Naye Saal Par Kavita | 6 BEST नव वर्ष पर कविता, नए साल का आगमन

NAYE SAAL PAR KAVITA

नए साल पर कविता

Naye Saal Par Kavita के माध्यम से आज मैं आप सभी पाठकों को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाए देती हूँ। मैं नव वर्ष के सुअवसर पर कविताएं साझा कर रही हूँ।

उम्मीद करती हूँ कि ये कविताएं सभी लोगों के जीवन में आशा की नई किरण जाग्रत करने में सहायक सिद्ध होगीं।

नए साल का कुछ अलग ही मजा है। नई सुबह, रंगीन उमंगें, ढेरसारी खुशियाँ, अनेक तमन्नाए, नवीन सपने और रूहानी ख्वाहिशें सब नए साल के आगमन के साथ ही आ जाती हैं।

ऐसे शुभ मौके पर प्रस्तुत हैं हिन्दी की ये कविताएं हमारे मन को स्पर्श करके प्रसन्नता व नई चेतना का एहसास देती हैं।

कहते हैं कि बीता हुआ साल भले ही बीत जाता है, लेकिन प्रत्तेक गुजरे हुए साल की कुछ स्मृतियाँ हमारे मन मस्तिष्क पर ऐसी अमिट छाप छोड़ जाती हैं।

जिन्हें हम चाह कर भी भुला नहीं पाते। पिछले साल 2020 की ऐसी ही कुछ यादें हैं, जो हम सभी के दिलो दिमाग पर छाई हुई हैं।  

अप्रैल माह में हुए पूर्णत: लॉक डाउन की वह स्थिति जिसमें अपने शहर के सन्नाटे को महसूस करते हुए कुछ पंक्तियाँ जहन में कौंध गई, उन्हीं पंक्तियों को इस सफर में शामिल कर रही हूँ –

NO 1
मेरा शहर

आज मेरे शहर का कुछ, ऐसा नज़ारा दिखता है।

हर तरफ फैला हुआ सा, सन्नाटा दिखता है॥

आज तक जो न देखा, वो मंजर दिखता है।

सूख गया एक ऐसा, समंदर दिखता है॥

आज मेरे शहर का कुछ, ऐसा नज़ारा दिखता है।

प्रकृति की आह है जो, अश्कों में बहती है॥

जमी पे बिखरी पीली, चादर ये कहती है।

प्रकृति का श्रंगार क्यूँ, उजड़ा सा लगता है॥

आज मेरे शहर का कुछ, ऐसा नज़ारा दिखता है।

दूर तक फ़ैली हुई ये, धूप जो सहती है॥

तीव्र हवाओं की मार ये कहती है।

आज कुछ माहौल वीराना, सा लगता है॥

आज मेरे शहर का कुछ, ऐसा नज़ारा दिखता है।

क्या भूलें की? जो आज, हम सहते हैं॥

समझते थे खुद कों वैश्विक, आज विवशता पर रोते हैं।

आज ये अपना शहर अंजाना, सा लगता है॥

आज मेरे शहर का कुछ, ऐसा नज़ारा दिखता है।

लॉक डाउन की स्थिति का कारण क्या था? क्यूँ पूरे देश में सन्नाटा पसरा था? कारण हम सभी जानते हैं। कोरोना वायरस का आतंक और कोरोना महामारी का विस्तार जिसे हम कभी नहीं भुला पाएगें।

कलयुग की इस बीमारी के दुष्प्रभाव ने वर्ष  2020 को अपनी चपेट में पूरी तरह से ले लिया। मैं इस कलयुगी बीमारी के परिणामों पर दृष्टि डालना चाहूंगी।तो आइए अगली हिन्दी कविता पढ़ते है –

NO 2
कलयुग की महामारी

ये कैसा समय आया है,

अपनों ने दामन छुड़ाया है।

संकट की घड़ी में नज़र

न कोई आया है॥

एकाकीपन ने ऐसा घेरा

लगाया है।

दूर तक मन बस सन्नाटा

ही महसूस कर पाया है॥

बीमारी में अपनों का हाथ

जब सहलाता था।

दवाओं से ज्यादा वह

स्पर्श रंग दिखाता था॥

अब बस अकेले ही साहस

दिखाना है।

एकला ही जीवन है, बस यही

मन को समझाया है। 

कलयुग की महामारी ने

खूब कलयुगी रंग दिखाया है॥

ये कविताएं न केवल हमें बीते समय के दिनों की याद दिलाती है, बल्कि हमें मुश्किल के क्षणों में भी उम्मीद और आशा को बरकरार रखने की सीख भी देती है।

