4 Best Hindi Poem on Nature | प्रकृति पर कविता, बसंत की आहट जो आई

Hindi Poem on Nature

Hindi Poem on Nature

Hindi Poem on Nature अपने भीतर सम्पूर्ण सृष्टि की मनोहरता को समाहित किए होती हैं। प्रकृति पर कविता में प्रकृति की सुंदरता को अत्यंत रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। कविताओं का यह सफर प्रकृति पर स्वरचित कविताओं का संकलन है।

इस संकलन में प्रकृति के अनेक रंगों और रूपों से सुसज्जित सौन्दर्य को उद्घाटित किया गया है। प्रकृति और काव्य का सदैव से ही एक अनूठा रिश्ता रहा है। प्रकृति प्रेम में अनेक कवियों ने रचनाएँ की।

हिन्दी साहित्य के छायावाद काल में तो प्रकृति के अनुपम सौन्दर्य को अत्यधिक हृदयस्पर्शी, मार्मिक एवं मानवीकरण रूप में व्यक्त किया गया है। जिस प्रकार मानव अपने रिश्तों के प्रेम से आबद्ध होता है उसीप्रकार प्रकृति का प्यार दुलार हमें जोड़ कर रखता है।

प्रकृति हमें प्रेरणा प्रदान करती है। जिंदगी में आगे बढ़ने का हौसला देती है। प्रकृति का सानिध्य  जीवन के भवसागर में प्रेरणाप्रद पतवार का कार्य करती है। अत: हमें यदि अपना जीवन सुरक्षित व खुशहाल बनाना है, तो प्रकृति की सभी प्रकार से सुरक्षा करनी चाहिए।

प्रकृति मानव जीवन के लिए जल, अन्न, फल, वायु तथा जड़ी बूटियों को सुलभ कराती है। प्रकृति हमारे लिए जीवनदायिनी है। प्रकृति के बिना जीवन की कल्पना भी संभव नहीं। प्राकृतिक सौन्दर्य अप्रतिम, अनोखा तथा आकर्षण युक्त है, जिसे शब्दों में वर्णित करना संभव नहीं।

तो आइए चलते हैं कविताओं के इस सफर में जहाँ प्रकृति के कण कण में व्याप्त जीवन का वर्णन बड़े ही भावपूर्ण रूप में किया जा रहा है। पहली कविता धरती और अंबर के प्रेम से सराबोर सृष्टि का जीवंत चित्रण प्रस्तुत कर रही है –

Hindi Poem on Nature

No 1

धरती अंबर

पक्षी, बादल, फूल, हवा हर जीवन है प्यार।

धरती अंबर दोनों से बनता है संसार॥

प्रकृति की गोद को हर ऋतु से है प्यार।

हर ऋतु का दर्पण लिए मिट्टी करे श्रंगार॥

धरती की हरियाली में हर जीवन आबाद।

अंबर के आकर्षण में हर क्षण का आगाज॥

सूरज की किरणों में भोर का आभास॥

चाँद की चाँदनी में तृप्ति का अहसास।

मन से मन के मिलन से ही है रागिनी॥

वरना कुछ भी नहीं है जिंदगी।

पक्षी, बादल, फूल, हवा हर जीवन है प्यार।

धरती अंबर दोनों से बनता है संसार॥

भारत देश की प्राकृतिक सुंदरता निराली व अंतरंग है। प्राकृतिक छटा अनेक रूपों में प्रसारित होती है। प्राकृतिक सौन्दर्य बिखेरने का एक माध्यम ऋतुए भी हैं। ऋतुए तो अनेक हैं, जो समय समय पर अपनी छवि के मनोरम दर्शन कराती रहती हैं।

सभी ऋतुओं का राजा कही जाने वाली निराली ऋतु है बसंत। ऋतुराज बसंत का मौसम प्रकृति के नवयौवन रूप को उजागर करता है। जिस प्रकार मानव जीवन में यौवन का आगमन मद मस्त, मनोहर और रोमांचकारी होता है, उसीप्रकार बसंत ऋतु को प्रकृति का यौवन माना जाता है।

बसंत ऋतु का आगमन, बसंत पंचमी के पावन पर्व की पवित्रता, माँ सरस्वती द्वारा प्रखर ज्ञान का प्रसार,  शीत का जाना, सुनहरी धूप का आना, नीला आसमान विस्तृत वितान, खेतों में पीली सरसों की भीनी भीनी सुगंध, पक्षियों का मधुर कलरव, मदमस्त पवन के झोकें, नवकुसुम युक्त बागों का नृत्य, किसका मन नहीं मोहते?

प्रत्तेक प्राणी इस सुहावने प्रकृति के सौन्दर्य में सराबोर हो जाना चाहता है, क्योकि जो शांति, शीतलता, प्रेम व संतुष्टि ऋतुराज के सानिध्य में है वह अन्यत्र नहीं। Hindi Poem on Nature की अगली कविता बसंतऋतु की शोभा के साथ – साथ ही माँ सरस्वती से वरदान की कामना भी करती है-

No 2

बसंत की आहट जो आई

मौसम में हरियाली छाई।

बसंत की आहट जो आई॥

पिक कोयल ने तान सुनाई।

फूलों ने मलय सुगंध फैलाई॥

आम्र वृक्ष में बौर स्वर्ण सम।

टेसू किंसुक नवयौवन धर॥

पीला आँचल हरियाली ढक।

सरसों की खुशबू फैलाकर॥

गई शीत बसंत ऋतु आई।

मौसम में हरियाली छाई॥

चंचल अंबर स्वच्छ सलिल कर।

तारों सा जगमग श्रंगार भर॥

कोहरे की अब धुंध हटा कर।

सुनहरा हर  दिवस बना कर॥

बागों में नवकुसुम खिलाकर।

मस्त पवन से मिलन कराकर॥

ऋतुराज ने बासंती फैलाई।

मौसम में हरियाली छाई॥

श्वेत कमल आसन विराज कर।

पीत वस्त्र में साज संवार कर॥

ज्ञान ज्योति प्रखर प्रदीप्त कर।

मानस पटल से अज्ञानता का नाशकर॥

ज्ञानहीन मानव में अद्भुत ज्ञान भर।

भक्ति प्रदान कर जीवन उद्धार कर॥

बसंत ने सरगम है सुनाई।

माँ सरस्वती फिर मुस्काई॥

मौसम में हरियाली छाई।

बसंत की आहट जो आई॥

भारत में जुलाई से लेकर सितंबर तक का समय वर्षा ऋतु का माना जाता है। वर्षा ऋतु में सम्पूर्ण सृष्टि शीतल और स्वच्छ प्रतीत होती है। लहलहाती फसलें, मस्त पवन के झोको के साथ इठलाते व नृत्य करते पौधे, हरी भरी धरती अत्यंत सुखद अहसास देती है।

बारिश का मौसम इतना सुहावना होता है कि हम स्वयं को उसमें भीगने से रोक नहीं पाते। गर्मियों की  उलझन को चीरती वर्षा की फुहारें हमारे तन और मन दोनों को ही शीतलता प्रदान करती हैं।

जहाँ एक ओर बारिश का मौसम प्रकृति को सरसता प्रदान करता है वहीं दूसरी ओर फसलों को भी लाभ देता है। बादलों का धरती से आकर्षण तो बस वर्षा ऋतु में ही नज़र आता है। धरती की हरियाली उसे भी बरसने के लिए उत्साहित करती रहती है। जैसे – जैसे बारिश की बूँदें धरती पर पड़ती हैं वैसे – वैसे सोंधी – सोंधी खुशबू मन को मोहने लगती है।

यह सोंधी सुगंध का ही प्रभाव होता है की वृक्षों में नवीन जीवन आ जाता है और पक्षीगण मधुर ध्वनि में कलरव करके अपने आनंद को प्रकट करते है –

Poem on Nature in Hindi

No 3

वर्षा ऋतु

काली घटा छाई है, बादलों ने चूनर फैलाई है।

हरे भरे खेतों में फुहारें बरसाई हैं॥

मिट्टी की सोंधी खुशबू प्रकृति में छाई है।

पावन के झोको संग संदेशा वो लाई है॥

ये वर्षा नागरी है जो सृष्टि महकाने आई है।

कोयल की तान सम सरगम सुनाई है॥

पपीहे की कूक ने सुमधुर धुन गाई है।

पिक ने बागों की हरियाली बढ़ाई है॥

ये वर्षा सुंदरी है जो सौन्दर्य झलकाने आई है।

कभी लुकी, कभी छिपी सी नज़र आई है॥

सूर्य किरणों सम स्वर्ण लटाएँ चमकाई हैं।

नदी तालाबों में उफान मचाई है॥

ये वर्षा ऋतु है जो शीतलता बरसाने आई है।

काली घटा छाई है, बादलों ने चूनर फैलाई है॥

वर्षा ऋतु का आगमन होते ही सावन का आहलदकारी मौसम दस्तक देने लगता है। वो सावन के झूले, मेहँदी की भीनी – भीनी खुशबू, हरी – हरी चूड़ियों की खनक, सावन के गीतों की गूँज सम्पूर्ण माहौल को प्रफुल्लित कर देती है।

सावन को प्रेम का मौसम भी कहा जाता है। प्यार में मिलन की सुहावनी बेला के साथ – साथ वियोग की तड़प भी जीवंत हो उठती है। एक ओर यदि इसे प्यार का मौसम कहते हैं तो दूसरी तरफ ये सावन का मौसम बचपन की यादें भी खीच लाता है।  

वो सावन की चंचल बौछारें ही होती हैं, जो मन में छुपी बचपन की यादों को पुन: जाग्रत कर देती हैं। सच सावन की फुहारों में भीगना, बारिश के ठहरे पानी में कागज की नाव चलाना, स्कूल से आकर भीगे हुए बस्तों को धूप में सुखाना ये ऐसी स्मृतियाँ है, जिन्हें विस्मृत ही नहीं किया जा सकता। आइए पढ़ते है की प्रस्तुत कविता किस प्रकार सावन की बौछारों के साथ बचपन के सुखद पलों की यादें उजागर कर रही है –

No 4
सावन की घटाएँ

सावन की घटाएँ छाती हैं।

बचपन की यादें लाती हैं॥

वो ठहरे पानी में नाव चलाना।

वो भीग कर मदमस्त हो जाना॥

छम छम बारिश के गीत सुनाना।

बिजली चमके तो डर छुप जाना॥

आज भी हमको सताती है।

बचपन की यादें लाती हैं॥

बहती हवा का तन छू जाना।

कानों में संगीत सुनाना।

यारो संग धूम मचाना॥

बारिश की फुहारों संग आसमा छू आना।

आज भी बेचैन कर जाती है।

बचपन की यादें लाती हैं॥

पेड़ों की डाली का झुक झुक जाना।

सावन के झूलों का हमें बुलाना॥

लम्बी लम्बी पेंग लगाना।

पावन झोको से हिल मिल आना॥

आज भी सहला जाती है।

बचपन की यादें लाती है॥

बागों में हरियाली का छाना॥

आसमा सतरंगी बन जाना।

सोंधी खुशबू का मन को भाना॥

पक्षियों का कलरव दिल छू जाना।

आज भी खुशनुमा कर जाती है॥

बचपन की यादें लाती हैं।

सावन की घटाएँ छाती हैं।

बचपन की यादें लाती हैं॥

धरती पर प्रकृति की छटा अनेक रूपों में बिखरी हुई है। प्रात: कालीन सूर्य के प्रकाश से लेकर चंद्रमा की चाँदनी तक सम्पूर्ण सृष्टि प्रकृति के सौन्दर्य से परिपूर्ण है। कहीं हरे – भरे वृक्ष, रंग बिरंगे फूल, शीतल झरने तो कहीं कलकल बहती नदियाँ प्राकृतिक सुंदरता को चार चाँद लगा देती हैं।

माँ प्रकृति की गोद हमें सहलाती है, पालती पोसती है। प्रकृति हमारे जीवन को संतुलित और पोषित करती है। साँस लेने के लिए वायु, जीवन हेतु जल, पोषण के लिए खाद्यसामग्री उपलब्ध कराती है। अत: प्रकृति मानवजीवन हेतु वरदान है, हमें प्रकृति का महत्व समझते हुए थोड़े से लाभ के लिए अपनी वरदान समान सम्पदा को नष्ट नहीं करना चाहिए।

उम्मीद करती हूँ कि प्रस्तुत सफर में संकलित प्रकृति से सराबोर कविताएं आप सभी को अवश्य पसंद आएंगी। वर्षाऋतु की फुहारों की शीतलता, बसंत ऋतु का सुहावना व रंगीन मौसम, सावन का रोमांचकारी वातावरण आप को अपने बचपन की यादें तथा बीते हुए सुखद पलों का स्मरण जरूर कराएंगी।

तो अपनी भावनाएं एवं विचार कमेंट के माध्यम से पहुचाने की कृपा करें। कविताओं के सुहावने सफर को यहीं समाप्त करती हूँ। आप सभी स्वस्थ रहें, मस्त रहें और सुरक्षित रहें। नमस्कार।         

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