Ganesh Lakshmi Ke Sidh Mantra | 8 Best अष्टलक्ष्मी स्वरूप, लक्ष्मी मंत्र व गणेश श्रोत

Ganesh Lakshmi Ke Sidh Mantra
Ganesh Lakshmi Ke Sidh Mantra

Ganesh Lakshmi Ke Sidh Mantra मनुष्य के सभी प्रकार के कष्टों के निवारण के लिए लाभदायी होते हैं। प्रतिदिन गणेश जी के ‘ॐ गं गणपतये नम:’ मंत्र का जाप करना चाहिए। इस परम पवित्र मंत्र के जाप से पारिवारिक कलह, व्यापार में असफलता, मुकदमा, ऋण, भीषण व्याधि आदि सभी प्रकार के लौकिक कष्टों से मुक्ति मिलती है।

दिवाली के सुअवसर पर आज हम लौकिक पारलौकिक मनोरथों को सिद्ध करने वाले गणेश व माँ लक्ष्मी के कुछ सिद्ध स्रोत मंत्रों का ज्ञान प्राप्त करेंगे। इन चमत्कारी मंत्रों का दिवाली के शुभ दिन जाप करके सुख, शांति, संपन्नता, समृद्धि व स्वास्थ्य लाभ प्राप्त किया जा सकता है।

तो आइए सर्वप्रथम माँ अष्टलक्ष्मी स्वरूप व लक्ष्मी मंत्र तत्पश्चात विघ्न विनाशक गणेश जी के बारह नाम व सिद्ध गणेश श्रोत की जानकारी प्राप्त करें-

अष्टलक्ष्मी स्वरूप व लक्ष्मी मंत्र

विष्णुप्रिये नमस्तुभ्यं नमस्तुभ्यं जगद्वते।

आर्त हत्रि नमस्तुभ्यं समृद्धम कुरु मे सदा।

नमो नमस्ते माहांमाय श्री पीठे सुर पूजिते।

शंख चक्र गदा हस्ते महां लक्ष्मि नमोस्तुते।।

माँ लक्ष्मी के अनेक स्वरूप हैं। प्रत्तेक रूप में वे भक्तों की विभिन्न मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। माँ लक्ष्मी की कृपा दृष्टि होने से मानव को धन संपदा, वैभव, ऐश्वर्य व संपन्नता की प्राप्ति होती है। माँ लक्ष्मी के आठ स्वरूप हैं, जिन्हें अष्टलक्ष्मी स्वरूप भी कहा जाता है। इन अष्टरूपों की श्रद्धापूर्वक पूजाअर्चना करने से सभी समस्याओं का नाश हो जाता है और भक्त धन धान्य परिपूर्ण हो जाता है। 

विभिन्न धर्म ग्रंथों के आधार पर माँ लक्ष्मी के स्वरूपों के नामों में भिन्नता पाई जाती है, किन्तु माँ की महिमा सभी नामों से अनंत और अनुपम है। तो आइए दिवाली के सुअवसर पर माँ अष्टलक्ष्मी स्वरूप तथा सिद्ध मंत्रों का ज्ञान प्राप्त करें और दिवाली के शुभ मुहूर्त पर कल्याणकारी मंत्रों का जाप करके सुख समृद्धि का वरदान प्राप्त करें –

वैभवलक्ष्मी माँ (1)

माता लक्ष्मी के आठ स्वरूपों में वैभवलक्ष्मी माँ का रूप अत्यंत महिमामयी है। माँ के इस रूप को धनलक्ष्मी नाम से भी जाना जाता है। वैभवलक्ष्मी माता को श्रीयंत्र अत्यंत प्रिय है अत: माता के इस रूप की पूजा में श्रीयंत्र का पूजन अतिआवश्यक होता है।

वैभवलक्ष्मी माँ का सिद्ध मंत्र है – ॐ धनलक्ष्म्यै नम:। इस मंत्र का 108 बार जाप करने से माँ धनलक्ष्मी के स्वरूप में भक्तों पर महती कृपा बरसाती हैं और उन्हें धन संपदा का वरदान देती हैं।

ऐश्वर्य लक्ष्मी माँ (2)

ऐश्वर्य लक्ष्मी माँ को यश लक्ष्मी माँ भी कहा जाता है। ऐश्वर्य लक्ष्मी माँ की कृपा होने से भक्त बुद्धि, विवेक, ज्ञान व विनम्रता की अथाह राशि को प्राप्त करके ऐश्वर्य को प्राप्त करता है। ऐश्वर्य लक्ष्मी का सिद्ध मंत्र है – ॐ यशलक्ष्म्यै नम:।

इस मंत्र का जाप करने से ऐश्वर्य लक्ष्मी माँ प्रसन्न हो कर भक्त को यश, ऐश्वर्य, प्रसिद्धि, सम्मान का वरदान प्रदान करती हैं। तो दिवाली के पावन मुहूर्त में माँ के इस रूप की पूजा करें तथा मंत्र का श्रद्धा पूर्वक जाप करके ऐश्वर्य की प्राप्ति करें।

धान्य लक्ष्मी माँ (3)

माता का यह रूप धान्यलक्ष्मी देवी का है जिसे स्थिरलक्ष्मी रूप भी कहा जाता है। दिवाली के दिन माँ के इस रूप की पूजा करने से भक्त का घर धन धान्य से भर जाता है। स्थिरलक्ष्मी माँ के आशीर्वाद से भक्त पर अन्नपूर्णा की कृपा सदैव बनी रहती है।

माँ के धान्यलक्ष्मी स्वरूप के सिद्ध मंत्र हैं – ॐ अन्न लक्ष्म्यै नम:।, ॐ स्थिरलक्ष्म्यै नम:। इन मंत्रों का 108 बार विश्वास पूर्वक जप करने से भक्त के जीवन में आर्थिक संपन्नता व वैभव की प्राप्ति होती है।

आयु लक्ष्मी माँ (4)

आयु लक्ष्मी माँ का स्वरूप भक्तों को दीर्घायु होने का वरदान प्रदान करता है। भक्त रोगमुक्त होकर निरोगी व स्वस्थ जीवन व्यतीत करते हैं। रोग मुक्त जीवन बिताने हेतु आयु लक्ष्मी माँ के मंत्र का जाप सहायक सिद्ध हो सकता है।

आयु लक्ष्मी माँ का सिद्ध मंत्र है – ॐ आयुलक्ष्म्यै नम:। इस मंत्र का 108 बार जाप मानव को सभी शारीरिक व मानसिक व्याधियों से मुक्ति दिला सकता है। तो इस दिवाली माँ लक्ष्मी के सभी रूपों के साथ आयु लक्ष्मी के स्वरूप की भी आराधना करें और स्वस्थ काया व लम्बी आयु का वरदान प्राप्त करें।

वाहन लक्ष्मी माँ (5)

वाहन लक्ष्मी माँ भक्तों की वाहन प्राप्ति संबंधी मनोकामना को पूर्ण करती हैं। यदि आप वाहन की प्राप्ति के इच्छुक हैं तो अवश्य ही वाहन लक्ष्मी माँ के सिद्ध मंत्र का जाप करें। वाहन लक्ष्मी माँ का मंत्र है – ॐ वाहन लक्ष्म्यै नम:।

इस मंत्र का 108 बार आस्थापूर्वक जाप करने से भक्त की वाहन प्राप्ति की इच्छा पूर्ण होती है और यदि व्यापार के उद्देश्य से वाहन की प्राप्ति करनी है तो माँ की कृपा से वाहन का उचित फलदायी उपयोग होता है।

सत्यलक्ष्मी माँ (6)

सत्य लक्ष्मी स्वरूप लक्ष्मी माँ का छठा रूप है। सत्य लक्ष्मी माँ की आराधना से सुंदर, सुशील, संस्कारी, शिक्षित, विनयी व गुणी पत्नी की प्राप्ति होती है। सत्य लक्ष्मी माँ का मंत्र है – ॐ सत्यलक्ष्म्यै नम:।

