5 Best Diwali Par Kavita | दीपावली पर कविता

DIWALI PAR KAVITA

दिवाली पर कविता

Diwali Par Kavita हमारे मन में बसे अपने धर्म, संस्कारों तथा त्यौहारों के प्रति हमारी श्रद्धा, आस्था, विश्वास और भावनाओं को प्रकट करतीं हैं। सर्वप्रथम हिन्दी कविता के माध्यम से आप सभी पाठकों को दिवाली की हार्दिक शुभकामनाएँ।

दिवाली हिंदुओं का प्रमुख त्यौहार है। दिवाली कार्तिक मास की अमावस्या को मनाई जाती है। प्रत्तेक वर्ष भारतवासी बड़ी धूम से दिवाली त्यौहार मनाते हैं। नई ऋतु का आगमन, गुलाबी मौसम की शुरुआत, त्यौहारों की चहल–पहल, बच्चों में नई उमंग। वाह क्या मनोरम दृश्य होता है।

शुभ दीपावली पर कविता के माध्यम से आज मैं दिवाली आगमन के त्यौहारों से लेकर दिवाली के पाँच पर्वों का भी चित्रण स्वरचित काव्य पंक्तियों के द्वारा प्रस्तुत करूंगी। क्या आप जानते है कि दिवाली को पाँच पर्वों के समिश्रण का त्यौहार कहा जाता है?

जी हाँ कविता के द्वारा हम दिवाली तथा दिवाली में मनाए जाने वाले पाँच प्रमुख पर्वों के कारणों का अध्ययन करेंगे। तो आइए सबसे पहले जानते हैं की दिवाली त्यौहार मनाने का क्या कारण है।

जब श्री रामचन्द्र जी माता सीता व भाई लक्ष्मण के साथ चौदह वर्षों का वनवास पूर्ण करके अयोध्या वापस आए थे। तब सभी अयोध्यावासियों ने श्री रामचन्द्र के स्वागत में अपने घरों की साज-सज्जा की, तथा दिये जलाकर अपनी प्रसन्नता को व्यक्त किया था। तभी से दिवाली मनाने का प्रचलन है। श्री रामचन्द्र के श्री चरणों में नमन करते हुए प्रस्तुत है मेरी कविता

Diwali Par Kavita

NO.1

रामराज्य

वो राम जिनके नाम में सौम्यता भरी हुई।

वो राम जिनके धाम में सरलता भरी हुई॥

ले विष्णु अवतार जो अचंभित कर गए।

हर पल सृष्टि में नवीन चेतना भर गए॥

कभी शौर्य प्रत्यंचा तो कभी अधर मुरली धरे हुए।

तुम बसे हर उर आनंद लिए हुए॥

वो राम जिनके नाम में सौम्यता भरी हुई।

वो राम जिनके धाम में सरसता भरी हुई॥

दे वचन पिता को वनवास जो लिया।

संहार असुरों का कर रामराज्य किया॥

माँ का सम्मान भ्रातृ प्रेम भरे हुए।

दे चरण पादुका भाई का मान किए हुए॥

तुम बसे हर मन मुस्कान लिए हुए॥

वो राम जिनके नाम में सौम्यता भरी हुई।

अन्याय का नाश न्याय स्थापना करी॥

साम्राज्य में शांति सदभावना भरी।

धर्म और कर्म पथ अग्रसर रहे॥

तुम बसे हर हृदय धर्मनिष्ठ बने हुए।

वो राम जिनके नाम में सौम्यता भरी हुई॥

मर्यादा धारण कर पुरुषोत्तम कहे गए।

सीता रक्षा हेतु शक्ति उपासना किए हुए॥

लोक कल्याण की शपथ धरे हुए।

तुम बसे हर कण लोक रंजन बने हुए॥

वो राम जिनके नाम में सौम्यता भरी हुई।

शीतल सलिल सरिता सम निर्विकार बहा किए॥

शक्तिवान, शीलवान काव्य सम झरा किए।

काव्य सृजन कर हम शत-शत नमन करें॥

हर जीवन में श्रेष्ठ आदर्श भरे हुए।

वो राम जिनके नाम में सौम्यता भरी हुई॥

वो राम जिनके धाम में सरसता भरी हुई।

श्रीरामचन्द्र जी के चरणों की वंदना का सुख प्राप्त करके और नाम स्मरण से अंत:करण को पवित्र करते हुए अब हम कविता के इस सफर को आगे बढ़ाते हैं।

दिवाली को पाँच पर्वो का त्यौहार कहा जाता है। दिवाली का प्रारम्भ धनतेरस से होता है। मान्यता है कि समुन्द्र मंथन के समय इसी दिन धन्वंतरि भगवान अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। यही कारण है की इस दिन को धन्वंतरि भगवान के नाम पर धनतेरस कहा गया। धनतेरस के दिन भगवान धन्वन्तरी व कुबेरदेव की पूजा करने का विधान है।

दूसरा दिन नरकचौदस के नाम से जाना जाता है इसे नरक चतुर्दशी भी कहते है। इस दिन श्री कृष्ण ने नरकासुर नामक दैत्य का वध किया था, इसीलिए दीपमालाए प्रज्वलित करके खुशी मनाई जाती है।

तीसरे दिन दिवाली मनाई जाती है, इसे लक्ष्मी पूजन के नाम से भी जाना जाता है। दिवाली के दिन लक्ष्मी गणेश का पूजन करने से भक्त धन सम्पदा से सम्पन्न होता है। यह भी मान्यता है कि दिवाली कि रात माँ लक्ष्मी धरती पर विचरण करती हैं।

चौथा दिन गोवर्धन पूजा के रूप में मनाया जाता है। इस दिन की मान्यता यह है कि जब गोकुलवासियों से रुष्ट होकर इंद्रदेव ने अत्याधिक वर्षा करके सम्पूर्ण गोकुल को जलमग्न कर दिया था। तब श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर उठा कर गोकुलवासियों को आसरा दिया और उनके जीवन की रक्षा की तभी से गोवर्धन पूजा का विधान है।

दिवाली का पांचवा दिन भाईदूज के रूप में मनाया जाता है। इस दिन यमराजदेव अपनी बहन यमुनाजी के घर मिलने गए थे। बहन ने प्रसन्न होकर भोजन खिलाया और तिलक लगा कर उनका मान बढ़ाया। यमराज ने प्रति वर्ष इस दिन बहन के घर आने का वचन दिया।

भाईदूज के दिन यमराजदेव की पूजा होती है। इस दिन बहन के घर भोजन करने और तिलक लगवाने से भाई को यश, आयुष, धन, एश्वर्य एवं सुख की प्राप्ति होती है। दिवाली के पाँच पर्वों के महत्व के साथ ही प्रस्तुत है पाँच पर्वों से सुशोभित दिवाली पर कविता

DIWALI PAR KAVITA

NO.2

शुभ दीपावली

शुभ दीपावली, मंगल दीपावली।

श्री आगमन सम दीपावली॥

पंच पर्व समाहित दीपावली।

धनतेरस की समृद्ध दीपावली॥

कुबेर के पूजन की दीपावली।

धन सम्पदा प्रदायिनी दीपावली॥

शुभ दीपावली, मंगल दीपावली।

नरकासुर के वध की दीपावली॥

श्री कृष्ण की विजयिनी दीपावली।

स्वच्छता की प्रतीक दीपावली॥

शुभ दीपावली, मंगल दीपावली।

श्री चरणों में सुशोभित दीपावली॥

फुलझडियों की अलंकृत दीपावली।

हर पल हर क्षण उल्लास की दीपावली॥

शुभ दीपावली, मंगल दीपावली।

भाई दूज की पवित्र दीपावली॥

यमराज के वचन की दीपावली।

आयुष, यश, अर्थ, धन वर्धन की दीपावली॥

शुभ दीपावली, मंगल दीपावली।

गोवर्धन के विश्वास की दीपावली॥

गोकुल के रक्षण की दीपावली।

इन्द्र दंभ मर्दन की दीपावली॥

शुभ दीपावली, मंगल दीपावली।

श्री आगमन सम दीपावली॥

दिवाली का पर्व आते ही शरद ऋतु की नई लहर चल पड़ती है और मौसम एक नवीन उमंग के साथ माहौल को गुलाबी बना देता है-

NO.3

नया उल्लास

नई लहर, नई चहल, नई ऋतु और नई उमंग।

आई दिवाली नया उल्लास लेकर॥

हर साल आकार धूम मचा कर,

खुशी और उल्लास जगा कर।

आई दिवाली नया उल्लास लेकर॥

चहुं दिश हरियाली फैला कर।

मौसम को गुलाबी बना कर॥

दीपकोत्सव को जग मग चमका कर।

आई दिवाली नया उल्लास लेकर॥

फुलझड़ियों की लहर चला कर।

बाज़ारों को खूब सजा कर॥

रौशन धरती अंबर बना कर।

आई दिवाली नया उल्लास लेकर॥

बच्चों को खुशहाल बना कर।

नए वस्त्रों में साज संवार कर॥

डगर डगर रोमांच जगा कर।

आई नयी दिवाली नया उल्लास लेकर॥

दिवाली आते ही मानो त्यौहारों की झड़ी सी लग जाती है इसीलिए दिवाली को पाँच पर्वों का त्यौहार भी कहा जाता है। यह तो बात हुई दिवाली के त्यौहारों की किन्तु दिवाली आगमन भी त्यौहारों के साथ ही होता है। जी हाँ मैं बात कर रही हूँ नवरात्रि, दुर्गापूजा और दशहरा की–

NO.4
दिवाली आगमन

नवरात्रि की धूम मच गई,

देवी माँ के द्वार सज गए।

हर घर कलश स्थापना हो गई,

हर घर शंख नाद ध्वनि गूंजी॥

हर दिन देवी गीत ध्वनित हुए,

हर दिल आस्था विश्वास सजग हुए।

क्या देवी मंदिर में रहती?

