Bharatiy Jhile Aur Sambandhit Rajya | 13 Best राज्य और भारत की झीलें

BHARATIY JHILE AUR SAMBANDHIT RAJYA

भारतीय झीलें और संबन्धित राज्य

Bharatiy Jhile Aur Sambandhit Rajya विषय भारत की प्रमुख झीलों का वर्णन करते हुए उनसे संबन्धित राज्यों की व्याख्या करता है। प्रस्तुत विषय के अंतर्गत आज हम भारत की महत्वपूर्ण झीलों और उनके राज्यों से जुड़ी जानकारी प्राप्त करने का प्रयास करेंगे।

भारत की झीलों से जुड़ी जानकारी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी आवश्यक है। प्रस्तुत लेख से पहले हमने अपनी वेबसाइड में भारत के परिचय जैसे महत्वपूर्ण और आवश्यक लेख को शामिल किया है।

जिसमें भारत के हिमाच्छादित हिमालय पर्वत, रजत सम शीतलता प्रवाहित करती हुई भारत की नदियाँ, अप्रतिम सौंदर्य बिखेरने वाली भारत की झीलें तथा जलप्रपातों की नैसर्गिक सुंदरता को समाहित किया है।

यह पोस्ट भारत की झीलें शीर्षक लेख की अगली कड़ी है। इस लेख में हम भारत की झीलें और उनसे संबन्धित राज्य के नामों की केवल सूची नहीं बल्कि विस्तार से अध्ययन करेंगे। भारत की झीलें विषय को संपूर्णता प्रदान करने के उद्देश्य से प्रस्तुत है, आज का लेख-

संबन्धित राज्य

प्रस्तुत लेख के माध्यम से आज हम भारत की झीलों के परिचय के साथ ही उनसे संबन्धित राज्यों का रोचक वर्णन प्राप्त करेंगें। वास्तव में हमारे देश की प्राकृतिक सुंदरता अत्यंत आकर्षक, मनोहारी व हृदयस्पर्शी है।

हम सभी लोग तनाव को दूर करने के लिए हिल स्टेशन पर जाना पसंद करते हैं, क्योकि वहाँ के हिमालय चोटियों की अडिगता हमें साहस तथा नई सोच प्रदान करती है। सरस, निर्मल नदियाँ शांति देती हैं, तो वहीं झरने जीवन को गति प्रदान करने का आभास देते हैं।

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अब हम झीलों का राज्यवार और क्रमबद्ध अध्ययन करते हुए भारत की सबसे बड़ी खारे पानी की झील कौन सी है? भारत की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील कौन सी है? भारत की सबसे बड़ी कृत्रिम झील कौन सी है? भारत की सबसे लम्बी झील कौन सी है? आदि प्रश्नों का उत्तर भी जानने का प्रयास करेंगें।

राजस्थान

राजस्थान राज्य में भारत की अनेकों झीलें पाई जाती हैं। जिनमें प्रमुख सांभर झील, पुष्कर झील, नक्की झील, राजसमंद, जयसमंद झील, देबर झील, पंचभद्रा झील, फतेहसागर, डीडवाना, पिछौला, आनासागर आदि हैं।

राजस्थान की सांभर झील भारत की सबसे बड़ी खारे पानी की झील मानी जाती है। इसकी लंबाई 129 किमी॰ तथा चौड़ाई 8 से 10 किमी॰ है। यह झील 6-10 मी॰ गहरी है। यह खारे पानी की झील है। पंचभद्रा झील भारत की दूसरी खारे पानी की झील की श्रेणी में आती है।

राजस्थान में प्राय: नमकीन झीलें ही पाई जाती हैं, जिन्हें टेथिस सागर का अवशेष माना जाता है। पुष्कर झील अजमेर जिले के पुष्कर शहर में स्थित है। यह हिंदुओं की पवित्र झील मानी जाती है। देबर झील मानव द्वारा निर्मित झील है, जिसे उदयपुर के राजा ने बनवाया था।  

आंध्रप्रदेश

आंध्र प्रदेश की प्रमुख झीलें हैं – पुलिकट झील, कोल्लेरु झील, हैदराबाद शहर झील, सरूर नगर झील, ओसमान सागर, हुसैन सागर, हिमाकत सागर आदि। पुलिकट झील में श्रीहरीकोटा द्वीप स्थित है। यह झील खारे पानी की है।

कोलेरू झील गोदावरी व कृष्णा नदी के बीच में स्थित है। कोलेरू झील भारत की ताजे पानी की सबसे बड़ी झील मानी जाती है। पुलिकट व कोलेरू झीलें अनूप झीलों के अंतर्गत आती हैं। यह आंध्रप्रदेश और तमिलनाडु की सीमा तट पर स्थित है। अनूप झील झीलों का एक प्रकार है, जिसका विस्तार से पिछले पोस्ट में वर्णन किया गया है।  

