8 Best Prem Par Kavita | प्यार पर कविता, रिश्तों पर कविता

PREM PAR KAVITA

प्रेम पर कविता

Prem Par Kavita प्रेम के विस्तार को समझने का एक प्रयास है। प्रेम अलौकिक, दिव्य, प्रबल, उल्लास, सुबास और भावों की संपूर्णता है। प्रेम सर्वव्यापी, सर्वशक्तिशाली एवं सार्वभौम भाव है। अपनी कलम से कवियों ने कविताएं लिखकर प्रकृति प्रेम से लेकर राष्ट्रप्रेम, नारी सौन्दर्य से लेकर प्रेम निरूपण का मनोहारी और हृदयस्पर्शी वर्णन किया।

प्रेम को किसी सीमा में संकुचित नहीं किया जा सकता। प्रेम विस्तृत और असीम होता है। प्रेम कहने के लिए महज एक शब्द है किन्तु इसका अस्तित्व विशाल, अनंत व अकथनीय है। प्रेम में इंद्रधनुषी रंग, प्रकृति का सौन्दर्य तथा आत्मा की पुकार है।

प्रेम को अनेक अर्थों में लिया जाता है– जैसे माँ के संदर्भ में ममता, पिता के संदर्भ में स्नेह, मित्रों के प्रति अनुराग, अन्य आत्मीयजनों के प्रति लगाव, प्रेमिका के प्रति प्रीत, पति–पत्नी के बीच प्रेम, प्रकृति के सौन्दर्य के प्रति आकर्षण तथा जीवन में सफलता पाने की चाहत।

प्रेमपरक कविताओं की रचना करके मैं प्रेम के अनेक रूपों को साझा करने का प्रयास कर रही हूँ। तो आइए आज हिन्दी कविता के माध्यम से प्रेम के व्यापक स्वरूप, अनगिनत अर्थ और रिश्तों के मायनों को जाने समझे।

जीवन में प्रथम प्रेम का एहसास माँ का गर्भ ही होता है। माँ के गर्भ में ही एक नवीन और अनोखी आकृति का सृजन होता है। आत्मा मिलती है, सासें मिलती हैं, माँ की गोद, माँ का आँचल और अथाह ममता जिसका कोई मोल नहीं। जीवन में पहला प्रेम का रिश्ता माँ की ममता ही होता है। तो प्रस्तुत है मेरी पहली कविता जीवन के अनमोल रिश्ते के नाम शीर्षक है– ‘माँ’

रिश्तों पर कविता

NO 1

माँ

रोते हैं तो हसा देती है।

दुनियाँ की नज़र से हमें बचा लेती है॥

धूप लगे तो अपने आँचल की छाया देती है।

भूख लगे तो अपने हिस्से का खाना भी देती है॥

इक माँ ही है जो हर तकलीफ में

हमें महफूज रखती है।

जब ठोकर लगे तो हमें थाम लेती है॥

जब बेचैन होते है तो हमें पुकार लेती हैं।

हर पल अपनी मौजूदगी का एहसास देती है॥

इक माँ ही है जो हर पल

हर क्षण हमारे साथ रहती है।

जिसने हर इक लम्हा हमारे लिए बिताया॥

हमें सिर उठा कर दुनियाँ में जीना सिखाया।

जिसने हमें अपनी कोख में जगह दी॥

अपने दिल में जगह दी।

दुनिया के अस्तित्व में स्थान दिलाया॥

इक माँ ही है जिसने अपनी

पहचान को हमारी पहचान बनाया॥

जिसकी भावनाओं में, जिसके अहसासों में,

जिसकी सासों में हमने अपना ही नाम पाया।

जिसने अपने मन की गहराइयों

में हमें सुरक्षित छिपाया॥

जिसने अपनी ममता के बदले कुछ भी न चाहा।

आज माँ बनकर उन्हीं अहसासों

को हमने है पाया॥

माँ का आँचल अगर शीतल छाया है, तो पिता का साथ सर्वोतम मार्गदर्शन। पिता का प्रेम जो बचपन में उंगली पकड़ कर चलना सिखाता है वही बड़े होने पर कंधे से कंधा मिला कर चलना। जिंदगी के सफर के मुश्किल पलों में यदि हम अडिग खड़े रहते है तो वो पिता की सीख का ही प्रतिफल होता है। अगर माँ हमारे लिए ममता का रूप है, तो पिता आदर्श स्वरूप ।

