Best 13 Durga Saptashati Ke Mantra | नवरात्रि 2021, दुर्गा सप्तशती का महत्व और कल्याणकारी मंत्र

Durga Saptashati Ke Mantra
Durga Saptashati Ke Mantra

Durga Saptashati Ke Mantra कल्याणकारी, चमत्कारी, प्रभावी एवं सिद्धि प्रदायिनी हैं। दुर्गासप्तशती के पाठों व सिद्ध मंत्रों का जाप नवरात्रि के शुभ दिनों में किया जाता है। दुर्गासप्तशती के मंत्रों का जाप विभिन्न प्रकार की समस्याओं के निदान करने तथा मनोकामना पूर्ति के लिए अत्यंत फलदायी हैं।

नवरात्रि पर्व प्रत्तेक वर्ष दो बार मनाया जाता है। पहला नवरात्रि पर्व आश्विन मास में और दूसरा चैत्र मास में मनाया जाता है। आश्विन नवरात्रि को शारदीय नवरात्र तथा चैत्र नवरात्र को वासंती नवरात्र भी कहा जाता है। नवरात्रि पर्व मानवजाति के लिए विशेष महत्व, उल्लास व उत्साह से परिपूर्ण होता है।

नवरात्रि पर्व में दुर्गासप्तशती ग्रंथ और उसमे समाहित मंत्रों का विशेष महत्व होता है, क्योंकि यह मंत्र हमें सुख, शांति, स्वास्थ्य, वैभव और एश्वर्य प्रदान करने में सहायक होते हैं। प्रस्तुत पोस्ट के माध्यम से आज हम जानेगें दुर्गासप्तशती का महत्व तथा उन कल्याणकारी मंत्रों के विषय में जो सँवार सकते हैं हमारी किस्मत और हमें प्राप्त हो सकती है माँ दुर्गा की कृपा।

नवरात्रि 2021

आप सभी को नवरात्रि 2021 की हार्दिक शुभकामनाएं। शारदीय नवरात्रि 2021 दिनाँक 7 अक्टूबर दिन गुरुवार से प्रारंभ हो रहे हैं और दिनाँक 14 अक्टूबर दिन गुरुवार को समाप्त होंगे। तत्पश्चात 15 अक्टूबर दिन शुक्रवार को विजयदशमी का त्यौहार मनाया जाएगा। विजयदशमी अर्थात दशहरा का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का जीवंत उदाहरण है।

तो आइए आज हम नवरात्रि 2021 के सुअवसर पर माँ भगवती की सच्चे मन से आराधना करें। सर्वप्रथम माँ भगवती की कृपा से परिपूर्ण दुर्गासप्तशती ग्रंथ का महत्व जानते हुए उसमें वर्णित शुभ मंत्रों का ज्ञान प्राप्त करें –

दुर्गासप्तशती का महत्व

दुर्गासप्तशती हिन्दू धर्म का सर्वमान्य ग्रंथ है। इनमें माँ दुर्गा की कृपा के इतिहास के साथ – साथ विस्मित करने वाले साधन रहस्य भरे हैं। कर्म, भक्ति व ज्ञान की त्रिवेणी प्रवाहित करने वाला यह ग्रंथ भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करने में सहायक है।

सकाम भक्त इसके सेवन से दुर्लभ वस्तु सहज ही प्राप्त कर लेते हैं और निष्काम भक्त मोक्ष की प्राप्ति करके कृतार्थ होते हैं। यह आशीर्वादमय मंत्रों से युक्त ग्रंथ है। इसका श्रद्धा पूर्वक पाठ करने से भक्तों के मनोरथ सफल होते हैं।

सप्तशती के पाठ में विधि का ध्यान रखना तथा मंत्रों का भक्तिपूर्वक जाप करने से माँ दुर्गा की कृपा शीघ्र ही प्राप्त होती है। सप्तशती अर्थ, धर्म, काम, मोक्ष चारों पुरुषार्थ को प्रदान करने वाली है। जो भक्त जिस भाव और जिस कामना से श्रद्धा एवं विधि के साथ सप्तशती का पारायण करता है, उसे उसी भावना और कामना के अनुसार निश्चय ही फल सिद्धि होती है।

दुर्गासप्तशती के मंत्र

प्रस्तुत पोस्ट में हम सप्तशती के मंत्रों का अध्ययन करेंगे, जिसका संपुट देकर विधिवत् पारायण करने से विभिन्न पुरुषारथों की व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से सिद्धि होती है। तो आइए कल्याणकारी, सिद्धिप्रदायिनी, शुभकारी मंत्रों का ज्ञान प्राप्त करें और इन मंत्रों का जाप करके माँ भगवती की कृपा के भागीदार बनें।

सामूहिक कल्याण के लिए मंत्र (1)

इस मंत्र के जाप से भक्त सामूहिक रूप से विश्व के कल्याण की प्रार्थना कर सकते हैं और सभी के साथ स्वयं भी माता से कृपा प्राप्त कर सकते हैं। वर्तमान समय में सामूहिक कल्याण की भावना अत्यंत आवश्यक है –