कहते है तूफान आ कर चला जाता है, लेकिन उसके निशा रह जाते हैं–

NAYE SAAL PAR KAVITA
NO 3
हालात अभी बाकी हैं

साल निकलता जा रहा हालात अभी बाकी है।

तूफान निकल गया अहसास अभी बाकी हैं॥

क्या खोया, क्या पाया हिसाब अभी बाकी है।

हर पल खुश रहने के जज़्बात अभी बाकी हैं॥

साल निकलता जा रहा हालात अभी बाकी हैं।

हर पल आँखों से वो मंजर निकलता रहा॥

हम वहीं खड़े रहे वक़्त फिसलता रहा।

वक़्त के साथ लोगों का व्यवहार बदलता रहा॥

वक़्त की पैनी धार की क्या मार अभी बाकी है?

साल निकलता जा रहा हालात अभी बाकी हैं॥

अब आज़ादी का अहसास खोता जा रहा।

घर कैद हो जीवन बदलता जा रहा॥

आत्मबल का विश्वास अभी हावी है।

इस मन में तमन्नाओं की बाढ़ अभी बाकी है॥

साल निकलता जा रहा हालात अभी बाकी हैं।

वक़्त का दरिया है, जो बहता ही जा रहा॥

चुनौतियों की लहरों को लहराता ही जा रहा।

लहरों में उम्मदों की पतवार अभी बाकी है॥

निराशा में आशा की पुकार अभी बाकी है।

साल निकलता जा रहा हालात अभी बाकी हैं॥

अब अगर बात हुई उम्मीदों की तो यकीनन हम सभी के सपने, ख्वाहिशे और मनसा अवश्य नए साल में पूरी होंगी।

नव वर्ष के आगमन का सूर्य अनेक किरणों की लालिमा से सभी के जीवन को रंगीन बनाएगा। नव वर्ष नवीन सपनों, हौसलों और जोश का साल है।

सभी का जीवन फूलों की बगिया की तरह सुगंध से सराबोर हो जाए ऐसी ही आशा के साथ प्रस्तुत है यह कविता –

NO 4
नए साल का आगमन

फूल खिलेंगे उपवन में सौन्दर्य बाहे फैलाएगा।

नए साल का आगमन कुछ नई बात लाएगा॥

बीते समय की उदासी का सूरज अस्त हो जाएगा।

नई सुबह का सूरज जब लालिमा फैलाएगा॥

तारों सी झिलमिल रातों में सपनों से दामन भर जाएगा।

हर ख्वाब में बस सुनहरा पल ही नज़र आएगा॥

फूल खिलेंगे उपवन में सौन्दर्य बाहे फैलाएगा।

नए साल का आगमन कुछ नई बात लाएगा॥

हर्षौल्लास से हर जीवन खुश हो जाएगा।

शून्यता में भी सार्थकता का रंग आएगा॥

असफलता में हौसलों का बल बढ़ जाएगा।

निराशा का भी पल आशा की किरण चमकाएगा॥

फूल खिलेंगे उपवन में सौन्दर्य बाहे फैलाएगा।

नए साल का आगमन कुछ नई बात लाएगा॥

सच साल दर साल निकलते जाते हैं, वक़्त नदी की धारा की तरह बहता जाता है, ये वक़्त है कि रेत जो रुकती ही नहीं, मुट्ठी में सिमटती ही नहीं।

सुख – दुख, रात – दिन आते जाते रहते हैं। फिर हम क्यूँ रुकें? अपनी सोच को क्यूँ रोके? क्यूँ असफल होने पर थक कर बैठे?