PREM PAR KAVITA

NO 2

पिता

हर पल साथ निभाने वाला,

उँगली पकड़ चलाने वाला।

कंधे पर बैठाने वाला,

सुखद सैर कराने वाला॥

जीवन के हर मोड़ पर,

हरदम साथ निभाने वाला।

कान पकड़ डपटाने वाला,

पास बिठा समझाने वाला॥

ऐसा प्यार कहीं नहीं जो,

वरद हस्त बन जाने वाला।

कैसे बतलाए सहस्त्र गुण,

तप्त धूप में शीतल छाव,

बन सहलाने वाला॥

कोई नहीं है इस दुनियाँ में,

पिता तुल्य बतलाने वाला॥

प्रेम का एक और अद्भुत, अनोखा रूप हमारे जीवन में अकस्मात ही अपनी अनमोल जगह बना लेता है। जानते हैं कौन सा रिश्ता? जी सही कहा दोस्ती का रिश्ता और दोस्तों का अनुराग। घर से बाहर निकलते ही प्री स्कूल से लेकर कॉलेज तक वो दोस्तो का साथ, मौज – मस्ती जिंदगी में फिर कभी नहीं मिलती।

दोस्ती एक प्यारा रिश्ता, एक एहसास, अनुराग, अनुभव और भावनाओं का पिटारा होती है। दोस्तों का साथ बचपन से लेकर जीवन की हर उम्र में एक खट्टे मीठे अहसास की तरह हमें संवारता है। हर किसी की जिंदगी में ऐसे सच्चे दोस्त अवश्य मिलते हैं, जो ताउम्र याद रहते हैं और दूर होकर भी पास होते हैं। इस सफर में दोस्ती के इसी मज़ेदार सफ़र को याद दिलाती हुई मेरी अगली कविता प्रस्तुत है