                    देव्या यया ततमिदं जगदात्मशक्त्या

                    निश्शेष देवगण शक्ति समूह मूतर्या।

                    तामम्बिकामखिल देव महर्षि पूज्याम्

                    भक्ता नता: स्म विदधातु शुभानि सा न:॥

रोगनाश के लिए मंत्र (2)

अपने परिवार और स्वयं के अच्छे स्वास्थ्य के लिए नवरात्रि में इस मंत्र का जाप कर सकते हैं। यह मंत्र रोगों के रक्षा करता है और शरीर को बल व बुद्धि से परिपूर्ण करके जीवन की बाधाओं को दूर करता है-

रोगानशेषानपहंसि तुष्टा रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान्।

त्वामाश्रितानां न विपन्नराणाम् त्वामाश्रिता हाश्रयतां प्रयान्ति।।

विश्वव्यापी विपत्तियों के नाश के लिए (3)

वर्तमान समय विपत्तियों व संकटों से घिरा हुआ है, सम्पूर्ण विश्व विषम परिस्थितियों के चपेट से न बच सका। ऐसे विपरीत समय में धर्म की ओर उन्मुख होना और ईश्वर के समक्ष नत मस्तक होना स्वाभाविक ही है। तो आइए इस नवरात्रि में प्रस्तुत मंत्र का जाप करें और विश्व को विपत्तियों से उबारने का सफल प्रयास करें –

देवि प्रपन्नार्तिहरे प्रसीद प्रसीद मातजगतों अखिलस्य।

प्रसीद विश्वेश्वरि पाहि विश्वं त्वमीश्वरी देवि चराचरस्य।।

Durga Saptashati Ke Mantra

महामारी नाश के लिए (4)

हम सभी सन् 2020 से कोरोना महामारी की त्रासदी से आक्रांत रहे हैं। हमारे धार्मिक ग्रंथों में महामारी नाश के अचूक मंत्र विद्यमान हैं, जिनके प्रयोग से महामारी के दुष्प्रभाव से बचा जा सकता है। आवश्यकता है मंत्रों के ज्ञान की और श्रद्धा व भक्ति पूर्वक जाप करने की। अवश्य ही हम महामारी का अंत करने में सफल रहेंगे –

जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।

दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नामोस्तु ते॥

आरोग्य और सौभाग्य की प्राप्ति के लिए (5)

मानव के जीवन के परम सुखों में सबसे पहला सुख स्वस्थ काया का ही होता है, जो मनुष्य मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ है वही सर्वाधिक सुखी व्यक्ति है। दूसरा परम सुख है सौभाग्य की प्राप्ति अर्थात धन संपदा और सभी सुखों से सम्पन्न जीवन। वर्तमान जीवन में धन संपदा तो अर्जित की जा सकती है किन्तु स्वस्थ शरीर बहुत ही दुष्कर हो गया है। तो क्यूँ न नवरात्रि के पावन पर्व में माता रानी से आरोग्य व सौभाग्य की प्राप्ति का वरदान प्राप्त करें और प्रस्तुत मंत्र का प्रेम पूर्वक जाप करें –

देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखं।

रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि।।

दारिद्र व दुख नाश के लिए (6)

गरीबी जीवन का सबसे बड़ा दुख है। दरिद्रता के नाश व संपन्नता की प्राप्ति हेतु माँ भगवती सदैव सहाय होती हैं। माँ भगवती के मंत्र का जाप करके उन्हें प्रसन्न करके समस्त दुखों का अंत किया जा सकता है और परम शांति की प्राप्ति की जा सकती है –

दुर्गे स्मृता हरसि भीतिम शेष जन्तो:

स्वस्थै: स्मृता मति मतीव शुभं ददासि।

दारिद्र्यदु:खभयहारिणी का त्वदन्या

सर्वोपकारकरणाय सदा आद्रचित्ता।।

समस्त प्रकार के कल्याण के लिए (7)  

सप्तशती में समस्त प्रकार के कल्याण की प्राप्ति हेतु मंत्र उपलब्ध है। यह मंत्र मनुष्य को आरोग्य, यश, धन, संपत्ति, वैभव, सुख व शांति प्रदायिनी है। यह मंत्र मानव के शारीरिक, मानसिक स्वास्थ्य को उत्तम बनाता है और विचारों में संतुलन लाता है। विचारों में सकरात्मकता आती है और मन शांत व प्रसन्न रहता है –

सर्व मंगल मंगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।

शरण्ये त्रयंबके गौरी नारायणि नामोस्तु ते।।

शक्ति प्राप्ति के लिए (8)

धन, बल, बुद्धि इन सभी गुणों को मनुष्य प्राप्त करने का इच्छुक होता है। अच्छी बुद्धि से धन की प्राप्ति की जा सकती है और शारीरिक बल से परिश्रम किया जा सकता है। जीवन में सफल होने के लिए शारीरिक और मानसिक शक्ति अतिआवश्यक भूमिका निभाती है। तो चलिए प्रस्तुत मंत्र का जाप करके शारीरिक और मानसिक बल की प्राप्ति का वरदान प्राप्त करें –

