5 Best Hindi Poetry on Life | जिंदगी पर कविता, जीवन और कविता

Hindi Poetry on Life

Hindi Poetry on Life

Hindi Poetry on Life के इस सफर में आज मैं जिंदगी से संबन्धित कविताओं का संकलन साझा कर रही हूँ। जिंदगी पर कविता हमें जिंदगी के बेहतरीन रूप के दर्शन कराती है।

कविता सच्चे अर्थों में जिंदगी की हकीकत और अहमियत को प्रदर्शित करती हैं। यह कविताएं जीवन पथ पर आने वाली मुश्किलों का वर्णन करते हुए, लाख समस्याओं के रहते हुए भी जिंदगी जीने का बेहतरीन तरीका बताती है।

इससे पहले मैंने अपनी वेबसाइट में जिंदगी क्या है? लेख को सम्मिलित किया है, जो जिंदगी की सच्चाई को बयां करते हुए खुशहाल जिंदगी जीने के तरीके बताता है। साथ ही जिंदगी पर कविता पोस्ट में जीवन की यात्रा का वर्णन स्वरचित कविताओं के द्वारा उद्घाटित किया गया है।

कविताएं सदैव से ही हमारी भावनाओं को व्यक्त करने तथा अनुभूतियों के एहसास का आधार रही हैं। जिस प्रकार मोटीवेशनल कविताएं हमें जीवन से प्रेरणा गृहण करते हुए नवीन उत्साह से प्रयास करने के लिए प्रेरित करती हैं। प्रेम पर कविताएं प्यार के निर्मल, पावन, सलिल व शीतल स्वरूप का वर्णन करती हैं।

उसी प्रकार कविता जिंदगी को सही मायनों में हमारे समक्ष उपस्थित करती है। अवश्य ही इस संकलन में संग्रहीत कविताएं आपके जीवन से संबन्धित महसूस होंगी। साथ ही जिंदगी जीने का नया जज़्बा, उत्साह, उमंग व हौसला भी प्रदान करेंगी। तो आइए जिंदगी को बारीकी से समझते हुए कविताओं के सफर को शुरू करें।

जिंदगी क्या है? एक लम्बी यात्रा, कुछ पाने की इच्छा, मंजिल की तलाश, प्यार की चाहत, सुकून की खोज या फिर उम्मीदों का सिलसिला। जीवन में समय का चक्र घूमता रहता है इसी लिए हमारा वक्त भी बदलता रहता है। कभी हम कुछ पाते है, तो कभी खोते है।

यह एक किताब है, जिसे कितना भी पढ़ो पर खत्म नहीं होती। एक नया पन्ना व अध्याय इक नए दौर के रूप में खुल कर सामने आ ही जाता है –

No 1

दौर

इक दौर गया, इक दौर आया।

तब क्या खोया, अब क्या पाया॥

जिंदगी की लहरों में तैरते चले गए।

कभी खुद को मझधार में पाया॥

तो कभी मझधार से पार लगाया।

इक दौर गया, इक दौर आया॥

राहें मिलती रही, हम चलते रहे।

कभी मंजिल को दूर से देखा॥

तो कभी मंजिल को पास ही पाया।

इक दौर गया, इक दौर आया॥

जिंदगी ने हर पल हमें आजमाया। 

जिंदगी ने हर क्षण हमें थकाया॥

और कभी इक नया पाठ पढ़ाया।

इक दौर गया, इक दौर आया।

तब क्या खोया, अब क्या पाया॥  

वर्तमान जीवन में अनेक चुनौतियाँ हमारे सामने उपस्थित हो गई हैं। इन समस्याओं में फसकर  यकीनन हम सभी परेशान होते हैं, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो नकारात्मक्ता के शिकार हो जाते है। ऐसे लोग केवल जीवन की परेशानियों पर ही ध्यान देते हैं। बेकार की चिंताओं में डूबे रहते हैं।

कभी अपने बच्चों की तुलना अन्य बच्चों से करके, स्वास्थ्य संबंधी निरर्थक भ्रम पाल कर या सामाजिक स्तर का दिखावा करते रह कर। ये सारी चिंताएँ हमें असमय ही थका देती हैं, और हम जीवन में खुद को हारा हुआ सा महसूस करने लगते हैं।

इस तरह की मानसिकता हमें निराशा, अफसोस, दुख व नकारात्मकता के गर्त में ढकेलती जाती है, और हमारी हर प्रकार से केवल हानि ही होती है। मुश्किलों से हार मान लेना जिंदगी नहीं है। हार मानकर व्यक्ति मात्र अपनी जिंदगी को काटता है, और स्वयं को दुख व बेचैनी ही देता है –

No 2

मुश्किल

टूट कर बिखर गई जिंदगी इस कदर,

कि संभलना मुश्किल लगता है।

जिंदगी बन गई ऐसा फसाना की  

सुनाना मुश्किल लगता है॥

अब तो वक़्त भी साथ देता नहीं।

इस कदर ये सफर कटना

मुश्किल लगता है॥

सुबह से शाम यूँ ही हो जाती है।

बस दिनों को गिनना

मुश्किल लगता है॥

ये सफर कट जाएगा यूँ ही

बस खुश होना मुश्किल लगता है॥  

जिंदगी की समस्याएँ, मुश्किलें, चुनौतियाँ हमारे जीवन का हिस्सा हैं और इनके समक्ष नत मस्तक होना हमारी मजबूरी, लेकिन मजबूरियों के आगे हार मानना हमारी मजबूरी नहीं। इसलिए हमेशा चुनौतियों का डट कर सामना करना चाहिए। जीवन में विभिन्न प्रकार की मजबूरियाँ आती हैं, और हमें जिंदगी के मायने बता कर जाती हैं।

इस सफर की प्रस्तुत कविता अनेकों मजबूरियों के रहते हुए भी आँखों में नए सपने और इरादों में ऊँची उड़ान की कल्पना कर रही है। आइए हम भी प्रेरणा गृहण करें –

Hindi Poetry on Life

No 3

मजबूरियाँ

उम्मीदें हर पल आँखों में पिघलती रहीं।

मजबूरियाँ जिंदगी के साथ उभरती रहीं॥

जब जिंदगी सुनहरी धूप बन मुस्कुराने लगी।

मजबूरियों की बारिश हमें फिर भिगाने लगी॥

मजबूरियाँ भी अनेक रंग दिखाती रहीं।

शिक्षा से विहीन तो कभी भूखे पेट सुलाती रहीं॥

शिक्षित बेरोजगारी दिनोंदिन बढ़ती रही।

हर क्षण वैश्विकता का अंजाम समझाती रही॥

अन्नदाता की मजबूरी संघर्ष कराती रही।

मजबूरी ही वो, जो फाँसी पर चढ़ाती रही॥

मजदूरों को पलायन का दर्द देते हुए,

मानव मन में संवेदना की लहर चलाती रही॥

कलयुगी त्रासदी महामारी बन सताती रही।

मानव को मानवता से अलग कराती रही॥

मानव को उसकी सीमाएँ बताते हुए,

एकाकीपन का अहसास दिलाती रही॥

अपनों से दूर पल – पल दिल दुखाती रही।

ये रोटी की मजबूरी देश विदेश भगाती रही॥

हर – पल संतुष्ट रहने की सीख सिखाते हुए,

जिन्दगी मजबूरियों के सांचे में ढलती रही॥

अपने ही शिकंजे में मानव को फसाती रही।

कुछ तो भूलें हुई, जो हमें यूँ रुलाती रहीं॥

यह शिकंजा हमारा शिकारी हमी है।

मजबूरियाँ हर क्षण ये अहसास दिलाती रहीं॥

मजबूरियों की बेड़ियाँ हमें जो रोकती रहीं।

जिन्दगी आगे बढ़ने की राहें दिखाती रहीं॥

सपनों में पलकों के पहरे जो लगते रहें।

आँखों की झीलें कवल फिर खिलाती रहीं॥

नीलें वितान पर उम्मीदों की उड़ान फबती रही।

हौसलों के पंखों की साझेदारी भी जचती रही॥

मजबूरियाँ तो यूँ ही दस्तक देती ही रहीं।

आशाएँ और उमंगें उड़ान तीव्र भरती रहीं॥

उम्मीदें हर पल आँखों में पिघलती रहीं।

मजबूरियाँ जिन्दगी के साथ उभरती रहीं॥

जरा सोच बदल कर देखिए सकारात्मक्त विचारों को मन में स्थान दीजिए, फिर जीवन की यही मुश्किलें पल भर की मेहमान लगेंगी। सुहावनी प्रकृति जिंदगी जीने का एहसास कराएगी। निराशा और हार की जगह नई उम्मीदें व उमंगें जीवन जीने की ललक और कुछ अच्छा करने की चाहत उत्पन्न करेंगी।

नकारात्मक सोच के कारण जो विचार चुभते थे। तकलीफ देते थे, वही अब शीतल पवन के झोकों की तरह सिहरन उत्पन्न करेंगे और अन्तर्मन प्रसन्नता का अनुभव करेगा। आप स्वयं महसूस करेंगे कि एक सकारात्मक सोच जिंदगी को कितना खूबसूरत बना सकती है।

हमारे मन के विचार ही हमारी सोच बनाते हैं, यदि विचार स्वच्छ, निर्मल और सकारात्मक हैं, तो अवश्य ही हमारी सोच व व्यवहार भी स्वयं के अतिरिक्त दूसरों को भी प्रसन्नता और शांति प्रदान करेंगे। सब कुछ पहले सा होते हुए भी एक प्यारा सा अहसास, सुखद अनुभूति तथा प्रकृति की सौम्यता हमें सहलाएगी।   

No 4
एहसास  

आज कुछ अलग ही मौसम है।

सुहावनी हवा छूकर सिहरन का

एहसास दे रही है॥

वो महकी सी फिज़ा, वो महकी सी हवा

न जाने क्यूँ कुछ कह रही है।

वही राहें, वही मंजिल फिर भी,

हट कर कुछ एहसास॥

इक उत्साह, इक उमंग, इक उम्मीद। 

हर एहसास से अलग एहसास है ये॥ 

जिंदगी में बहुत कुछ पाने की आस है ये।

बस जिंदगी में बढ़ते जाने का पैगाम है ये॥  

जीवन एक लम्बी यात्रा है। जिंदगी के इस सफर में अनेक मोड़ आते हैं। कभी – कभी हम खुद को ऐसे मोड़ पर खड़ा पाते हैं, की समझ ही नहीं आता आखिर हम क्या करे? किधर जाए? कौन सा रास्ता सही और कौन सा गलत है? इस उधेड़ बुन में मन अशांत तो दिमाग शिथिल हो जाता है। समय के साथ – साथ कभी खुशी के पल तो कभी दुख की घड़ियाँ हमारी जिंदगी में दस्तक देती ही रहती हैं।

हमें हसी पलों को सँजोकर रखना चाहिए क्योकि ये खुशी के क्षण हमारे चुनौतीपूर्ण समय में तथा दुख की घड़ियों में वक़्त के जल्द ही बदलने का संकेत देते हैं। अपनी व्यस्त लाइफ से कुछ पलों को निकालिए। जी हाँ जिन्हें कहते हैं, फुरसत के पल।

फुरसत के इन पलों को अपने प्रियजनों के साथ एंजॉय कीजिये। अगर आप के पास वर्तमान समय की परिस्थितियों के बीच कोई ऐसा रिश्ता है, जिससे आप अपने मन की हर बात कह सकते हैं। अपनी  भावनाओं को खुले मन से साझा कर सकते हैं, तो यकीन मानिए आप से खुशनसीब कोई भी नहीं।  

तो अब क्या सोचना चलिये आज से ही नहीं बल्कि अभी से ही अपनी जिंदगी को फुरसत के पलों की सौगात दे। यकीनन जिंदगी भी हमसे बहुत खुश होगी क्योकि हमने उसे व्यस्त और त्रस्त समय की चक्र से निकाल कर कुछ ही क्षणों के लिए सही पर फुरसत तो दी-

Hindi Poetry on Life 2 1
No 5
फुरसत

फुरसत में जिंदगी जीने की तमन्ना रखते हैं।

उड़ कर बहुत दूर जाने की ख़्वाहिश रखते हैं॥

खुशबू तो फूलों की खूबी होती है।

उसी खूबी को मन में बसाने का अरमान रखते हैं॥

कहने को तो दुनियाँ में खुशियों की कमी नहीं।

फुरसत के पलों को सजोने की कोशिश करते हैं॥

जिंदगी का ये सफर कटता ही जाएगा।

इक पल ठहर कर,

किसी को पाने की इबादत करते हैं।

बिताने को तो सारी जिंदगी पड़ी है॥

कुछ पल जिंदगी जीने की इजाजत चाहते हैं।

जिंदगी की अहमियत को बहुत जान लिया॥

अब तो बस हकीकत को समझना चाहते हैं।

उम्मीदों और तरक्कियों का दौर चलता ही जाएगा॥

अब दिल के सुकून की चाहत रखते हैं॥

फुरसत में जिंदगी जीने की तमन्ना रखते हैं।

उड़ कर बहुत दूर जाने की ख़्वाहिश रखते हैं॥

अक्सर हम मुश्किलों का पहाड़ बनाकर उसी के नीचे दबते जाते हैं, या मजबूरियों की खाई में धसते जाते है। क्यूँ हम खुद को इतना परेशान करते है। जितना समय की मार हमें नहीं मारती उससे कहीं ज्यादा हम स्वयं की सोच से बेचैन होते रहते हैं। अगर हम हमारे समय को बदल नहीं सकते फिर उसपर रोना क्यूँ। आइए मुश्किलों के घने अंधेरे में एक उम्मीद का दिया जलाएं।

उलझनों के पथरीले रस्तों पर सूझ बूझ और दृढ़ता से कदम बढ़ाएं तथा परेशानियों की भूल भुलैया में संयम से सरल राह निकाले फिर जिंदगी का सफर तय करें। इस संकलन में संकलित कविताएं यकीनन आप सभी को रुचिकर लगेंगी। यह कविताएं हमारे जीवन से ही जुड़ी हैं तथा वास्तविकता को स्वीकारते हुए हमें जिंदगी का सफर तय करने के बेहतरीन तरीके बताते हुए प्रेरणा प्रदान करती है।

प्रस्तुत कविताएं हमें जीवन में हार न मानते हुए कर्तव्य करने का संदेश देती है। अब यह सफर समाप्त करती हूँ। आप सभी स्वस्थ रहें, मस्त रहें और सुरक्षित रहें। नमस्कार

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