केरल     

केरल राज्य में वेम्बनाड झील, सास्तामकोट्टा झील, अष्टमुडी झील, परावूर झील, वेल्लयानी झील, पुन्नमदा झील, पेरियार झील आदि पाई जाती हैं। पेरियार झील सन 1895 से स्थापित है। पेरियार झील के किनारे हाथी अभ्यारण, बाघ अभ्यारण तथा पेरियार वन्य जीव अभ्यारण स्थित है। यह झील लगभग 26 वर्ग किलोमी॰ में विस्तृत है।  

वेम्बनाड खारे पानी की लैगून झील है। लैगून झील झीलों का एक प्रकार है। वेम्बनाड झील भारत की सबसे लम्बी झील है, तथा केरल की सबसे बड़ी झील है। वेल्लयानी झील त्रिवेन्द्रम से 9 किमी॰ की दूरी पर स्थित है। यह केरल राज्य की मीठे पानी की झील है।

सास्ताम कोट्टा झील केरल राज्य की सबसे बड़ी ताजे पानी की झील है। ये केरल राज्य की सबसे खूबसूरत झील मानी जाती है। यह झील कोल्लम शहर से 29 किमी॰ की दूरी पर है।

अष्टमुड़ी झील का क्षेत्रफल 200 वर्ग किमी॰ है। यह केरल के कोल्लम के पास स्थित है। अष्टमुड़ी झील पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण का केंद्र है। परावूर झील केरल की अन्य झीलों की  तुलना में छोटी झील है, किन्तु एक अद्भुत झील है। यह प्राकृतिक सौन्दर्य से युक्त मालाबार तट पर स्थित है। 

जम्मू कश्मीर

भारत की अनेक झीलें जम्मू कश्मीर राज्य में पाई जाती हैं, जैसे– मानसबल, गंगाबल, डल झील, वुलर झील, शेषनाग, अनंतनाग, गंधरबल, नागिन झील, मानसर झील, सुरिसर झील, विशनसर झील तथा पेंगोग-त्यो झील आदि। वुलर झील कश्मीर की सबसे बड़ी झील है, जो पर्यटन की दृष्टि से राज्य का सर्वाधिक रोचक स्थल है।

वुलर झील को गोखुरझील भी कहते हैं। यह मीठे पानी की झील है। डल झील कश्मीर की दूसरी महत्वपूर्ण झील है। यह ताजे पानी की झील है। डल झील श्रीनगर में स्थित है। यह पर्यटन हेतु अत्यधिक मनोरम स्थल है। इसके सौन्दर्य को देखते हुए इसे ‘श्रीनगर का गहना’ भी कहा जाता है।

डल झील के किनारे स्थित दो बाग शालीमारबाग व निशातबाग तथा मुगल गार्डेन इस झील की शोभा में चार चाँद लगाते हैं। डल झील का प्रमुख आकर्षण हैं वहाँ के शिकारे और हाउसबोट। इन हाउसबोट में रहकर झील के अप्रतिम सौन्दर्य का आनंद लिया जा सकता है।

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उत्तराखण्ड  

उत्तराखण्ड में भारत की महत्वपूर्ण झीलें पाई जाती हैं, जिनमें नैनीझील, भीमताल, सातताल, नौकुचियाताल, खुर्पाताल, नंदीकुंड, हेमकुंड लोकपाल, गोहनाताल, डोडीताल, बदानीताल झील, पूनाताल, देवरीताल, रूपकुंड, सागरियाताल, वसूकीताल आदि हैं।

नैनीझील प्रसिद्ध पहाड़ी पर्यटन स्थल नैनीताल में स्थित है, जिसे ‘लेक डिस्ट्रिक’ भी कहा जाता है। इसका आकार अर्धचन्द्राकार है। इस झील के किनारे नैनादेवी मंदिर स्थापित है जिसके कारण इसका नाम नैनीझील पड़ा।

भीमताल यह कूमायूं क्षेत्र की दूसरी बड़ी झील है। इसका आकार अँग्रेजी के C की तरह दिखता है। गोहनाताल गढ़वाल के चमोली जिले में स्थित है। नौकुचियाताल भीमताल से 5 किमी॰ दूर नैनीताल जिले में स्थित है। इस झील में नौ कोने होने के कारण इसका नाम नौकुचियाताल पड़ा।

