Bhartiya Nritya Kala | 7 Best राज्य, भारतीय नृत्य कला का इतिहास और प्रकार

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भारतीय नृत्य कला

Bhartiya Nritya Kala की चर्चा करते ही समक्ष उपस्थित हो जाता है, विविध संस्कृतियों, परम्पराओं एवं सभ्यताओं से परिपूर्ण भारत देश। भारतदेश की संस्कृति, त्योहार, सांस्कृतिक परिधान, रीति रिवाज, संस्कार और धार्मिक मान्यताओं की तुलना किसी भी देश से नहीं की जा सकती। तभी तो भारत देश के लिए कहा जाता है- अतुलनीय, अद्भुत व अकल्पनीय।

भारतीय रंगमंच के समान ही नृत्य कला भी मानवीय अभिव्यक्तियों से संबन्धित एक रोचक कला है। इसमें अभिनय, भाव, मुद्रा एवं रसों का समिश्रण होता है। भारतवासी अनादिकाल से ही सांस्कृतिक मान्यताओं, सामाजिक और धार्मिक विश्वासों की दृष्टियों से नृत्य कला से जुड़े रहे हैं।

जिसप्रकार भारत देश में विविध संस्कृतियों, परम्पराओं और सभ्यताओं का समागम है उसीप्रकार नृत्य कला के भी विभिन्न रूप विद्यमान हैं। इसका प्रत्तेक रूप अत्यंत मनोरंजक, मनमोहक एवम लोकप्रिय है।

सदैव से ही भारतीय नृत्य कला का इतिहास तथा प्रकार भारत देश की सांस्कृतिक पहचान रहे है। विभिन्न सांस्कृतिक अवसरों को रंगारंग रूप से सुसज्जित करने के लिए नृत्य कला का प्रदर्शन यहाँ की परंपरा है। यह विषय प्रतियोगिता एवं जानकारी की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। अत: आज प्रस्तुत लेख के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक विरासत को उजागर करने वाली प्रस्तुत कला का परिचय प्राप्त करेंगे।

क्या आप जानते है की भारतीय नृत्य कला का प्रारम्भ कब से हुआ? भारतीय नृत्य कला कितने प्रकार की होती हैं? भारतीय नृत्य कला का इतिहास क्या है? शास्त्रीय नृत्य कौन से हैं? भारत के विभिन्न राज्यों में किन किन भारतीय नृत्यों का प्रचलन है? तो आइए प्रस्तुत लेख के माध्यम से सम्पूर्ण जानकारी का अध्ययन करें।

भारतीय नृत्य कला का इतिहास

सन 1921 में हड़प्पा की खुदाई का कार्य प्रारम्भ हुआ था। सर्वप्रथम दयाराम साहनी ने खुदाई का काम शुरू कराया था। तत्पश्चात माधव स्वरूप व मार्टिनर वीहलर ने भी अपना सहयोग प्रदान किया। इसके परिणाम स्वरूप हमारी सभ्यता व संस्कृति 1000 वर्ष से अधिक प्राचीन होने का गौरव प्राप्त है।

हड़प्पा सभ्यता के प्रारम्भिक स्थल सिंधु नदी के आस पास केन्द्रित थे। इसी लिए इसे सिंधुघाटी सभ्यता भी कहा जाता है। हड़प्पा की खुदाई से नृत्य करती हुई स्त्रियों की मूर्तियाँ प्राप्त हुई थी। नृत्य कला का विकास उससे भी पहले हो चुका था। जिससे सिद्ध होता है कि यह कला पुरातन काल से ही अस्तित्व में था।

नृत्य कला के साक्ष्य भरतमुनि कृत नाट्यशास्त्र ग्रंथ में पाये जाते हैं।  नाट्यशास्त्र संगीत, नाटक तथा अभिनय के समग्र रूप का संग्रह है। निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता किन्तु शोध के आधार पर भरतमुनि का जीवन काल 400 ईसा पूर्व से 100 ईसा के मध्य माना जाता है। यह प्रमाण भी नृत्य कला की प्राचीनता को साबित करने के लिए सक्षम हैं।

नाट्य शास्त्र में रंगमंच, अभिनय, रस, भाव, मुद्रा, नृत्य, गीत, वाद्य संबंधी सभी महत्वपूर्ण तथ्यों का वर्णन है। हिन्दू देवी–देवताओं में भी नृत्य कला के प्रति रुचि एवं प्रेम विद्यामान था। श्री कृष्ण की रासलीला से लेकर इंद्र का देवलोक व शिव जी का नटराज रूप विश्व प्रसिद्ध है।

इस प्रकार भारत की संस्कृति, धर्म तथा सभ्यता में अनेक ऐसे प्रमाण प्राप्त होते हैं जिनसे स्पष्ट होता है कि नृत्य कला इतिहास का अनादिकाल से अत्यधिक प्राचीन, व्यापक व लोकप्रिय रहा है।

भारतीय नृत्य कला के प्रकार

विविधतापूर्ण भरत देश में नृत्य शैलियों में भी विविधता पाई जाती है। भारतीय नृत्य कला को प्रमुख रूप से दो भागों में विभक्त किया गया है –

शास्त्रीय नृत्य , लोक नृत्य।

शास्त्रीय नृत्य सर्वाधिक प्राचीन एवं विख्यात है। शास्त्रीय नृत्य को क्लासिकल डांस भी कहते हैं। शास्त्रीय नृत्य में शरीर के अंगों की मुद्राओं और हाव भाव का विशेष महत्व होता है। शास्त्रीय नृत्य में रस, भाव, अभिव्यक्ति, संकेत, मुद्राए, अभिनय, आसन आदि विभिन्न भंगिमाओं के माध्यम से धार्मिक और पौराणिक कथाओं को अभिनित लिया जाता है।

नाट्यशास्त्र, अभिनवदर्पण, अभिनवभारती, नाट्यदर्पण व भावप्रकाश आदि ग्रन्थों में शास्त्रीय नृत्य संबंधी सम्पूर्ण जानकारी प्रदान की गई है। प्रत्तेक राज्य के शास्त्रीय नृत्य भिन्न – भिन्न होते हैं, और संबन्धित राज्य की सांस्कृतिक विशेषताओं को उद्घाटित करते हैं।  

नृत्य कला में लोक नृत्य का भी विशेष महत्व है। लोक नृत्य को फोक डांस व सामाजिक नृत्य भी कहा जाता है, क्योकि यह प्रत्तेक राज्य की सामाजिक परंपरा को उजागर करता है। धर्म, व्यवसाय, जाति, संस्कारों एवं विभिन्न सभ्यताओं के कारण लोक नृत्य में अंतर पाया जाता है।

लोक नृत्य सामान्यत: विभिन्न उत्सवों और त्योहारों पर किए जाते है। एक राज्य के लोक नृत्य एक से अधिक भी हो सकते हैं। प्रत्तेक राज्य का लोक नृत्य वहाँ की सभ्यता व संस्कृति को प्रदर्शित करता है। सामान्य शब्दों में जो नृत्य लोगों के समाज में प्रचलित हो उसे लोक नृत्य कहते हैं।                          

अब हम शास्त्रीय नृत्य और उनके राज्यों का अध्ययन करेंगे। प्रमुख रूप से शास्त्रीय नृत्य की संख्या आठ हैं, जोकि उत्तरप्रदेश, तमिलनाडु, केरल, आंध्रप्रदेश, मणिपुर, ओडिशा, असम राज्यों से संबन्धित हैं।

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शास्त्रीय नृत्य और राज्य

उत्तरप्रदेश

उत्तरप्रदेश भारत के उत्तर में स्थित है, इसलिए इसे उत्तर प्रदेश कहा जाता है। उत्तर प्रदेश सर्वाधिक जनसंख्या वाला क्षेत्र है। लखनऊ इसकी राजधानी है। उत्तर प्रदेश में व्यापक रूप से हिन्दी भाषा बोली जाती है। यहाँ अनेक दर्शनीय स्थल हैं, जोकि सैलानियों के लिए आकर्षण के केंद्र हैं। तीर्थ स्थानों में अयोध्या, चित्रकूट, प्रयाग, मथुरा, वृन्दावन, कोशाम्बी आदि प्रमुख हैं। लखनऊ, आगरा, वाराणसी, सारनाथ, देवगढ और विंध्याचल आदि नगर भी पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण हैं।

कथक उत्तर प्रदेश का शास्त्रीय नृत्य है। इसमें अंगों की भंगिमाओं के माध्यम से किसी भी कथा को दर्शाया जाता है। कथक नृत्य में चेहरे के भाव प्रमुख रूप से सहायक होते हैं। कदम ताल में घूंघुरुओं की ध्वनि मन को मोह लेती है। यह नृत्य स्त्री व पुरुष दोनों ही करते हैं।

कथक में गीत, कथा, संगीत, कदम ताल के माध्यम से नृत्य में संपूर्णता पाई जाती है। बिरजू महाराज, सितारा देवी, रोशन कुमारी, कुमुदिनी लखिमा, राम मोहन, उमा शर्मा आदि कथक के प्रसिद्ध कलाकार हैं।

तमिलनाडु

तमिलनाडु उत्तर में आंध्रप्रदेश और कर्नाटक, पश्चिम में केरल, पूर्व में बंगाल की खाड़ी और दक्षिण में हिन्द महासागर से घिरा है। तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई है। यहाँ की राजभाषा तमिल है। श्रीरंगम, मदुरै, रामेश्वरम, तिरुनेल्वेल्ली, कन्याकुमारी, धारासुरम, कांचीपुरम, ऊंटी, तंजावुर आदि दर्शनीय स्थल हैं।  

तमिलनाडु का शास्त्रीय नृत्य भरतनाट्यम है। शास्त्रीय नृत्यों की सूची में ये सबसे प्राचीन नृत्य माना जाता है। प्रारम्भ में इसका आयोजन मंदिरों में होता था। शनै – शनै इस नृत्य शैली को पर्याप्त विस्तार प्राप्त हुआ और यह  एक अद्भुत नृत्य शैली के रूप में विश्व विख्यात हो गई।

भरतनाट्यम में हाव – भाव, अभिव्यक्ति, हाथों की मुद्राए, पैरों की मुद्राए एवं घुंघुरुओं का संयोजन नृत्य के आकर्षण का केंद्र होता है। यामिनी कृष्णमूर्ति, रुक्मणी देवी, एस के सरोज, विजयंती माला, मृडालिनी साराभाई, मालविका सरकार, अनीता रत्नम आदि भरतनाट्यम नृत्य शैली के प्रसिद्ध कलाकार हैं।

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केरल  

केरल की राजधानी तिरुवनन्तपुरम है। मलयालम यहाँ की मुख्य भाषा है। केरल में मंदिर मस्जिद के साथ – साथ चर्च भी पर्याप्त मात्र में पाये जाते हैं, क्योकि केरल में हिन्दू मुस्लिम के समान ही ईसाई जनसंख्या भी पाई जाती है। कोवलम बीच रिसोर्ट, पूवर द्वीप, मुन्नार, पेरियार नेशनल पार्क, वैकोम, देवीकुलम हिल स्टेशन, वेली नेयर बांध पोमुड़, कोच्चि बन्दरगाह प्रमुख पर्यटन स्थल हैं।

केरल में प्रमुख रूप से कत्थकली और मोहिनीअट्टम शास्त्रीय नृत्य प्रसिद्ध हैं। कत्थकली नृत्य में किसी भी पौराणिक, धार्मिक और सांस्कृतिक कथा का प्रदर्शन नृत्य के द्वारा किया जाता है। यह नृत्य पुरुषों के द्वारा विशेष प्रकार का परिधान तथा श्रंगार करके किया जाता है। इस नृत्य में चहेरे की आँखें, भौहें और निचली पलकों का विशेष योगदान होता है।

कत्थकली नृत्य का प्रशिक्षण अत्यंत कठिन होता है। केरल का कलामंडलम कत्थकली प्रशिक्षण का प्रसिद्ध केंद्र है। कत्थकली के प्रसिद्ध कलाकारों में शांता राव, कलामंडलम गोपी, उदय शंकर, कृष्ण नायर, आनंद श्र्वरमन, कुमारण नायर, व क नारायण मेनॉन, पद्मनाभन नायर आदि प्रमुख हैं।  

मोहिनीअट्टम भी केरल का ही शास्त्रीय नृत्य है। यह नृत्य एकल रूप में स्त्रियों द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। मोहिनीअट्टम प्रमुख रूप से हाव-भाव की अभिव्यक्ति पर आधारित होता है। इसे सीखने के लिए विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है। भारती शिवाजी, कल्याणी अम्मा, गीता गायक, रागिनी देवी, तारा निदीगड़ी, सुनन्दा नायर, पल्लवी कृष्णन, राधा दत्ता, शांता राव एवं हेमामालिनी मोहिनीअट्टम की प्रसिद्ध कलाकार हैं।

मणिपुर

मणिपुर की राजधानी इंफाल है। यह भारत का पूर्वोत्तर राज्य है। यहाँ की प्रमुख भाषा मणिपुरी है। इंफाल मणिपुर के दर्शनीय स्थलों में सर्वाधिक प्रसिद्ध है। इसके अतिरिक्त चंदेल, थौबल, तामेगलौंग, सेनापति जिला, एंड्रो तथा  चुराचंदपुर आदि स्थल लोकप्रिय हैं।

मणिपुर का मणिपुरी नृत्य भी अत्यंत प्रसिद्ध एवं मनमोहक है। यह नृत्य धार्मिक रूप से राधा कृष्ण की रास लीला पर आधारित होता है। मणिपुरी नृत्य का रोचक आकर्षण वाद्य यंत्र होते है। नृत्य में प्रमुख रूप से शरीर के ऊपरी हिस्से का प्रयोग किया जाता है।

नृत्य में शरीर की गति धीमी होती है। मणिपुरी नृत्य विशेष प्रकार की घेरदार पोशाक पहन कर किया जाता है। गुरु विपिन सिंह, रीता देवी, गोपाल सिंह, गुरु अमली सिंह, सविता मेहता, कलावती देवी, चारु माथुर आदि मणिपुरी नृत्य के विश्व प्रसिद्ध कलाकार हैं।

ओड़िशा

ओडिशा भारत के पूर्वी तट पर स्थित है। इसकी राजधानी भुवनेश्वर है। ओडिशा की राजभाषा ओड़िया है। यह उत्तर में झारखण्ड, उत्तर पूर्व में पश्चिम बंगाल, दक्षिण में आंध्रप्रदेश, पश्चिम में छतीसगढ़ से तथा पूर्व में बंगाल की खाड़ी से घिरा है। ओड़िशा के प्रमुख दर्शनीय स्थलों में सूर्य मंदिर, लिंगराज मंदिर, जगन्नाथपुरी, नंदन कानन, चिल्का झील, धौली बौद्ध मंदिर, उदयगिरि – खंडगिरि की गुफाएँ आदि हैं।

ओडिसी ओड़िशा की पारंपरिक एवं प्राचीन नृत्य शैली है। इसकी प्राचीन परंपरा मंदिरों से प्राप्त होती है। इस नृत्य में शरीर, पैर और हाथों का संचालन प्रमुख होता है। यह स्त्रियों द्वारा किया जाता है। अनेक धार्मिक कथाओं और काव्य को नृत्य के माध्यम से अद्भुत रूप में प्रदर्शित किया जाता है।

ओडिसी विश्व विख्यात नृत्य शैली है। मोहन महापात्रा, मायाधर रावत, किरन सहगल, पंकज चरण दास, माधवी मुद्गल, रानी कर्ण, इंद्राणी रहमान, अरुणा मोहंती आदि ओडिसी नृत्य कला के प्रसिद्ध कलाकार हैं।

आंध्रप्रदेश

आंध्रप्रदेश भारत के दक्षिण – पूर्वी तट पर स्थित है। इसकी राजधानी विशाखापट्नम, अमरावती और कुरनूल हैं। तीन राजधानी वाला यह देश का पहला राज्य है। आंध्रप्रदेश की राजभाषा तेलुगू है। यहाँ का सबसे बड़ा शहर अमरावती है। सालार जंग संग्रहालय, चारमीनार, अरकू घाटी, झील गंगोत्री, कोलेरू झील, पर्यावरण पार्क, तिरुपति वेंकटेश्वर मंदिर, विशाखपटनम आदि स्थल पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने में सक्षम हैं।

आंध्रप्रदेश का कुचिपुडी नृत्य एक बेहतरीन नृत्य शैली है। प्रारम्भ में यह नृत्य केवल पुरुषों द्वारा ही किया जाता था। स्त्रियों का अभिनय भी पुरुष ही करते थे। किन्तु आधुनिक समय में स्त्रियाँ भी नृत्य में सहयोग करने लगी हैं। स्त्रियॉं के सहयोग से कुचिपुडी शास्त्रीय नृत्य की परंपरा अधिक समृद्धिशाली हो गई है।

कुचिपुडी नृत्य में संगीत की मधुर ध्वनि के साथ हाथों की सुंदर मुद्राए और चेहरे के भावों की मोहनी अभिव्यक्ति आकर्षण का केंद्र होती है। यमिनी कृष्णमूर्ति, लक्ष्मी नारायण शास्त्री, राधा रेड्डी, इंद्राणी रहमान, शांता राव, उमा रामा राव, स्वप्न सुंदरी, प्रतीक्षा काशी आदि कुचिपुडी नृत्य शैली के विश्व विख्यात कलाकार हैं।

असम  

असम की राजधानी दिसपुर तथा राजभाषा असमिया है। आधिकारिक रूप से बंगाली और हिन्दी भाषा का भी प्रयोग होता है। यहाँ का सबसे बड़ा शहर गुवाहाटी है। यह उत्तर पूर्वी भारत का राज्य है। यह उत्तर में अरुणाचल प्रदेश, पूर्व में नागालैंड व मणिपुर, दक्षिण में मिजोरम तथा मेघालय एवं पश्चिम में बांग्लादेश से घिरा है।  

यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता दर्शनीय है। ऊंची पर्वतमालाएँ, उपयोगी वनस्पतियाँ, शीतल नदियां, हरियाली युक्त पहाड़ियाँ तथा मनमोहक उद्यानों की शोभा मन को हर लेती है। कंजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान, मानस राष्ट्रीय उद्यान, गुवाहाटी, सिब सागर, भैरव कुंड, दरंगा, बरोदा आदि दर्शनीय स्थल हैं।

असम का शास्त्रीय नृत्य सत्त्रिया नाम से जाना जाता है। यह नृत्य शैली युगल कथाओं अर्थात राधा–कृष्ण और राम–सीता की कथाओं पर आधारित होता है। सत्त्रिया नृत्य कथा, नृत्य व संवाद का समन्वित रूप है। कृष्णाक्षी कश्यप, मीनाक्षी मेधी नवोदित कलाकार हैं।

आशा करती हूँ की भारतीय नृत्य कला संबन्धित रोचक जानकारी के अंतर्गत भारत के राज्य और उनके विश्व प्रसिद्ध शास्त्रीय नृत्यों का वर्णन आप सभी के लिए भारत देश की सांस्कृतिक विरासत संबंधी जानकारी को बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगी।

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