माना जाता है।

जयपुर को गुलाबी शहर कहा जाता है। राजस्थान में प्रमुख रूप से ब्रजभाषा तथा हिन्दी भाषा का प्रयोग होता है।

माउंट आबू, हवामहल, लेक पैलेस, गोरबंद पैलेस, डूंगरपुर, उमीद भवन पैलेस तथा देवीगढ़ जैसे अनेक किले दर्शनीय हैं।

कालबेलिया, घूमर, तेरहताली, भवाई नृत्य यहाँ के प्रसिद्ध लोक नृत्य हैं। जिनमे घूमर सर्वाधिक लोकप्रिय नृत्य है। लोक नृत्य की रोचक झलक घूमर नृत्य में देखी जा सकती है।

घूमर नृत्य त्यौहार, समारोहों तथा धार्मिक पर्वों में किया जाता है। घूमर नृत्य में पहने जाने वाले घाघरे विशेष आकर्षण का केंद्र होते है।

महाराष्ट्र  

महाराष्ट्र राज्य भारत के दक्षिण मध्य में स्थित है। इसकी राजधानी मुंबई तथा राजभाषा मराठी है। महाराष्ट्र भारत का तीसरा बड़ा राज्य है।

यहाँ के रोचक व महत्वपूर्ण दर्शनीय स्थल हैं – कान्हेरी और कारला गुफाएँ, महाबलेश्वर, अंबोली, चिकलधारा, अजंता, एलोरा, एलीफेंटा की गुफाएँ आदि।

नासिक, शिरडी, नादेड़, पंढरपुर, कोल्हापुर, त्रयंबकेश्वर, भीमशंकर, हरिहरेश्वर आदि प्रसिद्ध धार्मिक स्थल भी हैं।

यहाँ के प्रमुख लोक नृत्य तमाशा व लावणी हैं। तमाशा एक प्रकार का नाटिका नृत्य होता है।लावणी महाराष्ट्र का सबसे अधिक लोकप्रिय नृत्य है।

इस नृत्य में पहनी गई साडी विशेष आकर्षण का केंद्र होती है। घुंघुरुओं की झंकार के साथ गीत संगीत का समायोजन मन को अनायास ही अपनी मोहकता में विलीन कर लेता है।

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गुजरात

गुजरात भारत के पश्चिम दिशा में स्थित राज्य है। गुजरात की राजधानी गांधीनगर है। यहाँ की राजभाषा गुजराती है। गुजरात का सबसे बड़ा व प्रसिद्ध शहर अहमदाबाद है।

यहाँ पर्यटकों को आकर्षित करने वाले अनेक स्थल हैं। जिनमें सतपुड़ा की पहाड़ियाँ, मांडवी बीच, कच्छ व भुज, पोरबंदर, सिद्धपुर, बड़नगर, घुरनली आदि हैं।

इनके अतिरिक्त द्वारिकाधीश मंदिर, सोमनाथ मंदिर, अंबाजी भद्रेश्वर, सूर्यमंदिर आदि धार्मिक स्थल भी विश्व प्रसिद्ध हैं।

गुजरात के प्रमुख लोक नृत्य गरबा, डांडिया रास, टिप्पनी, जुरुन, भवई भी लोक नृत्य की श्रेणी में आते हैं। इन सभी लोक नृत्यों में गरबा गुजरात का सर्वाधिक लोकप्रिय नृत्य है।

यह धार्मिक नृत्य माना जाता है। गरबा लोक नृत्य नवरात्रि के नौ दिनों में विशेष रूप से आयोजित किया जाता है। यह एक समूह नृत्य होता है।

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उत्तराखण्ड

सन 2007 से पहले जिसे उत्तरांचल नाम से जाना जाता था। अब हम उस राज्य को उत्तराखण्ड के नाम से अभिहित करते हैं।

उत्तराखण्ड में गढ़वाली, कुमाउनी, पंजाबी व नेपाली भाषाओं का प्रयोग होता है, किन्तु शासकीय भाषा हिन्दी है। यह भारत का 27वां राज्य है।

उत्तराखण्ड जिसे देवभूमि भी कहते है। उत्तराखण्ड पर्यटन की दृष्टि से अद्भुत व अविश्वसनीय राज्य है।

उत्तराखण्ड में नैनीताल, अल्मोड़ा, कौसानी, रानीखेत, मसूरी आदि हिल स्टेशन अपनी अनोखी छटा बिखेरते हैं।

इनके अतिरिक्त गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ, नानकमत्ता, बागेश्वर आदि पवित्र धार्मिक स्थल भी विद्यमान हैं।

उत्तराखण्ड राज्य के अनेक लोक नृत्य हैं, उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण हेतु लोक नृत्य का विशेष स्थान है।

उत्तराखण्ड के प्रमुख लोक नृत्य झोड़ा नृत्य, छौलिया, हारूल, बुड़ियात, चौफला, कजरी तथा जागर आदि हैं।

छौलिया उत्तराखण्ड का सबसे प्रसिद्ध लोक नृत्य है, जो विवाह के अवसरों पर युद्ध की वेशभूषा में आयोजित किया जाता है।