सातताल नैनीताल से 22 किमी॰ व भीमताल से 4 किमी॰ दूरी पर है। यह कुमाऊँ कि सर्वाधिक खूबसूरत झील है। खुर्पाताल नैनीताल से 12 किमी॰ दूर स्थित है। इसका आकार जानवरों के खुर के समान दिखता है इसीलिए इसका नाम खुर्पाताल है।  

महाराष्ट्र   

लोनार झील, सलीमअली झील, पोवई झील, पाषाण झील, उपवन झील, रनकला झील, शिवसागर झील, वेन्ना झील आदि महाराष्ट्र राज्य की प्रमुख झीलें हैं। इनमें सर्वाधिक लोकप्रिय लोनार झील है। लोनार झील मुंबई से 500 किमी॰ दूरी पर है। लोनार झील का निर्माण 50,000 वर्ष पहले एक उल्कापिंड के पृथवी से टकराने से हुआ था।

यह झील ज्वालामुखी द्वारा निर्मित कही जाती है। यह खारे पानी की झील है। इस झील को एक प्राकृतिक रहस्य भी माना जाता है। सलीमअली झील का नाम प्रसिद्ध विज्ञानी सलीमअली के नाम पर रखा गया है। इसे सलीमअली सरोवर व सलीमअली तालाब भी कहा जाता है। 

मणिपुर

मणिपुर की एक प्रसिद्ध झील लोकताल झील है। झील का क्षेत्रफल लगभग 280 वर्ग किमी॰ है। यह उत्तर भारत की ताजे पानी की सबसे बड़ी झील है। यहाँ तैरता हुआ राष्ट्रीय उद्यान ‘केयबुल लामजाओ’ है। लोकताल झील आर्थिक व सांस्कृतिक दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण झील है।

यह झील जल विद्युत उत्पादन का अच्छा माध्यम है। मणिपुर के निवासी कृषि के साथ – साथ अन्य उत्पादों के लिए लोकताल झील पर निर्भर हैं। अनेक छोटी छोटी नदियों का पानी इस झील में मिलता है। यह झील प्राकृतिक सौन्दर्य का अच्छा उदाहरण है।

सिक्किम   

सिक्किम राज्य की पाँच प्रमुख झीलें प्रसिद्ध हैं। लंपोखरी झील, गुरड़ोगमार झील, सोंगमो या चांगु झील, खेचेओपलरी झील, त्सो ल्हामो झील।

लंपोखरी झील रेनाक के पास स्थित है। यह गंगटोक से 3 घंटे की दूरी पर है। इस झील को अरिताल भी कहा जाता है। यह समुद्रतल से 4600 फिट की ऊंचाई पर स्थित है। गुरड़ोगमार झील 5210 मी॰ की ऊँचाई पर स्थित है। यह मीठे पानी की झील है। यह उत्तरी सिक्किम प्रांत में तथा कंचनजंगा पहाड़ियों के उत्तर – पूर्व में स्थित है।

सोंगमो झील पूर्वी सिक्किम में स्थित है। इसे चांगु झील भी कहते हैं। यह गंगटोक से लगभग 40 किमी॰ आगे है। खेचेओपलरी झील बौद्ध धर्म वालों का पवित्र जलाशय है। हिन्दू धर्म के लोग भी इस झील को धार्मिक और मनोकामना पूर्ण करने वाली मानते हैं। खेचेओपलरी शब्द का अर्थ उड़ने वाले फरिश्ते व स्वर्गदूत है।

त्सो ल्हामो झील इसे चोलामु झील भी कहा जाता है। यह विश्व कि ऊँची झीलों में से एक है। इसकी ऊँचाई 5330 मी॰ है, तथा यह उत्तरी सिक्किम में स्थित है।

ओड़ीसा

ओड़ीसा की झीलों में प्रमुख झीलें हैं – चिल्का झील अंशुपा झील, वालीमेला जलाशय, कंजिया झील, इंद्रावती जलाशय आदि। चिल्का झील भारत की सबसे बड़ी लैगूर झील है। यह खारे पानी की झील है। चिल्का झील भारत की पहली और विश्व की दूसरी सबसे बड़ी समुद्री झील है।

इस झील में अनेक छोटे छोटे झील पाये जाते हैं। कंजिपा झील प्राकृतिक झील है, जो भुवनेश्वर के बाहरी इलाके में स्थित है। चिल्का के बाद अंशुपा झील ही यहाँ की प्रमुख झील मानी जाती है। यह भुवनेश्वर से लगभग 50 किमी॰ की दूरी पर है।  

तमिलनाडु

चेम्बराम्बक्कम झील, रेड हिल्स झील, सोल्लावरम झील, कोडाइकनल और कालीवेली, वीरणम झील, वेरिजम झील आदि तमिलनाडु की प्रमुख झीलें हैं। चेम्बराम्बक्कम झील तमिलनाडु की अत्यंत खूबसूरत झील है। यह चेन्नई से लगभग 30 किमी॰ की दूरी पर आदयार नदी पर स्थित है, और 15 वर्ग किमी॰ के क्षेत्र में विस्तृत है।

बेरिजाम झील तमिलनाडु के प्रसिद्ध हिल स्टेशन कोडईकनाल में है। यह मानव निर्मित झील है। शोलावरम तमिलनाडु के तिरुवल्लूर जिले में है।  

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हिमांचल प्रदेश

हिमांचल प्रदेश कि प्रमुख झीलों में सूरजताल झील, चन्द्रताल झील, रेणुका झील, भृगु झील, महाकाली झील, धानकर झील, लामाडल एवं चांदर नौन, महाराणा प्रताप सागर, मणिमहेश झील, नाको झील, पाराशर झील, गोविंदसागर झील आदि हैं।

सूरज ताल झील ताजे पानी की झील है। यह बाड़ालाचला दर्रे के पास स्थित है। रेणुका झील भी ताजे पानी की झील है। यह सिरमौर जिले में स्थित है। गोविंद सागर भारत की सबसे बड़ी कृत्रिम झील है जो सतलज नदी पर हिमांचल प्रदेश में स्थित है।

उत्तर प्रदेश

रामगढ़ताल व चिलवाताल, करेला व इतौंजा झील, लिलौर झील, सुरहा ताल, रामताल, कीमठ ताल, गोविंद बल्लभ पंत सागर, औंधी झील, दरवन झील, सागरताल, देवरिया ताल, भीखा झील, सीताकुंड भरतकुंड, नौह झील, राधाकुंड, श्यामकुंड, गोविंदकुंड, मानसीगंगा कुंड आदि उत्तर प्रदेश की प्रमुख झीलें हैं।

रामगढ़ताल व चिलवाताल गोरखपुर में स्थित है। करेला व इतौंजा उत्तर प्रदेश के लखनऊ शहर में है। लिलौर झील बरेली में स्थित है। सुरहताल बलिया तथा रामताल मेरठ में है। गोविंद बल्लभ पंत सागर एक कृत्रिम झील है और यह सोनभद्र में स्थित है। औंधी झील वाराणसी व दरवन झील फैजाबाद में हैं।

देवरिया ताल कनौज में और भीखा झील इटावा से संबन्धित हैं। सीताकुंड व भरतकुंड धार्मिक कुंड के रूप में पूजे जाते हैं, ये अयोध्या में स्थित हैं। नौह झील मथुरा में है। राधाकुंड, श्यामकुंड, गोविंदकुंड, मानसीगंगा कुंड उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल हैं और गोवर्धन मथुरा में स्थित हैं।  

मध्यप्रदेश

भारत का दिल व हृदय कहा जाने वाला मध्यप्रदेश पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण स्थान है। मध्य प्रदेश में प्रमुख रूप से पाँच झीलें पाई जाती हैं। भोजताल, हलाली जलाशय, लोवर लेक, तवा जलाशय तथा शाहपुरा जलाशय प्रसिद्ध झीलें हैं।

भोजताल मध्य प्रदेश की प्रसिद्ध झील है जो अपर लेक के नाम से भी जानी जाती है। यह झील मध्य प्रदेश की राजदानी भोपाल में स्थित है। हलाली जलाशय भोपाल से 40 किमी॰ से दूर हलाली नदी पर बना है। लोवर लेक भोपाल में है। इसे छोटा तालाब भी कहा जाता है।

तवा जलाशय राज्य के हौशंगाबाद जिले में है। इस जलाशय का निर्माण तवा डैम के कारण हुआ। तवा डैम प्रोजेक्ट 1958 में प्रारम्भ हुआ था और 1978 में पूर्ण हो गया था। यह पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत मनोहारी स्थल है।

शाहपुरा झील एक कृत्रिम झील है। इसका निर्माण 1974-1975 के मध्य हुआ था। इसका विस्तार अनुमानत: 8.29 वर्ग किमी॰ के क्षेत्र में है। यह पर्यटन के लिए आनंददायक स्थल है।

आशा करती हूँ यह लेख भारत की झीलों और उनके राज्यों संबन्धित आवश्यक जानकारी प्रदान करने में सफल सिद्ध होगा। प्रस्तुत विषय भारत देश से संबंधी ज्ञान देते हुए प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी उपयोगी है। प्रस्तुत लेख पर्यटन की योजना बनाने में भी सहायक हो सकता है।

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