यदि आप गुणवती जीवनसंगिनी की तलाश में है, तो इस दिवाली सत्य लक्ष्मी माँ की आराधना अवश्य करें और सिद्ध मंत्र का 108 बार जाप करें। विश्वास में ही सफलता छिपी होती है और धर्म विश्वास का उत्तम स्रोत है इस बात का स्मरण अवश्य रखना चाहिए।

संतान लक्ष्मी माँ (7)

माता लक्ष्मी का यह स्वरूप संतान प्राप्ति का वरदान प्रदान करता है। माँ के संतानलक्ष्मी स्वरूप की विश्वासपूर्वक पूजा करने से संतानहीन दम्पत्ति को संतान की प्राप्ति हो जाती है। आवश्यकता है माँ की श्रद्धा, आस्था, विश्वास व भक्ति पूर्वक आराधना करने की।

संतान लक्ष्मी माँ का मंत्र है – ॐ संतान लक्ष्म्यै नम:। इस मंत्र का प्रतिदिन 108 बार जप करने से माँ अवश्य प्रसन्न होती हैं और भक्त को संतान प्राप्ति का वरदान प्रदान करती हैं। यदि आप संतान प्राप्ति की इच्छा रखते हैं तो इस दिवाली से प्रारंभ करें इस मंत्र का जाप।

गृहलक्ष्मी माँ (8)

गृह लक्ष्मी माँ की कृपा होने से घर का वातावरण सुख, शांति पूर्ण रहता है। परिवार के सदस्यों में प्रेम व सौहार्द बना रहता है। गृह शांति का वरदान गृहलक्ष्मी माँ ही प्रदान करती है। माँ की कृपा दृष्टि से घर परिवार पर आई हुई मुसीबतें टल जाती हैं।

गृहलक्ष्मी माँ का सिद्ध मंत्र है – ॐ गृहलक्ष्म्यै नम:। धन संपत्ति प्राप्ति से बढ़कर होती है, जीवन में शांति की प्राप्ति और परिवार में प्रेम संबंध। यदि आप अपने घर में गृहशांति के इच्छुक हैं तो दिवाली के शुभ दिन प्रस्तुत मंत्र का जाप करें।

अष्टलक्ष्मी के रूपों को अन्य नामों से भी पूजा जाता है – धनलक्ष्मी, श्रीगजलक्ष्मी माँ, अधिलक्ष्मी, विजयलक्ष्मी, यशलक्ष्मी, वीरलक्ष्मी माँ आदि। माता को किसी भी रूप में पूजा जाए किसी भी नाम से पुकारा जाए, किन्तु माँ लक्ष्मी की महिमा तो निराली ही है। भक्त के सच्चे मन से पुकारने पर माँ अवश्य ही पुकार सुनती हैं और भक्त का सभी प्रकार से कल्याण करती हैं।

माँ लक्ष्मी के पूजन में लक्ष्मी स्तवन का पाठ अवश्य करें –

लक्ष्मी स्तवन

या रक्ताम्बुजवासिनी विलसिनी चण्डान्शु तेजस्विनी।

या रक्ता रुधिराम्बरा हरिसखी या श्री मनोल्हादिनी।।

या रत्नाकर मन्थनात्प्रगंटिता विष्णोंस्वया  गेहिनी।

सा मां पातु मनोरमा भगवती लक्ष्मीश्च  पद्मावती।।

(जो लाल कमल में रहती है,जो अपूर्व कान्तिवाली है, जो अत्यंत तेजवाली है, जो पूर्ण रूप से लाल है, जिसने रक्तरूप वस्त्र पहने हैं, जो भगवान विष्णु को अतिप्रिय हैं, जो लक्ष्मी मन को आनंद देती है, जो समुद्रमंथन से प्रकट हुई है, जो विष्णु भगवान की पत्नी है, जो कमल से जन्मी है और जो अतिशय पूज्य है, वैसी हे लक्ष्मी देवी। आप मेरी रक्षा करें।)

Ganesh Lakshmi Ke Sidh Mantra
गणेश जी के बारह नाम व गणेश श्रोत  

गजाननं भूतगणादिसेवितं कपित्थजंबुफलचारुभक्षणम्।

उमासुतं शोकविनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वरपादपपंकजम्।।

विघ्नविनाशक गणेश जी के बारह नाम इस प्रकार हैं – गणपति, विघ्नराज, लंबतुंड, गजानन, द्वैमातुर, हेरम्ब, एकदंत, गणाधिप, विनायक, चारुकर्ण, पशुपाल और भवात्मज। गणेश जी के इन बारह नामों का प्रात:काल पाठ करने वाले व्यक्ति के सभी विघ्नों का नाश होता है।

गणेश जी के मंत्रों के जाप के लिए प्रात: स्नान करके पूर्व व उत्तर की ओर मुख करके सामने चौकी पर गणेश जी की प्रतिमा व तस्वीर विराजमान करके धूप दीप प्रज्ज्वलित करके जप प्रारंभ करना चाहिए। जप सम्पन्न होने तक घी का दीप जलता रहना चाहिए।

तत्पश्चात संकल्प लेकर जप प्रारंभ करना चाहिए। प्रतिदिन या दिवाली के शुभ अवसर पर 108 माला का जप करना सर्वोत्तम होता है। सुविधानुसार 55, 31 और 11 माला का जप भी किया जा सकता है। आइए अब विभिन्न प्रकार के मनोरथों की पूर्ति हेतु गणेश श्रोत का ज्ञान प्राप्त करें –

ब्रह्ममुहूर्त में स्मरणीय गणेश श्रोत

ब्रम्हमुहूर्त में उठकर धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की सिद्धि तथा निर्विघ्न दिन व्यतीत करने के लिए स्मरणीय गणेश श्रोत है –

प्रात: स्मरामि गणनाथमनाथबंधुं

सिंदूर पूर परि शोभित गंड युग्मम्।

उद्दंड विघ्न परिखंडनचण्डदंड –

माखंडलादिसुरनायकवृंदवंद्यम्।।

मंगल विधान के लिए

शुभ व मंगलकारी कार्यों के सम्पन्न होने के संकल्प की पूर्ति हेतु निम्न गणेश श्रोत का जाप करना अति उत्तम होता है –

गणपतिविघ्नराजो लम्बतुण्डो गजानन:।

द्वैमातुरश्च हेरम्ब एकदंतों गणाधिप:।।

विनायकश्चरुकर्ण: पशुपालो भवात्मज:।

द्वादशैतानि नामानि प्रातरुत्थाय य: पठेत्।।

विश्वं तस्य भवेद्वश्यं न च विघ्नं भवेत् क्वचित्।

विघ्ननाश के लिए

प्रात: काल उठकर इस गणेश श्रोत का जाप करने से भक्त सम्पूर्ण विश्व को अपने वश में कर सकता है और उसे कभी विघ्न का सामना नही करना पड़ता। यह श्रोत महान पुण्यमय तथा विघ्न तथा शोक को हराने वाला है –

परं धाम परं ब्रह्म परेशं परमीश्वरम्।

विघ्ननिर्विघ्नकरं शान्तं पुष्टं कान्तमनंतकम्।।

सुरा सुरेंन्द्रे: सिद्धेन्द्रे: स्तुतं स्तौमि परात्परम्।

सुरपद्यदिनेशं च गणेशं मंगलायनम्।।

इदं स्तोत्रं महापुण्यं विघ्नशोकहरं परम्।

य: पठेत् प्रातरुथाय सर्वविघ्रात् प्रमुच्यते।।

लौकिक एवं पारलौकिक मनोरथों को सिद्ध करने वाले गणेश श्रोत तथा माँ लक्ष्मी मंत्र की प्रस्तुति के साथ ही आप सभी पाठकों को दिवाली की हार्दिक शुभकामनाएं। सभी स्वस्थ रहें, मस्त रहें व सुरक्षित रहें। नमस्कार

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