सृष्टि स्थिति विनाशानां शक्तिभूते सनातनि।

गुणाश्रये गुणमये नारायणि नामोस्तु ते।।

प्रसन्नता की प्राप्ति के लिए (9)

धन संपत्ति हासिल करने का तात्पर्य यह नही की मानव सभी प्रकार से सुखी हो। आत्मिक प्रसन्नता की प्राप्ति दुर्लभ है। अक्सर हम देखते है अच्छी आमदनी व सुविधाओं से सम्पन्न होने पर भी कुछ लोग दुखी व अप्रसन्न रहते है। प्रसन्नता निर्भर करती है आत्मिक सुख व संतुष्टि पर जिस मनुष्य का मन संतुष्ट होता है वही प्रसन्नता को प्राप्त करता है और सच्ची खुशी का अनुभव कर पाता है। तो यदि प्रसन्न रहना है तो संतुष्ट रहने का प्रयास करें। मन को शांत रखने व अत्यधिक इच्छाओं जिनसे मन असन्तुष्टि व बेचैनी का अनुभव करें उनसे बचने के लिए प्रस्तुत मंत्र का जाप करें –

प्रणतानां प्रसीद त्वं देवि विश्वार्तिहारिणि।

त्रैलोक्यवासिनामीडये लोकानां वरदा भव।।

बाधा मुक्ति के लिए (10)

मानव जीवन विभिन्न प्रकार की बाधाओं से घिरा होता है। एक समस्या का निदान करते ही दूसरी आ खड़ी होती है। इन समस्याओं और बाधाओं से मुक्ति पाने का सर्वोत्तम उपाय है माता रानी की शरण। अत: दुर्गा सप्तशती का पाठ और मंत्रों का जाप अवश्य मनुष्य को बाधाओं से छुटकारा दिला सकता है। प्रस्तुत मंत्र का भक्ति पूर्वक जाप करने से मानव अपने जीवन की बाधाओं से मुक्ति पा सकते हैं –

सर्वाबाधाविनिमुक्तों धनधान्य सुतान्वित:।

मनुष्यों मत्प्रसादेन भविष्यति न संशय:।।

सुलक्षणा पत्नी प्राप्ति के लिए (11)

अवश्य ही पुरुष के जीवन को सार्थक बनाने और घर को सँवारने में स्त्री का विशेष महत्व होता है। प्रत्तेक पुरुष सुविचारों वाली, सुशील, सुंदर व संस्कारी पत्नी को प्राप्त करना चाहता है। तो यदि आप सुलक्षणा पत्नी की तलाश में है तो प्रस्तुत मंत्र का जाप करें माता रानी की कृपा अवश्य बरसेगी –

पत्नीं मनोरमां देहि मनोवृतांनुसारिणीम् ।

तारिणीं दुर्गसंसार सागरस्य कुलोभदवाम्।।

पापनाश तथा भक्ति प्राप्ति के लिए (12)      

मनुष्य जाति से अपने जीवन काल में जाने अनजाने अनेक अनुचित कृत्य तथा पाप कर्म हो जाते हैं।  जिनका पश्चाताप करना श्रेषकर होता है, किन्तु पापकर्म का नाश और ईश्वर की भक्ति प्राप्ति के लिए प्रस्तुत मंत्र का जाप करना भी मानव के लिए कल्याणकारी है –

नतेभ्य: सर्वदा भक्तया चंडिके दुरितापहे।

रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि।।

स्वर्ग प्राप्ति के लिए (13)

स्वर्ग प्राप्ति की इच्छा रखना मानव जीवन हेतु अत्यंत आवश्यक है यही भावना मानव को अनुचित कर्म करने से रोकता है और सद्कर्म की ओर अग्रसर करता है। मानव का विश्वास होता है कि अच्छे कर्मों का फल स्वर्ग की प्राप्ति रूप में मिलता है, इसलिए उचित और श्रेष्ठ कर्मों की ओर प्रवृत हों और प्रस्तुत मंत्र का जाप करके स्वर्ग प्राप्ति की इच्छा को पूर्ण करें –

सर्वस्व बुद्धिरूपेण जनस्य हृदि संस्थिते।

स्वर्गापवगरदे देवि नारायणि नमोस्तु ते।।

दुर्गासप्तशती में समाहित उपर्युक्त मंत्र सभी प्रकार से कल्याणकारी हैं। तो इस नवरात्रि माँ भगवती के पूजन में इन मंत्रों के जाप को सम्मिलित कीजिए और माता रानी की कृपा के पात्र बनिए। दुर्गासप्तशती के पवित्र, पावन, कल्याणकारी मंत्रों की प्रस्तुति के साथ ही आप सभी को नवरात्रि की शुभ व मंगल कामनायें।

सभी स्वस्थ रहें, मस्त रहें और सुरक्षित रहें। नमस्कार

Tags:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *