Lockdown Ke Dour Mein Internet Ka Astitva | 2 Best इंटरनेट का आविष्कार और महत्व

Lockdown Ke Dour Mein Internet Ka Astitva
Lockdown Ke Dour Mein Internet

लॉकडाउन के दौर में इंटरनेट का अस्तित्व

Lockdown Ke Dour Mein Internet का अस्तित्व अत्यंत उजागर हो रहा है। वर्तमान समय में लॉकडाउन व सोशल डिस्टेंसिंग के दौर में इंटरनेट हमारे लिए आर्थिक, राजनैतिक, शैक्षणिक व सामाजिक रूप से अहम भूमिका निभा रहा है। ऐसा प्रतीत होता है कि लॉकडाउन के दौर में हमारी जो रफ्तार कम हुई है अगर इंटरनेट न होता तो शायद वह रफ्तार पूर्णतया आबद्ध हो जाती। इन मायनों में लॉकडाउन की वर्तमान स्थिति में इंटरनेट का महत्व विशेष बढ़ गया है। कम्प्युटर व स्मार्ट फोन हमारे जीवन को, सम्बन्धों को और शिक्षा को सक्रियता प्रदान करने में सफल सिद्ध हो रहें हैं।

भोगोलिक सीमाओं से आबद्ध मनुष्य जाति आज सूचना प्रोद्योगिकी और संचार प्रोद्योगिकी के विकासशील चेतना से एक सुगम व्यवस्था कि ओर अग्रसर हो रहें हैं। ये व्यवस्था सरलता सुगमता व तीव्रता के गुणों के फलस्वरूप सम्पूर्ण पृथिवी को अपने वर्चस्व में समेट रही हैं। वैज्ञानिक और प्रोद्योगिकी विकास के इस परिप्रेक्ष में पृथिवी पर प्रत्तेक मनुष्य मीलों दूर निवास करने वाले व्यक्ति से बौद्धिक संबंध स्थापित कर रहा है।

इंटरनेट सूचना तकनीकी कि सबसे आधुनिक प्रणाली है। मानव जाति की राजनैतिक, व्यापारिक, सांस्कृतिक, आर्थिक सभी गतिविधियाँ इलैक्ट्रोनिक सुविधाओं से लाभान्वित हो रही हैं। नेटवर्क के इस विशाल साम्राज्य की कोई निश्चित सीमा नहीं, कोई बंधन नहीं बस विस्तार ही विस्तार है। इंटरनेट के द्वारा प्रसारित ज्ञान व सूचनाओं का व्यापक क्षेत्र है, जो सूचनाओं के आवागमन को सरल और सुविधाजनक बनाता है।

हम अपने कम्प्युटर लैपटाप स्मार्ट फोन के द्वारा इंटरनेट के माध्यम से दुनिया के किसी भी कोने में रह कर भी सम्पूर्ण विश्व का ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं। इंटरनेट से संबद्ध कम्प्युटर को होस्ट की संज्ञा दी जाती है। इंटरनेट के महत्व के साथ-साथ इंटरनेट के आविष्कार के विषय में जानकारी प्राप्त करना आवश्यक प्रतीत होता हैं।

LOCKDOWN KE DOUR MEIN INTERNET KA ASTITVA

इंटरनेट का आविष्कार

इंटरनेट का आविष्कार 1960 के दशक में सोवियत संघ के परमाणु आक्रमण से चिंतित अमेरिकी सरकार के द्वारा हुआ इस कार्य हेतु Advance Research Project Agency की स्थापना की गई जिसमें अनेक कंपनियों, संस्थाओं व व्यक्तियों का सहयोग था। वे एक येसी व्यवस्था की संरचना करना चाहते थे जिसके माध्यम से अमेरिकी शक्ति को अधिक मजबूती मिले वह एक जगह केन्द्रित न रहे।

विकेंद्रित सत्ता वाले नेटवर्क के माध्यम से शक्ति को सर्वत्र प्रसारित करके स्वयं को सुरक्षित करने का विचार ही इंटरनेट के जन्म का कारण बना। इस नेटवर्क ने सभी कम्प्युटर शक्ति से संबन्धित सूचनाओं को संग्रहीत रखने का कार्य किया। सत्तर के दशक में अमेरिका की रक्षा उनंत अनुसंधान परियोजना एजन्सी ने अपने प्रयासों में सफलता प्राप्त की और इस नेटवर्क का प्रचार प्रसार होने लगा। यही अंतर-नेंटिग परियोजना परिष्कृत हो कर इंटरनेट के नाम से विख्यात हुई। सन 1995 में भारत में इंटरनेट का प्रारभ हुआ।

