Diwali Panchparv Muhurt | दिवाली 2021, 5 Best पंचपर्व पूजन मुहूर्त

Diwali Panchparv Muhurt
Diwali Panchparv Muhurt

Diwali Panchparv Muhurt दिवाली पूजन हेतु अतिआवश्यक है। दिवाली पाँच पर्वों का महापर्व होता है। हिन्दू जन सभी पांचों पर्वों को बड़ी धूम धाम से पूजा अर्चना के साथ मनाते हैं। दिवाली पूजन के लिए शुभ मुहूर्त का ज्ञान होना विशेष महत्वपूर्ण है। शुभ मुहूर्त में पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, और भक्त पर भगवान की कृपा बनी रहती है।

सभी को दिवाली 2021 की हार्दिक शुभकामनाएं। दिवाली शरद ऋतु में मनाया जाने वाला हिंदुओं का त्यौहार है। दिवाली पर्व कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है। यह भारत के सर्वाधिक महत्वपूर्ण त्यौहारों में से एक है। इसे दीपकोत्सव तथा प्रकाशपर्व भी कहा जाता है।

हम सभी जानते हैं कि दिवाली पाँच पर्वों का मनमोहक, मनोहारी व हर्षोउल्लास का त्यौहार होता है। दिवाली से पूर्व धनतेरस, नरक चौदस और दिवाली के उपरांत गोवर्धन पूजा व भैयादूज की धूम रहती है। यह पाँच त्यौहार हिन्दुओं में आस्था, भक्ति तथा विश्वास को उजागर करते हैं।

दिवाली पर्व का सामाजिक व धार्मिक दोनों ही दृष्टियों से विशेष महत्व है। यह स्वच्छता का प्रतीक एवं धार्मिक आस्था व विश्वास का पर्व है। दिवाली पर्व अज्ञानता का नाश तथा सत्य की विजय का त्यौहार भी माना जाता है। स्वच्छता, साज-सज्जा और धार्मिक कृत्य इस त्यौहार के प्रमुख अंग हैं।

लक्ष्मी पूजन का दिवाली से उत्तम कोई समय नही माना गया। दिवाली के उपलक्ष्य में लक्ष्मी पूजन के साथ साथ कुबेर, धन्वंतरि, यम, गणेश व श्रीकृष्ण की भी पूजा बड़ी आस्था के साथ सम्पन्न की जाती  है। दिवाली के सुअवसर पर आज हम महापर्व दिवाली 2021 के पंचपर्वों की पूजा के शुभ मुहूर्त का ज्ञान प्राप्त करेंगे। प्रस्तुत जानकारी हिन्दू पंचांग के आधार पर प्रदान की गई है।

धनतेरस (1)

दिवाली से दो दिन पूर्व कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को धनतेरस का त्यौहार मनाया जाता है। यह दिवाली त्यौहार का पहला पर्व माना जाता है। इसी दिन से दीपकोत्सव के पाँच पर्वों का प्रारंभ होता है। इस वर्ष धनतेरस 2021 दिनाँक 2 नवंबर दिन मंगलवार को मनाया जाएगा। धनतेरस के दिन भगवान कुबेर की पूजा की जाती है।

मान्यता है कि कुबेर पूजा से प्रसन्न होकर भक्त को धन धान्य पूर्ण बनाते हैं। धनतेरस के दिन धन्वंतरि भगवान की भी पूजा की जाती है। इसलिए इसे धन्वंतरि जयंती या धनत्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है। धनतेरस की शुभ तिथि में समुद्र मंथन के दौरान धन्वंतरि भगवान अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे तभी से घर में सोना, चांदी व बर्तन खरीदकर लाने की परंपरा है। कहते हैं कि इस दिन खरीदी हुई वस्तुओं की अत्यधिक वृद्धि होती है।

इस दिन कुबेर व धन्वंतरि भगवान का विधिवत पूजन करना चाहिए। घी का दीया जलाकर खीर व मिष्ठान का भोग लगाना चाहिए। अवश्य ही कुबेर देव कृपा बरसएंगें और सभी भक्त धन धान्य पूर्ण जीवन का वरदान पाएंगें।

धनतेरस 2021 का शुभ मुहूर्त

हिन्दू पंचांग के अनुसार 2 नवंबर 2021 सायं 5 बजकर 37 मिनट से रात्रि 8 बजकर 11 मिनट तक धनतेरस पर्व का शुभ मुहूर्त है।

नरकचौदस (2)

नरकचौदस कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। यह दिवाली महापर्व का दूसरा पर्व होता है। इस दिन भगवान कृष्ण ने नरकासुर राक्षस का वध किया था इसलिए इसे नरक चतुर्दशी के नाम से भी जानते हैं। इसके अतिरिक्त यह पर्व नर्कापूजा, नरक निवारण चतुर्दशी, रूप चौदस, रूप चतुर्दशी, नरक चौदस व छोटी दिवाली के नाम से भी प्रसिद्ध है।

इस वर्ष नरकचौदस 2021 दिनाँक 4 नवंबर दिन गुरुवार को मनाया जाएगा। इस दिन यमराज की पूजा की जाती है। तेल का दीपक दक्षिण दिशा की ओर मुख करके घर के बाहर जलाना चाहिए जिससे यमराज देव प्रसन्न होते हैं और घर के सभी सदस्यों की रक्षा करते हैं। इससे अकाल मृत्यु का भय दूर होता है तथा स्वास्थ्य लाभ भी प्राप्त होता है।

नरकचौदस के दिन घर की समस्त गंदगी को साफ किया जाता है। घरों को स्वच्छ, सुंदर व साज सज्जा से परिपूर्ण किया जाता है ताकि दिवाली की रात माँ लक्ष्मी घर में प्रवेश करें और सुख संपत्ति व संपन्नता का आशीर्वाद प्रदान करें।

नरकचौदस 2021 का शुभ मुहूर्त

हिन्दू पंचांग के अनुसार चतुर्दशी तिथि 3 नवंबर 2021 दिन बुधवार को रात्रि 9:00 से प्रारंभ होगी और 4 नवंबर 2021 दिन गुरुवार को प्रात: 06:34 तक रहेगी अत: अभ्यंग स्नान शुभ मुहूर्त 4 नवंबर 2021 दिन गुरुवार को प्रात: 06:05 से प्रात: 06:34 बजे तक है।  

दिवाली 2021 (3)

प्रतिवर्ष कार्तिक पूर्णिमा की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को दिवाली का पर्व मनाया जाता है। दिवाली तीसरे दिन मनाई जाती है। इसे दीपकोत्सव भी कहते हैं। दिवाली 2021 दिनाँक 4 नवंबर दिन गुरुवार को मनाई जाएगी। दिवाली के दिन घरों को खूब सजाया जाता है और रात को दिए जला कर घर को रौशन किया जाता है। तत्पश्चात लक्ष्मी पूजन का विधान है। लक्ष्मी पूजन हेतु दिवाली की तिथि से बेहतर कोई तिथि नही मानी जाती।  

हिन्दू मान्यताओं व पौराणिक कथाओं के आधार पर दिवाली मनाने के अनेक कारण हैं। जिनमें प्रमुख कारण है- जब श्री रामचन्द्र जी माता सीता व भाई लक्ष्मण के साथ चौदह वर्षों का वनवास पूर्ण करके लंका के राजा रावण का वध करके अयोध्या वापस आए थे।

तब सभी अयोध्यावासियों ने श्री रामचन्द्र के स्वागत में अपने घरों की साज-सज्जा की, तथा दिये जलाकर अपनी प्रसन्नता को व्यक्त किया था। अमावस्या की अंधेरी रात भी दीपकों के प्रकाश से जगमगा उठी थी, तभी से प्रतिवर्ष प्रकाश पर्व के रूप में दिवाली मनाने का प्रचलन है।

इसके अतिरिक्त यह भी मान्यता है की दिवाली के दिन माँ लक्ष्मी का जन्म हुआ था। समुद्र मंथन के समय कार्तिक पूर्णिमा की अमावस्या की तिथि को ही माँ लक्ष्मी की उत्पत्ति हुई थी इसीलिए दिवाली की रात माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। दिवाली के शुभ मुहूर्त में लक्ष्मी पूजा करने का अत्यधिक महत्व है। शुभ मुहूर्त में आस्था व विश्वास के साथ किया गया लक्ष्मी पूजन भक्तों को सुख, समृद्धि व संपन्नता का आशीर्वाद प्रदान करता है।

दिवाली 2021 का शुभ मुहूर्त  

हिन्दू पंचांग एवं ज्योतिषाचार्यों के अनुसार दिवाली 2021 4 नवंबर दिन गुरुवार को मनाई जाएगी। अमावस्या तिथि 4 नवंबर प्रात: 06:03 से प्रारंभ हो जायेगी। लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त सायं 06:09 मिनट से रात्रि 08:20 मिनट रहेगा। यह लगभग 1 घंटा 55 मिनट की अवधि है।

गोवर्धन पूजा (4)

दिवाली महापर्व के चौथे पर्व के रूप में गोवर्धन पूजा का त्यौहार मनाया जाता है। दिवाली के अगले दिन कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष के प्रथम दिन प्रतिप्रदा की शुभ तिथि को गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया जाता है। गोवर्धन पूजा के दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा की जाती है। गाय के गोबर से गोवर्धन बना कर पूजने की परंपरा अनादिकाल से चली आ रही है। इसवर्ष गोवर्धन पूजा का त्यौहार दिनाँक 5 नवंबर दिन शुक्रवार को मनाया जाएगा।

इस दिन की मान्यता यह है कि जब गोकुलवासियों से रुष्ट होकर इंद्रदेव ने अत्याधिक वर्षा करके सम्पूर्ण गोकुल को जलमग्न कर दिया था। तब श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर उठा कर गोकुलवासियों को आसरा दिया और उनके जीवन की रक्षा की तभी से गोवर्धन पूजा का विधान है।

गोवर्धन पूजा 2021 का शुभ मुहूर्त

गोवर्धन पूजा 2021 5 नवंबर दिन शुक्रवार को मनाई जाएगी। गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त प्रात: 05:28 मिनट से प्रात: 07:55 मिनट तक है।

Diwali Panchparv Muhurt
भैयादूज 2021 (5)

दिवाली का पांचवा दिन भाईदूज के रूप में मनाया जाता है। गोवर्धन पूजा के उपरांत भैयादूज का पर्व आता है। भैयादूज दिवाली के दूसरे दिन कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। इसवर्ष 2021 को भैयादूज का त्यौहार दिनाँक 6 नवंबर दिन शनिवार को मनाया जाएगा।

भैयादूज मनाने के पीछे यह मान्यता है कि इस दिन यमराजदेव अपनी बहन यमुनाजी के घर मिलने गए थे। बहन ने प्रसन्न होकर भोजन खिलाया और तिलक लगा कर उनका मान बढ़ाया। यमराज ने प्रसन्न होकर बहन से वरदान मांगने को कहा तब यमुना जी ने उनसे प्रतिवर्ष घर आकर तिलक लगवाने व भोजन करने का वचन मांगा।

यमराज ने प्रति वर्ष इस दिन बहन के घर आने का वचन दिया। तभी से यह पर्व भाई बहन के अटूट बंधन व प्रेम को समर्पित है। भैयादूज को यमद्वितीया भी कहा जाता है। इस दिन यमराजदेव की पूजा होती है। बहनें अपने भाइयों को तिलक लगा कर प्रेम पूर्वक भोजन कराती हैं। इस दिन बहन के घर भोजन करने और तिलक लगवाने से भाई को यश, आयुष, धन, एश्वर्य एवं सुख की प्राप्ति होती है।

भैयादूज 2021 का शुभ मुहूर्त

भैयादूज का त्यौहार 6 नवंबर दिन शनिवार को मनाया जाएगा। भैयादूज का शुभ मुहूर्त दोपहर 01:10 मिनट से 03:21 मिनट तक रहेगा। 2 घंटे 1 मिनट तक शुभ मुहूर्त की अवधि है।

अंधकार पर प्रकाश को प्रसारित करने वाला यह दिवाली पर्व हमें अज्ञानता रूपी अंधकार से निकाल कर ज्ञान रूपी प्रकाश की ओर अग्रसर होने का संदेश देता है। दिवाली एक त्यौहार नहीं बल्कि पर्वों का समूह है, जिसका प्रत्तेक पर्व हमें सुख सम्पदा व सम्पन्नता से परिपूर्ण रहने का वरदान देता है।

दिवाली महापर्व के पाँचों पर्वों का शुभ मुहूर्त में पूजन सम्पन्न करें ताकि सभी की दिवाली फलदाई, सुख सम्पत्ति प्रदायक, खुशियों से परिपूर्ण तथा मनोकामनाओं की पूर्ति करने वाली हो। दिवाली पंचपर्व के शुभ मुहूर्त की जानकारी के साथ ही आप सभी को दिवाली की हार्दिक शुभकामनाएं।

सभी स्वस्थ रहें, मस्त रहें और सुरक्षित रहें नमस्कार

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