जो समाज में छल बल सहती॥

पूजा रह गई आज अधूरी,

माँ ने जब समाज में आंखे खोली॥

कर मन पावन कलुष मिटा,

सच्चे मन से नवरात्रि मना॥

आया दशहरा सत्य की जीत,

बुराई पर अच्छाई की जीत।

क्या रावण का अन्त हो गया?

रावण राज तो अब भी रह गया॥

भ्रष्टाचार सर्वत्र फैल गया।

मनुष्यता पर भारी पड़ गया॥

आई दिवाली शुभ मंगल।

श्री चरणों में सादर नमन॥

धन सम्पदा की लालसा।

आस्था विश्वास की स्थापना॥

मन उल्लास से भर गया।

क्या हर घर रौशन हो गया?

किस घर का है दीप बुझा॥

किस घर का आसरा छिना।

आओ शपथ लो संवेदना जगाओं॥

हर घर को रौशन बनाओं॥

त्यौहार अवश्य ही हमें हर्षोल्लास और प्रसन्नता से सराबोर करने आते हैं। मन में उमंग, बाज़ारों की रौनक, धार्मिक आस्था और विश्वास दिवाली के त्यौहार में चार-चाँद लगा देते हैं। हमारे संस्कार हमें सांस्कृतिक परिधानों में सजा कर भारतीय होने का स्मरण दिलाते हैं।

खिलौनों और मिठाइयों की मधुरता, दीपकों और लड़ियों की चकाचौंध, आतशबाजियों का अलंकरण सहर्ष ही अपनी ओर आकर्षित कर लेता है। ऐसा प्रतीत होता है सर्वत्र बस प्रकाश, खुशियाँ, उमंग ही प्रसारित है कही भी अंधेरा या उदासी नहीं।

किन्तु वर्तमान समाज और विषम परिस्थितियों का स्मरण आते ही मन खिन्न सा हो जाता है। एक ओर यदि मेरी DIWALI PAR KAVITA का उद्देश्य दिवाली त्यौहार से संबन्धित रोचक जानकारी को उजागर करना है, तो दूसरी ओर समाज में फैल रहे अत्याचार, भ्रष्टाचार, अनाचार और सामाजिक समस्याओं को जान समझ कर उनका निदान करना और स्वच्छ, स्वस्थ व आदर्श समाज की स्थापना की ओर एक कदम बढ़ाना भी है-

NO.5
आओ मिल कर दीप जलाएं

आओ मिलकर दीप जलाएं।

रिश्तों की नई प्रीत निभाएँ॥

शान्ति और सदभावना जगाएँ।

आओ मिलकर दीप जलाएं॥

चहुं दिश फैला अंधकार अज्ञान का।

हर पल छल बल का ही शोर है॥

हर मन में अपनत्व का भाव भर आएं।

आओ मिलकर दीप जलाएं॥

कलयुग में कलिकाल की लहर छल पड़ी।

धर्म का प्रतिपल–प्रतिक्षण नाश हो रहा॥

धर्म को मनुष्यता का संबल बनाएँ।

आओ मिलकर दीप जलाएं॥

कन्याओं की अस्मिता तार तार हो रही।

संस्कारों की हरपल–हरक्षण हार हो रही॥

वैश्विक समाज को वैश्विकता का ज्ञान कराएं।

आओ मिलकर दीप जलाएं॥

अपनी बेटी अपनी बहू की लाज बचाओं।

औरो के घर जाकर के सेंध लगाओं॥

क्या मानवता इस कदर बर्बाद हो रही।

मानव मन में संवेदना की लहर चलाएं॥

आओ मिलकर दीप जलाएं।

पुरुषों को जनने वाली ही माँ खो रही॥

अपनी उत्पत्ति ही अस्तित्व का नाश कर रही।

इस समाज को स्त्रीत्व का भान कराएं।

आओ मिलकर दीप जलाएं॥

रिश्तों की नई प्रीत निभाएँ।

आओ मिलकर दीप जलाएं॥

दिवाली त्यौहार में अमावस्या की काली रात भी दीपकों के प्रकाश से प्रकाशित हो जाती है। दिवाली को दीपकोत्सव, प्रकाशपर्व और रौशनी का त्यौहार भी कहा जाता है। यह पर्व सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक सभी दृष्टियों से अत्यधिक महत्वपूर्ण है।

अंधकार पर प्रकाश को प्रसारित करने वाला यह पर्व हमें अज्ञानता रूपी अंधकार से निकाल कर ज्ञान रूपी प्रकाश की ओर अग्रसर होने का संदेश देता है। दिवाली एक त्यौहार नहीं बल्कि पर्वों का समूह है जिसका प्रत्तेक पर्व हमें सुख सम्पदा व सम्पन्नता से परिपूर्ण रहने का वरदान देता है।

कविता के माध्यम से आप सभी पाठकों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं। यह प्रकाश पर्व सभी के लिए शुभकारी, मंगलकारी और कल्याणकारी हो।

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