जरूरी है गतिशील समय के साथ नई दिशा और दशा निर्धारित करें। यकीनन हम सफलता के साथ सुकून और संतुष्टि भी पाएगें।

तो चलिये एक बार फिर प्रयास करें रेत पर लकीर बनाने का बिना किसी खौफ के कि कही लहरें आकार मिटा न दे–

NO 5
रेत पर लकीर

आज फिर रेत पर लकीर बनाना चाहती हूँ।

अश्रुओं की धार से तक़दीर बनाना चाहती हूँ॥

आज जो आँसू ढलक आँचल भिगाते जा रहे हैं।

उन आँसुओं को सशक्त सम्बल बनाना चाहती हूँ॥

आज फिर रेत पर लकीर बनाना चाहती हूँ।

धैर्य और संतोष से आगे जो बढ़ना जानता है॥

लक्ष्य से प्रेम कर सफलता पाना जानता है।

गर इरादें आसमां के फिर कदम रोकेगा कौन?

राह में आई मुश्किलों को अब कुचलना चाहती हूँ॥

आज फिर रेत पर लकीर बनाना चाहती हूँ।

असफलता में जो विचलित मन को अपने रोक पाया॥

पीड़ा के पलों में शान्त हो जो सोच पाया।

अश्रु धारा सा प्रवाह लेखनी में अपनी चाहती हूँ॥

आज फिर रेत पर लकीर बनाना चाहती हूँ।

शून्यता में भी जो सार्थकता भरना जानता है॥

राह में आई बाधाओं को काढ़ना जानता है।

तीव्रता के वेग सम जीवन में बहना चाहती हूँ॥

आज फिर रेत पर लकीर बनाना चाहती हूँ।

अश्रुओं की धार से तक़दीर बनाना चाहती हूँ॥

जहाँ पिछले साल 2020 की विषमताओं को उजागर किया गया वही नए साल के आगमन में नई चेतना व जोश के साथ जीवन की यात्रा में प्रसन्न रहने का संदेश भी दिया गया हैं।

नए साल पर कुछ संकल्पों को दोहराना चाहिए जिन्हें हम अपने जीवन की विषम परिस्थितियों में घिर कर विस्मृत कर देते हैं।

संकल्प हमें आत्मविश्वासी बनाते हैं, और हमारे विचारों को दृढ़ता प्रदान करते हैं। तो आइए नए साल के सफर का समापन कुछ संकल्पों के साथ करें –

NO 6
नव वर्ष का संकल्प

विस्मृत कर बीता साल, नया उल्लास लाएगें।

नए साल में हम नया संसार बसाएगें॥

नई होगीं उम्मीदें, नई होगी सोच।

नई दृष्टि से नया नज़ारा सजाएगें॥

विस्मृत कर बीता साल, नया उल्लास लाएगें।

आशाओं की कलियों से घर आँगन को महकाएगें॥

होसलों की बुलंदियों से आसमा को रौशन बनाएगें।

खुशियों के हर एक पल को शिद्दत से मनाएगे।

विस्मृत कर बीता साल, नया उल्लास लाएगें॥

ईश्वर पर विश्वास कर कदम आगे ले जाएगे।  

असहायों की मदद को हाथ हर क्षण बढ़ाएगे॥

लाख मुसीबत में भी अपनों का साथ निभाएगें।

विस्मृत कर बीता साल, नया उल्लास लाएगें॥

नए साल में हम नया संसार बसाएगें॥

जीवन में अक्सर हमारी सफलता के बीच असफलता आ खड़ी होती है, तब हताशा हमारे अंतर्मन को विचलित करती है।

क्या करें? कैसे करें? राह में आगे कैसे बढ़ें? अनेक प्रश्न उभरते रहते हैं। ऐसे समय में धैर्य, साहस, आशावादी व्यक्तित्व अपना कर मंजिल पाने में हम सफल हो सकते हैं।

मुश्किल जरूर है, लेकिन असम्भव नहीं। तो आइए नए साल पर कविता के संदेश के अनुसार कुछ नया जोश, हौसला और नई दृष्टि अपनाए।

आशा करती हूँ कि ये हिन्दी कविताएं आप सभी को रुचिकर लगेंगी। आप सभी पाठकों को नव वर्ष की ढेर सारी शुभकामनायें। हम सभी का जीवन नए साल में सुखमय, शांतिमय और समृद्धिशाली हो।

आप सभी स्वस्थ रहें, मस्त रहें और सुरक्षित रहें नमस्कार

27 thoughts on “Naye Saal Par Kavita | 6 BEST नव वर्ष पर कविता, नए साल का आगमन”

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