Bhartiy Savidhan Aur Rajbhasha Hindi Part 1 | Best 1950 राजभाषा हिन्दी और नागरिक कर्तव्य

Bhartiy Savidhan Aur Rajbhasha Hindi Part 1
Bhartiy Savidhan Aur Rajbhasha

भारतीय संविधान और राजभाषा हिन्दी

Bhartiy Savidhan Aur Rajbhasha हिन्दी विषय भारतीय संविधान में हिन्दी भाषा के स्वरूप को सुनिश्चित करता है । आज हम प्रस्तुत लेख के माध्यम से भारतीय संविधान में राजभाषा हिन्दी के महत्व को उजागर करेंगे। तो चलिये हिन्दी भाषा का राष्ट्रभाषा से लेकर राज्यभाषा तक के सफर का अध्ययन करें।

भारतीय संविधान

15 अगस्त सन् 1947 को स्वाधीनता के एक लम्बे संधर्ष के पश्चात हमारा देश आजाद हुआ। अपने राष्ट्र की गरिमाए गौरव एकता अखंडता सम्मान एवं संस्कृति को प्रतिस्थापित करने के विचार से राष्ट्रभाषा का स्रजन किया गया और उसे राजभाषा हिन्दी का सम्मान व गौरव प्रदान किया गया।

हिन्दी को संघ की राजभाषा और समग्र भारत देश में केंद्रीय भाषा के रूप में स्थापित करने के लिए राज्य विधान मंडलो को हिन्दी के अतिरिक्त एक या एक से अधिक भाषाओं को राज्यों द्वारा प्रयोग करने की आज्ञा दी गयी। एक गणराज्य के रूप में हमारा भारतीय संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ। तत्पश्चात ही तत्पश्चात ही भारतीय संविधान में राजभाषा हिन्दी तथा राष्ट्रभाषा हिन्दी का स्वरूप उभर कर सामने आया।

BHARTIY SAVIDHAN AUR RAJBHASHA HINDI

26 जनवरी का भारतीय स्वाधीनता आन्दोलन में विशेष महत्व हैं क्योंकि 26 जनवरी 1930 को भारत की अन्तरिम सरकार का गठन हुआ था। इसी कारण 26 नवम्बर 1949 को संविधान का निर्माण होने के बाद भी भारतीय संविधान सम्पूर्ण देश में 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया। और 26 जनवरी को हम गणतन्त्र दिवस के रूप में मनाते है।

किन्तु संविधान निर्माण का कार्य इतना सहज नहीं रहा इस कार्य हेतु स्वतन्त्रता आन्दोलन से जुड़े लोगों की एक संविधान सभा बनी। जिन्हें संविधान निर्माता कहा गया। भारतीय संविधान निर्माताओं में विलक्षण बुद्धि वाले, न्याय के ज्ञाता, देशभक्ति के भावों से ओत प्रोत देशभक्त और देश को स्वतन्त्रता दिलाने वाले सेनानी सम्मिलित थे।

इस प्रकार नियोजित संविधान सभा द्वारा गहन विचार-विमर्श के पश्चात् संविधान बनाया जिसे 26 जनवरी 1930 को भारत की अन्तरिम सरकार का गठन हुआ, 26 नवम्बर 1949 को संविधान सभा द्वारा संविधान स्वीकार किया गया। संविधान एक ऐसी लिखित रूप में वर्णित व्याख्या है जिसके अन्तर्गत सम्पूर्ण देश की व्यवस्था कैसी होनी चाहिए यह वर्णित है साथ ही नागरिकों का व्यवहार और रहन-सहन कैसा हो यह भी वर्णित है। सरकार गठित होने का तरीका, सरकार चुनने का तरीका, सरकारों के अधिकार क्षेत्र, देश का कानून नागरिकों के मूल अधिकार व कर्तव्यों आदि विषयों पर चर्चा है।

संविधान निर्माताओं ने संविधान गठन के समय इस बात पर गहन विचार-विमर्श किया कि संविधान ऐसा बनाया जाए जिससे देश को सुव्यवस्थित और खुशहाल रखा जा सके।

किसी भी देश को व्यवस्थित रूप से चलाने के लिए संविधान की अति आवश्यकता होती है। संविधान के माध्यम से देश के नागरिकों के व्यवहार सुनिश्चित होते है साथ ही देश के कानून का स्पष्ट ढाँचा पता चलता है।

भारतीय संविधान निर्माताओं ने संविधान बनाने के साथ-साथ इस बात का भी ध्यान रखा कि समय एवं समाज में परिवर्तन के अनुरूप भी संविधान का परिष्कार होता रहें। इसे ध्यान में रखते हुए संविधान के अनुच्छेदों में संविधान लागू होने से लेकर आज तक निरन्तर संशोधन होते रहे हैं। अगर हम संविधान संशोधन को देखे तो लगभग 100 से अधिक संशोधन हो चुके हैं और आज भी परिवेश, समय, समाज के अनुरूप परिवर्तन होते जा रहे हैं। जो हमारी निरन्तर परिवर्तनशीलता एवं विकसनशील सोच का परिणाम हैं।

नागरिक कर्तव्य

भारतीय संविधान के अंतर्गत नागरिकों के कर्तव्यों को भी सुनिश्चित किया गया है। हमारे देश के नागरिक संविधान और शासन व्यवस्था को दोष देते हैं। जबकि वास्तविकता यह है कि संविधान के अनुरूप अपने आप को नहीं ढालते है। देश का संविधान ही हमारा पथ-प्रदर्शक एवं हमारे आचरण का नियामक हैा संविधान में दिये गए निर्देशों को अपने जीवन में उतार कर उसके अनुसार हमें आचरण करना चाहिए।