NO 3

दोस्ती

जिंदगी आगे निकाल जाती है,

दोस्त पीछे छूट जाते हैं।

जब फुर्सत में सोचती हूँ उन दिनों को,

सच कहूँ तो आँखों में नई चमक

सी आ जाती है॥

किसी का रूठना, किसी का मनाना,

किसी का छिटक कर दूर चले जाना।

फिर किसी की कमी का अहसास होना,

और तब दोस्तों को गले लगाना॥

सब अहसासों में अच्छा अहसास होता है।

उस वक़्त दोस्तों का आना

जिंदगी में खास होता है॥

कभी बुढ़िया के बाल चाव से खाना।

कभी सौफटी पर दिल का आना॥

कभी दोस्तों का टिफिन छीन के खाना।

और कभी अपना भी खाना उन्हें खिला आना॥

जिंदगी की अच्छी सौगात होती है।

अरे जी ये दोस्ती है,

जो जिंदगी में खास होती है॥

कभी भीगते हुये स्कूल जाना।

छम – छम करके बारिश के गीत गुनगुनाना॥

फिर भीगे हुये बस्ते धूप में सुखाना।

बस वही पल तो खास होता है॥

बचपन का सुखद अहसास होता है।

फिर उम्र की दहलीज़ में और आगे बढ़ना॥

दोस्तों के साथ को नज़दीक से समझना।

लाख मुश्किलों में किन्हीं दोस्तो

को ही पास में पाना॥

बस तभी तो सच्चे दोस्त की पहचान होती है।

जो दोस्ती की सच्ची मिसाल होती है॥

वक़्त कितना भी गुज़र जाता है।

जिंदगी कितनी ही आगे निकल जाती है॥

पर जब भी महफिल में बात चलती है।

दोस्तों की दोस्ती ही याद आती ही॥

प्रेम के चमत्कारी रूप से परिपूर्ण रिश्ता प्रेमी प्रेमिका की प्रीत। अनेक कवियों ने अपनी कविताओं में प्रेम निरूपण के भावों को उजागर किया। प्रीत शब्द का चर्चा हो और राधा कृष्ण का स्मरण न आए ऐसा तो संभव ही नहीं। पवित्र रिश्ता, अमर प्रीत व एकनिष्ठ प्रेम की मिसाल श्रीक़ृष्ण सम्पूर्ण सृष्टि में व्याप्त हैं। एक मुरली, एक मधुर तान और अनेकों हृदयों पर राज। इतना सरस तथा मनमोहक था श्रीक़ृष्ण का व्यक्तित्व।

अवश्य ही श्रीक़ृष्ण राधा रानी से ही प्रेम करते थे किन्तु वे उनसे सच्ची प्रीत करने वाली गोपियों को भी निराश नहीं करते थे। यमुना के तट पर आलौकिक रूप धारण करके एक ही समय में राधा साथ सभी गोपियों के संग रासलीला करके अनेकों हृदयों को तृप्त करते थे। इतना निश्छल प्रेम की कोई भेद भाव नहीं बस जिसके मन में मोहन उसके संग मोहन।

ईश्वर की सच्ची भक्ति ही उनके प्रति प्रेम भाव है। अपने भक्तों से ईश्वर ऐसी ही भक्ति की इच्छा रखते हैं। मनमोहन के अद्भुत स्वरूप को उजागर करने वाली कुछ काव्य पंक्तियाँ प्रस्तुत हैं–

NO 4

मोहन

मोहनी मूरत सावरी सूरत,

तू ही आस विश्वास।

तू ही विराजा हर रूप में,

लेकर विष्णु अवतार॥

कभी सौम्य सूरत लिए, कभी नटखट स्वरूप।

कभी अयोध्या धाम में,

तो कभी गोकुल देश॥

कभी धनुष पर प्रत्यंचा,

तो कभी मधुर तान।

हर गोपी के दिल में बसे, तुम लेकर प्रेम अपार॥

कभी मीरा के मनमोहन,

तो कभी राधा के नंदलाल।

तुम ही हो मोहन सृष्टि में,

पवित्र प्रेम की मिसाल।

हर मन बसे मोहन तुम, लेकर आकृति महान॥

जीवन की मंजिल, स्थिरता, भटकाव से मुक्ति, एक प्रेममय बंधन और अनेक रिश्तों का संगम यही है, विवाह का अर्थ। जी हाँ मेरी अगली कविता सच्चे प्रेम की अनुभूति, लगाव, फिक्र, आत्मीयता, संतुष्टि और संपूर्णता को समाहित किए हुए जीवन साथी के रिश्ते में छिपे प्रेम पर आधारित है। इस रिश्ते के प्रेम में आकर्षण नहीं समर्पण आवश्यक होता है –