हिमांचल प्रदेश

हिमांचल प्रदेश पश्चिम हिमांचल में बसा राज्य है। इसकी प्राकृतिक मनोहरता अकल्पनीय है। यहाँ की राजधानी शिमला तथा मुख्य भाषा हिन्दी और पहाड़ी है।

दर्शनीय स्थलों में शिमला अत्यंत प्रसिद्ध है। इसके अतिरिक्त वन्य जीव अभ्यारण, राष्ट्रीय उद्यान, पालमपुर, कुल्लू मनाली आदि रोचक स्थल हैं।

भीमकाली, हटकोटी, चामुंडादेवी, नैनादेवी चिंतपर्णी मंदिर प्रमुख आकर्षण का केंद्र हैं। हिमांचल प्रदेश जितना प्राकृतिक सुषमा से सुशोभित है, उतना ही लोक नृत्य से रंगारंग भी।

नृत्यों की मनोहारी झांकी यहाँ के लोक नृत्य में पाई जाती है। छपेली, दाँगी, थाली, झोरा, झाली, धामन, नटी आदि हिमांचल प्रदेश के प्रमुख लोक नृत्य हैं। 

यहाँ थाली नृत्य का विशेष प्रचलन है। इस नृत्य में शारीरिक संतुलन आकर्षण का प्रमुख केंद्र होता है। नर्तक सिर पर गगरे व कलश रख कर प्रदर्शन करते हैं। ये उत्सवों, पर्वों व धार्मिक कृत्यों में आयोजित किया जाता है।

पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल भारत के पूर्व भाग में स्थित है। इसकी राजधानी कोलकाता तथा बग्ला राजभाषा है। इस राज्य में 22 जिले हैं।

कोलकाता, सुंदरवन्स, सागरद्वीप, तारकेश्वर, बंदेल, दुर्गापुर, मुकुटमणिपुर, विष्णुपुर, जलदापारा, दीघा आदि प्रमुख पर्यटक स्थल हैं।

जात्रा, ढाली, छाऊ यहाँ के प्रमुख लोक नृत्य हैं। जात्रा अत्यधिक प्राचीन परंपरा का लोक नृत्य है। तह नृत्य नाटिका के रूप में प्रसिद्ध है। छाऊ नृत्य गीत संगीत से परिपूर्ण होता है।

यह धार्मिक व सांस्कृतिक अवसरों पर आयोजित किया जाता है।

मध्य प्रदेश

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल तथा राजभाषा हिन्दी, सिंधी व बुन्देली हैं। मध्यप्रदेश की सीमा पाँच राज्यों से मिल कर बनी है।

कान्हा फिसली, मैहर, भोपाल, चित्रकूट, उज्जैन, ओकारेश्वर, बांधवगढ़, भीम बेटका, महाकालेश्वर मंदिर आदि मध्य प्रदेश के दर्शनीय स्थल हैं।

पंडवानी, गणगौर मध्य प्रदेश के प्रमुख नृत्य हैं। पंडवानी एकल लोक नृत्य है तथा गणगौर नवरात्रि के चैत्र मास में प्रदर्शित किया जाने वाला लोक नृत्य है।

उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश भारत के उत्तर में स्थित है। इसी लिए इसे उत्तर प्रदेश कहा जाता है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ है।

इसे सर्वाधिक जनसंख्या वाला राज्य भी कहा जाता है। वाराणसी, विंध्याचल, अयोध्या, प्रयाग, मथुरा, वृन्दावन, देवशरीफ, सारनाथ, फतेहपुर सीकरी देवगढ़ आदि यहाँ के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल हैं। 

उत्तर प्रदेश के लोक नृत्यों नौटंकी नृत्य प्रमुख है। नौटंकी अत्यंत लोक प्रिय नृत्य है। इसमे वाद्य, गीत, नृत्य, अभिनय, दोहा सभी का समन्वय होता है।

असम

असम उत्तर पूर्वी भारत का राज्य है। यहाँ का सबसे बड़ा शहर गुवाहाटी है। असम की राजधानी दिसपुर और राजभाषा असमिया है।

यहाँ की प्राकृतिक सुषमा दर्शनीय है। कांजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान, मानस राष्ट्रीय उद्यान, दरंग, बरोदा, गुवाहाटी आदि स्थान प्रसिद्ध हैं।

बिहू, नटपूजा, महारास, नागानृत्य, झूमूरा आदि असम के प्रमुख लोक नृत्य हैं। इनमें विशेष रूप से बिहू नृत्य का महत्व असम राज्य में है।

बिहू अधिकाशत: ग्रामीण क्षेत्रों में फसल की कटाई के समय किया जाता है। इस लोक नृत्य में साधारण पोशाक धोती, कुर्ता, गमछा ही पहना जाता है। बिहू नृत्य को उत्सवों की शान माना जाता है।

प्रस्तुत लेख के माध्यम से लोक नृत्य व विभिन्न राज्यों का अध्ययन करके हम लोक नृत्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी का ज्ञान सरलता से प्राप्त करने में सक्षम हो सकते हैं।

आप सभी स्वस्थ रहें, मस्त रहें और सुरक्षित रहें नमस्कार

51 thoughts on “Bharat Ke Lok Nritya | 10 Best राज्य, लोक नृत्य का अर्थ और महत्व”

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