लॉकडाउन के दौर मेँ इंटरनेट का महत्व

इंटरनेट विश्व में सूचना प्रसारण का सफल माध्यम बन चुका है। हम अपने घर में रह कर भी अपने मित्रों व संबंधियों से बात कर सकते हैं, यही नहीं बल्कि वेब कैमरा का इस्तेमाल करके हम दूरस्थ लोगों के साक्षात दर्शन भी कर सकते हैं। घर मेँ रह कर ही खरीददारी भी कर सकते हैं। मीडिया व शेयर बाज़ार का निरीक्षण भी कर सकते हैं।

जिन कार्यों को करने के लिए हमें लंबी कतारों मेँ लगना पड़ता था आज हम इंटरनेट के माध्यम से घर से ही ट्रेन, प्लेन की ऑनलाइन बुकिंग करा सकते हैं। कार्य क्षेत्र मेँ भी इंटरनेट कारगर साबित हो रहा है। वीडियो कॉलिंग, कोन्फ़्रंसिंग, स्काइप व अन्य टूल्स के माध्यम से घर से ही कार्यालयों व कार्य स्थलों से बैठक करके स्वयं को क्रियाशील रख सकते हैं।

इंटरनेट की उपलब्धियों के कारण इसकी लोकप्रियता दिनों-दिन बढ़ती जा रही है। इंटरनेट का उपयोग करके हम अपने पारिवारिक व सांस्कृतिक सम्बन्धों को प्रागाढ्ता प्रदान कर सकते हैं सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुये अपने सामाजिक व पारिवारिक सम्बन्धों के अस्तित्व को स्थापित रख सकते हैं। इंटरनेट के माध्यम से घर मेँ रह कर ही हम अनेक पुस्तकों के द्वारा ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं।

वर्तमान लॉकडाउन की स्थिति में इंटरनेट का महत्व विशेष रूप से बढ़ गया हैं यहाँ तक स्कूली शिक्षा भी ऑनलाइन कराई जाने लगी। लॉकडाउन के दौर मेँ भी हमारी कार्य शीलता बनाए रखने मेँ इंटरनेट का विशेष महत्व रहा है। हमारी रफ्तार कि गति धीमी अवश्य हुई किन्तु हम रुके नहीं इसका श्रेय भी इंटरनेट को ही जाता है। हम कह सकते हैं कि लॉकडाउन के दौर इंटरनेट हमारी जिंदगी का अभिन्न अंग बन गया है, अब बिना इंटरनेट हम अपने ही कार्यों को सम्पन्न करने मेँ स्वयं को असमर्थ महसूस करते हैं।

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अनुचित उपयोग से दुष्प्रभाव

माना कि वर्तमान आवश्यकता के अनुसार संचार, सूचना, प्रसार, प्रोद्योगिकी व स्मार्ट लाइफ हमें अत्यधिक रोचक लगती है और सुविधाजनक भी। परंतु यह भी यथार्थ सत्य है कि जब हमें इनकी आदत लग जाती है तो सोने, खाने व पारिवारिक सदस्यों से बातचीत करने के बजाय अपने मोबाइल में व्यस्त रहना अधिक पसंद करते हैं।

सत्य ही कहा गया है अति सर्वत्र वर्जते” अर्थात अधिकता हर चीज की नुकसान देह होती है। आज 95% युवक अपने मोबाइल्स से नजरें हटा कर अपने आस-पास के माहौल को देखने समझने कि शक्ति ही खो चुके हैं। जो इंटरनेट पढ़ाता है वही पढ़ते हैं भले ही वह गलत, अनुचित व अनैतिक हो। आज के युवा पुस्तकों कि अपेक्षा इंटरनेट पर अधिक ध्यान केन्द्रित करते हैं अनुचित यह नहीं कि इंटरनेट के माध्यम से पढ़ाई कि जा रही या सोशल मीडिया के द्वारा कोई जानकारी प्राप्त कि जा रही, बल्कि आवश्यक यह है कि हम सही ज्ञान प्राप्त कर रहे हैं कि नहीं।

कभी-कभी भ्रामक और त्रुटिपूर्ण जानकारी प्राप्त करके हम भ्रमित हो जाते हैं। अति आवश्यकता है कि युवकों में आत्म चिंतन की भरपूर क्षमता का विकास हो। सोशल मीडिया व नेट से प्राप्त जानकारी को बिना अपनी बौद्धिक क्षमता के प्रयोग के सही मान लेना क्या तर्क संगत है? विचार कीजिये।

जहाँ एक ओर सामाजिक सम्बन्धों को प्रगाढ़ बना रहा वहीं पारिवारिक सम्बन्धों में अविश्वास की खाई भी उत्पन्न कर रहा। आज हमे अपने जीवन साथी का समय पाने के लिए उनका मोबाइल से ध्यान हटने की प्रतीक्षा करनी पड़ती है, यह स्त्री व पुरुष दोनों पर लागू होता है।

जबकि हम सभी जानते हैं की हमारे पारिवारिक सम्बन्धों की प्रगाढ़ता आपस में बातचीत करने तथा अपने एहसासों और संवेदनाओं को साझा करने से होती है। दोष किसका है? इंटरनेट य स्मार्ट फोन्स का, या हमारा जोकि इंटरनेट का त्रुटिपूर्ण उपयोग कर रहें हैं। बिना सोचे विचारे सोशल मीडिया की जानकारी पर विश्वास कर रहें हैं, और उन्हें अपने माध्यम से प्रसारित करके और लोगों को भी भ्रमित करने का कार्य कर रहे हैं, भले ही अनजाने में।

यह हमारे समाज, परिवार तथा देश के लिए हानिकारक है। आवश्यकता है जानकार बनने की सोचिए यदि अभिभावक ही मोबाइल्स को अपनी जिंदगी बना लेंगे तो बच्चे भी मोबाइल को ही अपना अभिभावक समझेंगे और उन्हीं से प्राप्त ज्ञान को ग्रहण करेंगे भले ही वह अनैतिक, अनुचित व अमान्य ही क्यूँ न हो।

उचित उपयोग आवश्यक

इंटरनेट हमारे लिए सदैव से ही सहायक सिद्ध होता आया है। आधुनिक समय में इंटरनेट का प्रभाव इतना बढ़ गया है की जहाँ हम अपने सभी कार्य घर से ही करने को बाध्य है तो येसी परिस्थिति में इंटरनेट के समान दूसरा कोई विकल्प नहीं जिसके माध्यम से हम अपने कार्यों को घर से ही पूर्ण कर सकें।

किन्तु इंटरनेट का अत्यधिक प्रयोग हमारे लिए मानसिक, शारीरिक, बौद्धिक व आर्थिक दृष्टियों से हानिकारक है। हमें इंटरनेट का प्रयोग अपनी आवश्यकता अनुसार ही करना चाहिए, जिससे इंटरनेट से संबन्धित हमारे कार्य भी सरलता से हो जाए और हम मानसिक, शारीरिक व बौद्धिक रूप से प्रभावित भी न हों। देर तक इंटरनेट का उपयोग करने से हम मानसिक तनाव से ग्रस्त हो जाते हैं।

यदि नेट की गति अत्यंत धीमी हो तो हमारा समय व मानसिक स्थिति दोनों ही प्रभावित होते हैं। अत: अपने कार्यों को करने का समय निर्धारित करना चाहिए। जिससे हमारी आर्थिक व मानसिक स्थिति भी प्रभावित नहीं होगी और समय की भी बचत होगी। फलस्वरूप परिवार के साथ समय बिताने में हम सफल हो पाएगे।

हमारी आवश्यकताए हमें अनेक संसाधनों का आदी बना देती हैं। आवश्यकताओं को आवश्यकता ही रहने दें, उन्हें जीवन का आधार न बनाए। जीवन है, तभी आवश्यकताओं का अस्तित्व है। इसलिए अपने जीवन को स्वस्थ और सुरक्षित रखना हमारी पहली ज़िम्मेदारी होनी चाहिए। इंटरनेट का उपयोग करना गलत नहीं किन्तु उसका दुरुपयोग हमारी मानसिक स्थिति, आर्थिक हानि व पारिवारिक सम्बन्धों के लिए हानिकारक है।

इंटरनेट के माध्यम से शिक्षण कार्य किया जाए किन्तु अपनी बौद्धिक क्षमता को बनाए रखें, पारिवारिक सम्बन्धों का अस्तित्व सुरक्षित रखते हुये सामाजिक सम्बन्धों को प्रगाढ़ता प्रदान करें, बच्चो को इंटरनेट से ज्ञान प्राप्त करने दें परंतु अभिभावक स्वयं ही बनें रहें, सत्यता की पुष्टि के आधार पर ही  सोशल  मीडिया से प्राप्त जानकारी पर विश्वास करें।

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