NO 5

मेरी सासों में हो हर पल

मेरी सासों में हो हर पल, मेरी बातों में हो हर पल।

नज़र आते नहीं हो तुम, मगर पलकों में हो हर पल॥

जरा पलके उठाती हूँ, तो आँसू ढल ही जाते हैं।

हर एक आँसू की बूंदों में, छिपे सीपी में मोती ज्यों॥

मेरी सासों में हो हर पल, मेरी बातों में हो हर पल।

जिंदगी की राहों में चले साथी की तरह हम।

कदम उठते रहे हर क्षण, सफर कटता रहा हर पल॥

मिली मंजिल लगा यूँ ख्वाब पूरा हो गया अपना।

हर एक रातों के ख्वाबों में छिपे मंजिल की तरह तुम॥

मेरी सासों में हो हर पल, मेरी बातों में हो हर पल।

 हर पल साथ निभाना तुम, कभी न भूल जाना तुम।

चमकती शाम सी हो हर सुबह, यूँ मुसकुराना तुम॥

खिली मैं भी खिले ज्यों सूर्य का, मुख देख कर कलियाँ।

हर एक सुबह की किरणों में, छिपे लाली की तरह तुम॥

मेरी सासों में हो हर पल, मेरी बातों में हो हर पल।

नज़र आते नहीं हो तुम, मगर पलकों में हो हर पल॥

 प्रकृति का सौन्दर्य आकर्षण और सानिध्य प्रकृति के प्रति मानव मन में प्रेम का अहसास है। प्रकृति सदैव से ही मानव के मन पर राज़ करती आई है। बचपन में बारिश की फुहारों के पड़ते ही तन – मन प्रसन्न हो उठता था। बारिश के ठहरे पानी में नाव चलाना, छम-छम करके बारिश के गीत गुनगुनाना, सावन के झूलों का आनंद वाह वो प्रकृति के साथ की हुई मौज – मस्ती हम आज तक नहीं भूल पाये हैं।

वर्तमान विषम जीवन की परिस्थितियों में उलझ कर हम प्रकृति के सौन्दर्य में रोमांच और शांति महसूस नहीं कर पाते। जबकि प्रकृति सदैव से ही हमारी सहचरी रही है जो अपने आकर्षण से हमारे चित्त को प्रसन्न करके अपने सानिध्य में सुकून की अनुभूति प्रदान करती है–

PREM PAR KAVITA

NO 6

अजब वो दिन थे

अजब वो दिन थे,

जब बारिश की बूँदें झर झर के गिरा करतीं थीं।

आसमा से गिर कर धरा की

प्यास बुझाया करतीं थीं॥

हरी भरी फसल लहलहाया करती थी।

मन मयूर नाचा करते थे॥

मिट्टी की सौंधी खुशबू दिल को

छू जाया करती थी।

अजब वो दिन थे,

जब बारिश के गीत गुनगुनाया करते थे॥

सावन के झूले झूम – झूम के

बुलाया करते थे।

बारिश की फुहारों में तन – मन

महकाया करते थे॥

अजब वो दिन थे,

जब बारिश के ठहरे पानी में नाव चलाया करते थे।

अब तो बस जिंदगी की उलझनें सुलझाया करते॥

प्रकृति के प्रति मानव का प्रेम अनादिकाल से रहा है। यदि हम प्रकृति का साथ दे उसकी सुरक्षा करें तो प्रकृति जैसा प्रेम हमें और कहीं नहीं प्राप्त हो सकता। यह तो प्रकृति और मानव का संबंध है, किन्तु प्रकृति का प्रकृति से भी अत्यंत हृदयस्पर्शी प्रेम होता है। जैसे सूर्य से प्रात: काल का प्रेम। सूर्य की प्रथम किरण के साथ ही सम्पूर्ण सृष्टि प्रकाशित और प्रफुल्लित हो जाती है-

NO 7
सूर्य की लालिमा

ये कैसी छटा छाई है,

सूरज ने रौशनी फैलाई है।

पंक्षियों ने सरगम छेड़ा है,

दूर हुआ निशा का अंधेरा है॥

हर एक क्यारी महकी है,

हर एक चिड़ियाँ चहकी है।

हर दिशा में रौनक छाई है,

हर मन की कली मुस्काई है॥

ऊषा की बेला ढल आई है,

भोर ने किरणें चमकाई हैं।

ये सूर्य की लालिमा का खेल है॥

प्रकृति का उससे अनादिकाल से प्रेम है॥

सफलता की चाहत, तरक्की की ऊँचाइयाँ सभी को रास आती हैं। क्या आप जानते हैं सफलता प्राप्ति का साधन क्या है? सफलता का सबसे पहला सोपान है, लक्ष्य एवं उद्देश्य का निर्धारण। दूसरा सोपान है, लक्ष्य से प्रेम तथा तीसरा सोपान है, लक्ष्य की प्राप्ति हेतु कर्म। बस फिर समझिए सफलता निश्चित।