हमें और हमारे देश के सरकारों को अपने-अपने कर्तव्यों का निर्वाह करना चाहिए। हमारे अधिकार सरकार के कर्तव्य हैं और देश के प्रति हमारे भी नागरिक कर्तव्य हैं। दोनों यदि अपने-अपने कर्तव्यों का पालन नहीं करते हैं। तो संविधान को दोष देना ठीक नहीं है। किन्तु न तो सरकारें अपनें कर्तव्यों का निर्वाह सही ढंग से कर रही हैं और न ही नागरिक अपने कर्तव्यों और अधिकारों के प्रति जागरूक हैं।

यदि हमें और देश और शासन व्यवस्था को सुनियोजित ढंग से चलाना है और अपने देश की उन्नति के लिए प्रयास करना है तो संविधान को दोष दिए बिना हमारे सरकारों को उचित ढंग से शासन की बागडोर संभालनी होगी और नियम बद्ध ढंग से कार्य करना होगा यही नहीं नागरिकों को भी नियमों का पालन करते हुए अपने व्यवहारों को नियन्त्रित, स्वच्छ और पवित्र बनाना होगा तभी हम सही अर्थों में अपनी शासन प्रणाली को सुदृढ बना पायेंगे और देश को उन्नति के शिखर तक पहुँचा पायेंगे

राष्ट्र की उन्नति का आधार उस राष्ट्र के नागरिकों की चेतना एवं भाषा के प्रति लगाव से अनिवार्यता जुड़ा हुआ हैं। भारतीय संविधान सभा ने 14 सितम्बर 1949 को हिन्दी को राष्ट्रभाषा स्वीकार किया गया। भारतीय संविधान में हिन्दी को भारतीय गणतंत्र की राष्ट्रभाषाऔर देवनागरी को राजलिपिस्वीकार किया गया है। भारतीय संविधान ने हिन्दी भाषा को राष्ट्रभाषा नही राजभाषा हिन्दी स्वीकार किया गया है।

राष्ट्रभाषा और राजभाषा हिन्दी में अंतर

राष्ट्रभाषा और राजभाषा हिन्दी का अन्तर जानने के लिए अथवा इन दोनों का वास्तविक तात्पर्य समझने के लिए यह जानना आवश्यक है कि राष्ट्र किसे कहते और राज्य किसे कहा जाता है? अनेक राज्यों अथवा प्रान्तों के समूह को राष्ट्र कहा जाता हैं। राष्ट्र और राज्य का अन्तर समझने के लिए अमेरिका और रूस का उदाहरण समझा जा सकता है। अमेरिका एक राष्ट्र है, जिसके अन्तर्गत 49 छोटे-छोटे राज्य हैं।

इन सभी राज्यों को मिलाकर ‘‘यूनाइटेड स्टेट्स आफ अमेरिका’’ बना है। जिसे संक्षेप मे अमेरिका कहा जाता है। अमेरिका के सभी राज्यों में अंग्रेजी बोली, समझी और लिखी जाती है। अमेरिका में केन्द्रीय सरकार सम्बन्धी सभी कार्य अंग्रेजी में होते हैं। अमेरिका के सभी राज्ये आन्तरिक कार्य भी अंग्रेजी भाषा में करते हैं और एक-दूसरे से पत्र-व्यवहार भी अंग्रेजी ही करते है, यही कारण है कि अमेरिका की राष्ट्रभाषा, राजभाषा और राज्यभाषा सभी अंग्रेजी ही है।

अमेरिका के समान रूस देश भी एक संघीय राष्ट्र है। रूस की राष्ट्रभाषा रूसी है, किन्तु वहाँ राज्यों की भाषाएँ भिन्न-भिन्न है। सभी राज्य अपनी-अपनी भाषा में कामकाज करते हैं। किन्तु पत्र-व्यवहार में ये सभी रूसी भाषा का ही प्रयोग कहते है। राजभाषा हिन्दी के परिपेक्ष्य में भारत की स्थिति रूस से मिलती है। भारत अनेक प्रान्तों से मिलकर बना है।

सभी प्रान्तों की अपनी-अपनी भाषाएँ है। भारत में 26 जनवरी, 1950 को गणतन्त्र शासन की स्थापना के पश्चात् भाषाओं के आधार पर प्रान्त बनायें गए। इस आधार पर अनेक नये प्रान्त बने गुजरात राज्य के दो भाग हुए गुजरात और महाराष्ट्र दो प्रान्त बनाए गए। मद्रास राज्य के दो भाग तमिलनाडु और आन्ध्र प्रदेश बनाए गए।

पंजाब का तीन भाग करके पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश नाम के तीन राज्य बनाए गए। इस प्रकार इन सभी प्रान्तों की अपनी-अपनी भाषाएँ है। इनके अतिरिक्त भारत के छः राज्य ऐसे है जो हिन्दी भाषा-भाषी क्षेत्र में रखे गए। इनमें बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश उल्लेखनीय हैं।

भारतीय संविधान के अंतर्गत राजभाषा हिन्दी विषय के विस्तार के कारण तथा अध्ययन की सुविधा की दृष्टि से शेष भाग अगले पोस्ट में साझा किया गया है। अत: प्रस्तुत लेख का दूसरा भाग पढ़ने के लिए नीचे दिये गए लिंक पर क्लिक करें।

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