Prerna Aur Abhiprerna | 2 Best Inspiration And Motivation, अर्थ और अंतर

PRERNA AUR ABHIPRERNA
Prerna Aur Abhiprerna

Prerna Aur Abhiprerna क्या है? प्रेरणा और अभिप्रेरणा कार्यों में प्रवृत करने की क्रिया है। हमारी सफलता के सोपानों में से एक है। प्रेरणा और अभिप्रेरणा एक ऊर्जा है जो हमारे व्यवहारों और कार्यों के लिए दिशा निर्धारित करती है।

हम लोग अक्सर इन दोनों को एक ही अर्थ में लेते हैं, जबकि दोनों में पर्याप्त अन्तर होता है। प्रस्तुत लेख में मैं प्रेरणा और अभिप्रेरणा का अर्थ तथा दोनों में क्या अन्तर है और हमारे जीवन में इन दोनों का क्या महत्व है? इन विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत करने का सफल प्रयास करूँगी।

सर्वप्रथम प्रेरणा और अभिप्रेरणा का अर्थ समझना आवश्यक है। तो आइए प्रस्तुत लेख के माध्यम से प्रेरणा और अभिप्रेरणा के स्वरूप का अध्ययन करें।

प्रेरणा को अँग्रेजी में Inspiration तथा अभिप्रेरणा को Motivation कहते हैं। सरल शब्दों में प्रेरणा हमारे आंतरिक उत्साह, विश्वास और क्रियाओं के प्रति हमें उत्तेजित करतीं हैं। अभिप्रेरणा वह स्थिति है जो किसी अन्य व्यक्ति के द्वारा हमें क्रियाओं के प्रति उत्तेजित होनें के लिए प्रोत्साहित करतीं हैं।

PRERNA AUR ABHIPRERNA

अभिप्रेरणा का अर्थ

अभिप्रेरणा अँग्रेजी शब्द मोटिवेशन(Motivation) का हिन्दी रूपान्तरण है। इस शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के मोटम’ (Motum) से हुई है, जिसका अर्थ मूव (Move) या इन्साइड टू एक्शन (Insight to action) हिन्दी में कह सकते हैं, गति या हलचल होना होता है।

अर्थात व्यक्ति के अंदर एक ऐसी भावना, विचार व शक्ति का विद्यमान हो जाना जिससे प्रेरित होकर वह उस कार्य को करके लक्ष्य को पाने का निश्चय करे। अभिप्रेरणा एक ऐसी मनोवैज्ञानिक क्रिया है जो किसी भी व्यक्ति के अंदर उत्पन्न की जा सकती है।

किसी भी व्यक्ति के अभिप्रेरित (Motivate) भाषण को सुनकर, लेख को पढ़ कर, कविता को सुनकर या पढ़ कर जो क्रियाओं के प्रति उत्साह, उमंग व निश्चय की भावना उत्पन्न होती है वही अभिप्रेरणा है।

व्यक्ति के मन में जो इच्छाएं, अभिलाषाएं, आवश्यकताएँ व ख्वाहिशें होती हैं, जब उन्हें पूर्ण करने की अभिप्रेरणा प्राप्त होती है तब व्यक्ति स्वयं को अभिप्रेरित (Motivate) करता है और लक्ष्य प्राप्ति की इच्छा जाग्रत करता है।

अभिप्रेरणा एक निरंतर चलने वाली क्रिया है, क्योकि हमारी आवश्यकताएँ कभी समाप्त नहीं होतीं। हमारें मन में निरंतर इच्छाएं उत्पन्न होती रहती हैं। हम भविष्य के सपने बुनते रहते और पूरा करने की ख़्वाहिश रखते हैं। अत: जब भी हमें अपने सपनों को पूरा करने के रास्ते कोई दिखाता है तो हम उस रास्ते पर चलने को प्रेरित हो जाते हैं।

अभिप्रेरणा मानवीय साधनों और मानवीय आवश्यकताओं से संबन्धित है। अभिप्रेरणा मानवीय साधनों से उत्पन्न होती है अर्थात एक व्यक्ति ही दूसरे व्यक्ति के लिए अभिप्रेरणा का स्रोत बनता है तथा मानवीय आवश्यकताओं के कारण ही व्यक्ति सरलता से दूसरे व्यक्ति के द्वारा अभिप्रेरित (Motivate) हो जाता है।

प्रेरणा का अर्थ

आइए अब बात करते हैं, प्रेरणा शब्द की उत्पत्ति कैसे हुई। प्रेरणा अँग्रेजी के Inspiration शब्द से जाना जाता है। Inspiration शब्द In + aspiration से बना है। In का अर्थ होता है, अंदर Aspiration का अर्थ है, आकांक्षा। अत: Inspiration शब्द अन्त: + आकांक्षा शब्दों से बना है।

अर्थात व्यक्ति के अन्त: में आने वाला शानदार विचार जिसके फलस्वरूप व्यक्ति कार्य करने को प्रेरित होता है। इसे ही प्रेरणा कहते हैं। प्रेरणा के अन्य नाम जैसे– आकस्मिकोद्भव, अन्त: प्रेरणा, ईश्वर की प्रेरणा, दिल में आने वाला विचार, अंत: ज्ञान आदि हैं।

प्रेरणा एक रहस्यात्मक व मनोवैज्ञानिक अनुभूति होती है। व्यक्ति के मन की इच्छा आकांक्षा को पूर्ण करने के लिए जब उसे अभिप्रेरणा प्राप्त होती है तब वह अपने अंत: प्रेरणा को जाग्रत करता है और लक्ष्य प्राप्ति के लिए प्रेरित होकर क्रिया करता है। प्रेरणा हमारे कार्यों तथा विचारों को गति प्रदान करती है।

प्रेरणा स्थायी क्रिया है। यदि एक बार हम किसी कार्य को करने और लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अंत: करण से प्रेरित हो गए, तो हमारे विचार दृढ़ हो जाते हैं। हम पीछे मुड़ कर नहीं देखते बस आगे ही आगे अग्रसर होते जाते अडचने आने पर भी अपने लक्ष्य को पाना हमारा प्रमुख उद्देश्य बन जाता है, क्योकि हम स्वयं से उस कार्य को करने के लिए प्रेरित हुये हैं। अब हम प्रेरणा और अभिप्रेरणा के अंतर को समझने का प्रयास करेंगे।

प्रेरणा (Inspiration) और अभिप्रेरणा (Motivation) में अंतर

सामान्य शब्दों में अभिप्रेरणा (Motivation) अस्थाई क्रिया है और प्रेरणा (Inspiration) स्थायी क्रिया है। अभिप्रेरणा माध्यम है लक्ष्य प्राप्ति का और प्रेरणा लक्ष्य प्राप्ति में सफलता दिलाती है।

उदाहरण के लिए यदि हमने अभिप्रेरणा के लिए किसी के भाषण को सुना। सुनते ही अभिप्रेरित हो गए, लेकिन वह क्षणिक हुआ जब तक उस भाषण के शब्द हमारे कानों में गूँजते रहे हमारा मन मस्तिष्क उससे प्रभावित रहा। कुछ समय बाद उस अभिप्रेरणा से उत्पन्न विचार समाप्त हो गए। फिर क्या करें भाषण को दोबारा सुने? और परिणाम फिर भूल जाएँ।

प्रश्न यह उठता है की अभिप्रेरित (Motivate) होने के बाद स्वयं को निरंतर प्रेरित (Inspired) कैसे कर सकते हैं? मेरे विचारों से अंत: प्रेरित होने के लिए हमें अभिप्रेरणा संबंधी लेख व भाषण सिर्फ पढ़ने व सुनने की नहीं बल्कि समझने की आवश्यकता है। अभिप्रेरित होने के साथ साथ विचारों को समझना और आत्मसात करना आवश्यक है।

आप स्वयं विचार कीजिये हम जब तक किसी खेल को पूर्णत: समझ नहीं पाते तब तक हमें उस खेल को खेलने में आनंद नहीं मिलता। किन्तु जब हम उस खेल को समझ लेते हैं तो हमें  इतना आनंद मिलता है कि हम उसे बार बार खेलना चाहते हैं। किसी अन्य को हमें खेलने के लिए कहना नहीं पड़ता क्योंकि हम स्वयं उसे खेलने के लिए प्रेरित होते हैं। बस यही है अंत: प्रेरणा (Inspiration)

बिलकुल इसी तरह हमें अपने कार्यों, लक्ष्यों, आवश्यकताओं, उम्मीदों को पूरा करने के लिए अंत: प्रेरणा को समझने और अंत: ज्ञान को जाग्रत करने की आवश्यकता हैं, क्योकि अभिप्रेरणा अस्थाई है। जब हम उससे ज्ञान प्राप्त कर अभिप्रेरित होकर अपने अंत: प्रेरणा को जाग्रत करते हैं और प्रेरित (Inspired) होकर क्रिया शील हो जाते है तब वह अस्थाई नहीं रहता वह लंबे समय तक जीवन में हमें कुछ अच्छा करने व आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है।

तब आप स्वयं महसूस करेंगे कि हमें किसी अन्य व्यक्ति के द्वारा प्रेरित होने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी क्योंकि हम अपने अंत: शक्ति, अंत: ज्ञान व अंत: प्रेरणा से प्रेरित (Inspired) है फिर वाह्य शक्ति या अभिप्रेरणा की आवश्यकता ही नहीं।

प्रेरित रहने के लिए अभिप्रेरणा को आदत बनाए

अभिप्रेरणा को समझने के साथ साथ हमें उसे अपनी आदत में सम्मिलित करना चाहिए, क्योंकि आदत दीर्घकालिक होती हैं। अगर आप के साथ भी कई बार ऐसा हुआ है कि किसी व्यक्ति या अन्य माध्यमों से अभिप्रेरित होने के बाद कुछ ही दिनों में आप अपनी अभिप्रेरणा को विस्मृत कर पुरानी सोच में वापस लौट आते है तो इसका कारण है कि आपने उस अभिप्रेरणा को अपनी आदत नहीं बनाई और अभिप्रेरणा अस्थाई होने के कारण समाप्त हो गई।

इस समस्या के समाधान के लिए अतिआवश्यक है कि जो अभिप्रेरणा आपने प्राप्त कि उसे अपनी आदत (Habit) में सम्मलित कर लीजिये। उदाहरण के लिए यदि कोई हमें सुबह की सैर पर जाने के लिए अभिप्रेरित करे तो हम यह सोच कर की सुबह की सैर स्वास्थ्य के लिए अच्छी होती है इसलिए एक-दो दिन जाएगे और फिर अभिप्रेरणा समाप्त होते ही वापस पहले वाली दिनचर्या में।

आप स्वयं देखेंगे कि यदि हम अंत: प्रेरणा से प्रेरित होकर सुबह की सैर को अपनी आदत बना लेंगे तो प्रति दिन बिना किसी के कहे हम सुबह की सैर का आनंद लेने जरूर जाएंगे। क्योंकि जब कोई अभिप्रेरणा हमारी आदत में शामिल हो जाती है तो हमें उसके लिए अधिक प्रयास नहीं करने पड़ते हम प्रति दिन की दिनचर्या में उसे करने लगते है और वही हमारी उस कार्य में सफलता का कारण बनता है।

उम्मीद करती हूँ की प्रस्तुत पोस्ट के माध्यम से आप सभी पाठकों को स्पष्ट हो गया होगा कि प्रेरणा और अभिप्रेरणा में व्यापक अंतर है और हमें स्वयं को केवल अभिप्रेरित (Motivate) नहीं करना है बल्कि अंत: प्रेरणा को जाग्रत करके स्वयं को प्रेरित (Inspired) करना है तभी हम अपने कार्यों में पूरी लगन, आस्था, विश्वास, इच्छाशक्ति के साथ संलग्न होकर अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकेंगे।

मैं अपने अगले पोस्ट में स्वरचित कुछ कवितायें साझा करूंगी शायद मेरी कवितायें अभिप्रेरणा के उदाहरण प्रस्तुत कर सकें और आप सभी पाठकों के लिए प्रेरणाप्रद साबित हो सकें। तो मिलते है अगले पोस्ट में उम्मीदों और प्रेरणा से परिपूर्ण काव्य पंक्तियों के साथ।

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