NO 8
लक्ष्य

न जाने आज मैं किस राह पर चल रही हूँ।

मंजिल नहीं पता रास्ते बदल रही हूँ॥

कब मिले एक लक्ष्य बस यही सोच रही हूँ।

बिन लक्ष्य कदमों को थकाते चल रही हूँ॥

प्रेम है गर सफलता से तो लक्ष्य पाना चाहती हूँ।

आज में जीवन को एक रास्ता दिखाना चाहती हूँ॥

हो गया भटकाव अब उद्देश्य दृढ़ चाहती हूँ॥

इरादों को उन ऊंचाइयों तक पहुँचाना चाहती हूँ।

लक्ष्य से प्रेम कर मंजिल को पाना चाहती हूँ॥

हम बिना उद्देश्य के व्यर्थ प्रयासों के कारण जीवन पथ पर चलते चलते थक कर हार मान लेते हैं। उस समय निराशा और हताशा हमारी सफलता की राह को रोकने का कार्य करती हैं। आवश्यक है की अपने जीवन में लक्ष्य निश्चित करें और उसी राह की ओर अपने कदमों को बढ़ाएं।

वर्तमान समय में रिश्तों की अहमियत और मायने बदलते जा रहे हैं। स्वार्थ, अहंकार, लोभ, असंतुष्टि व वैश्वीकरण की दौड़ मानव को मानव से अलग कर रही है। क्या आप जानते हैं की ईश्वर ने हमें इतने रिश्ते क्यूँ दिए। जी हाँ ताकि हम प्रेम का प्रसार कर सकें। प्रेमभाव से ही ईश्वर को प्राप्त किया जा सकता है। प्रेमभाव को मन में समाहित करके जीवन में आत्मिक सुख, सुकून, शांति, संतुष्टि और प्रगाढ़ता लाई जा सकती है। प्रस्तुत कविता का उद्देश्य रिश्तों में छिपे अनमोल प्रेम के खजाने को पहचानना और उस सुख को महसूस करना है। तो आइए अपने रिश्तों को प्रेम की सौगात दें।

237 thoughts on “8 Best Prem Par Kavita | प्यार पर कविता, रिश्तों पर कविता”

  1. I am going to go ahead and bookmark this article for my brother for a research project for class. This is a beautiful blog by the way. Where do you get the theme for this website?

  2. Its in truth a great post. I am sure that anyone would like to visit it again and again. After reading this post I got some very unique information which are in fact very helpful for anyone. This is a post owning some crucial information. I wish that in future such posting should go on.

  3. Hi there, MegaCool blog mate, I really loved this page. I’ll be sure to talk about this to my cousin who would, odds are, love to check out this post too. Found this sites post through the Bing search engine by the way, incase you were curious. Many thanks for the wonderful read!

  4. Kinky Stepdaughter and Howife roles: meet me at OnlyFans!

    हाय दोस्तों!
    मैं इटली से मौली हूं ।
    मेरे सौतेले पिता के बहकावे के बारे में कुछ वीडियो बनाना चाहते हैं ।
    और मेरी हॉटवाइफ भूमिका के बारे में: एफ * अन्य पुरुषों के साथ सीकिंग जब मेरे पति को इसके बारे में पता चलता है ।

    मैं 24 साल का हूं, सुंदर स्पोर्टी बॉडी, बड़े स्तन, बड़े बट और प्राकृतिक स्वादिष्ट होंठ हैं 🙂
    मेरी प्रोफ़ाइल की सदस्यता लें, मेरे साथ बात करें, वीडियो कहानियों के लिए अपने विचार भेजें!

    मैं अपने सिर में बिना किसी सीमा के खुले दिमाग वाली महिला हूं))) असामान्य चीजें बनाना पसंद करती हूं ।

    देखें में आप OnlyFans! गुड लक!
    https://onlyfans.com/sexymolly2021

  5. Yo, simply changed into alert to your post via Yahoo, and found that its truly informative. I’m gonna watch out for brussels. I’ll appreciate when you continue this in future. Lots of other people might be benefited out of your writing. Thankx

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *