7 Best Ramayan ke Kand Aur kathayen | राम नाम का अर्थ और वर्तमान जीवन में आवश्यकता

Ramayan ke Kand Aur kathayen

रामायण के 7 काण्ड और संबंधित कथाएं

Ramayan ke Kand Aur kathayen विषय के माध्यम से आज हम रामायण ग्रंथ में वर्णित समस्त कथाओं का अध्ययन करेंगें। प्रस्तुत विषय प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी अत्यंत उपयोगी है। रामायण एक महाकाव्य है। इसकी रचना भिन्न-भिन्न कालों में अनेक भाषाओं में विद्वानों द्वारा की गई, लेकिन सर्वाधिक प्रामाणिक व प्रचलित रामायण के रचनाकार महर्षि वाल्मीकि है।

वाल्मीकि ने संस्कृत भाषा में लगभग 600 ईसा पूर्व एक महाकाव्य की रचना की थी। इन्होंने रामायण की रचना संस्कृत में की। इस ग्रंथ में 24,000 श्लोक, 500 सर्ग तथा 7 काण्ड हैं। इसे वाल्मीकि रामायण भी कहते हैं। रामायण के काण्ड और कथाएं प्रस्तुत धार्मिक ग्रंथ की महत्ता का जीवंत प्रमाण उपस्थित करते हैं। 

वाल्मीकि रामायण महाकाव्य की रचना के बाद रामायण को ‘आदिकाव्य’ और महर्षि वाल्मीकि को ‘आदिकवि’ के नाम से जाना गया। आदिकवि शब्द आदि और कवि दो शब्दों के मेल से बना है। आदि का अर्थ ‘प्रथम’ और कवि का अर्थ ‘काव्य का रचयिता’ होता है। दूसरा प्रचलित ग्रंथ है रामचरित मानस, जो सोलहवीं शताब्दी में तुलसीदास द्वारा रचा गया। यह रामायण को आधार मान कर अवधी भाषा में लिखा गया।

राम के व्यक्तित्व में आदर्श नायक के सभी गुण विद्यमान हैं। राम के व्यक्तित्व के साथ साथ राम नाम का अर्थ भी अत्यधिक शुभ, व्यापक और आदर्श है। रामायण जैसे धार्मिक, सांस्कृतिक, पारिवारिक, सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण ग्रंथ की वर्तमान जीवन में आवश्यकता व प्रासंगिकता अविस्मरणीय है।

रामायण में समाहित अनमोल उपदेश सदैव मानव जाति का पथ प्रदर्शन करते हुए धर्म की उचित व्याख्या का ज्ञान प्रदान करते हैं। आवश्यकता हैं, पठन-पाठन व स्वाध्याय करने की। चिंतन मनन तथा आत्मामंथन के उद्देश्य से ही आज मैं प्रस्तुत पोस्ट में रामायण के काण्ड और उनसे जुड़ी महत्वपूर्ण कथाओं का वर्णन कर रही हूँ। तो चलिए रामायण के काण्ड और कथाओं के वर्णन से पूर्व राम नाम के अर्थ का ज्ञान प्राप्त करें जिसके स्मरण मात्र से मानव दुखों से मुक्ति पा सकता है।

राम नाम का अर्थ

रामायण में समाहित ज्ञान हमें ज्ञानवान, शीलवान तथा धार्मिक मानवीय मूल्यों से युक्त सभ्यता और संस्कृति को प्रदर्शित करता है। जिस महाकाव्य का नायक सर्व गुण सम्पन्न है, जिसका नाम ही उसके समस्त गुणों का परिचायक है, ऐसा महाकाव्य कोई साधारण रचना नही बल्कि पवित्र धार्मिक ग्रंथ, ज्ञान का भंडार, अमृत वाणी, मधुर सुरों से सुसज्जित संगीत एवं अंत:करण को प्रसन्नचित करने वाला साधन ही हो सकता है।

भगवान राम का नाम मर्यादा पुरुषोत्तम, शीलवान, संयमित, संस्कारिक आदि गुणों की खान है। राम नाम का स्मरण करने से मानव भवसागर से भी पार हो सकता है। राम एक नाम नही बल्कि मंत्र है। जिसके विश्वास पूर्ण जप से मनुष्य के दुखों का अंत हो जाता है और आत्मिक सुख की प्राप्ति होती है। राम नाम परम शांति, सद्गति तथा समस्त सुखों की राशि है।

राम नाम का अर्थ है- मनोहारी, विलक्षण गुणों से युक्त, अलंकृत, चमत्कृत, दुष्टों का संहार करने वाला, समस्त दुखों का नाश करने वाला, मझधार से पार लगाने वाला है, इसीलिए राम नाम के मंत्र का जप करना शुभकारी, कल्याणकारी व शांतिप्रदायक है। रामचरित मानस में तुलसीदास ने अवधी भाषा में राम नाम के महत्व को उजागर करते हुए कहा-

नहिं कलि करम न भगति बिबेकू।

राम नाम अवलंबन एकू॥

अर्थात् कलयुग में ना तो कर्म का सहारा है ना ही भक्ति व ज्ञान का। मात्र राम नाम ही एक अवलंब है, जिससे स्वयं का कल्याण किया जा सकता है। राम नाम का स्मरण ही हमारे व्यक्तित्व में निखार और चरित्र में पवित्रता का समावेश करने में सक्षम है। राम नाम का जाप करने से मन, प्राण और अंत: करण शांति का अनुभव करता है और अनजाने भय से मुक्ति प्राप्त करता है।

रामायण के काण्ड और संबंधित कथाएं

रामायण एक ऐसा दिव्य धार्मिक ग्रंथ है जिसे अनेक भाषाओं में लिखा गया। यह ग्रंथ बुराई पर अच्छाई की जीत, असत्य पर सत्य की विजय, सद्गति से बुरी संगति के पतन का संदेश प्रदान करता है। इस धार्मिक ग्रंथ के प्रत्तेक पात्र व कथाएं मानव जीवन के समस्त पहलुओं से संबंधित हैं, जो सत्य व उचित राह पर चलने की सीख देती हैं।

रामायण के काण्ड और कथाओं में ज्ञान का अथाह सागर है, जिसे अपनी लेखनी के माध्यम से वर्णित करना संभव ही नहीं, बस रामायण की शिक्षाप्रद कथाओं को अंत:करण में समाहित करके उनके उपदेशों को आत्मसात किया जा सकता है। तो आइए अब हम रामायण के काण्ड और उनमें वर्णित कथाओं का संक्षेप में अध्ययन करें।

बालकाण्ड 1

बालकाण्ड में 77 सर्ग हैं। बालकाण्ड रामायण महाकाव्य का प्रथम काण्ड है। बालकाण्ड में श्रीराम चंद्र के बाल्यकाल को दर्शाया गया है। राम राजा दशरथ के पुत्र थे। दशरथ की तीन रानियाँ थी किन्तु किसी भी रानी से कोई संतान प्राप्ति नही हुई थी। अत: पुत्र प्राप्ति के उद्देश्य से राजा दशरथ ने यज्ञ किया जिसके फलस्वरूप उन्हें चार पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई।

कौशल्या से राम, कैकेयी से भरत तथा सुमित्रा से लक्ष्मण और शत्रुघ्न उत्पन्न हुए। बालकाण्ड की प्रमुख कथाओं में विश्वामित्र की तपस्या, विश्वामित्र की तपस्या का भंग होना, राम – लक्ष्मण का विश्वामित्र के आश्रम में जाना, मारीच, सुबाहु आदि राक्षसों का वध करना, राम द्वारा शिव धनुष का तोड़ना, राम और सीता का शुभ विवाह होना तथा अन्य तीनों भाइयों का विवाह सम्पन्न होना आदि का वर्णन है। प्रस्तुत काण्ड राम की शूरवीरता का परिचायक है।

आयोध्याकाण्ड 2

आयोध्याकाण्ड रामायण ग्रंथ का दूसरा काण्ड है। इस काण्ड में 119 सर्ग हैं। इसमें राम व तीनों भाइयों के बाल्य जीवन से आगे आयोध्यावास की कथाएं वर्णित हैं। इस काण्ड की कथाओं के माध्यम से महाकाव्य को गति व उद्देश्य प्राप्त होता है। इस काण्ड की प्रमुख कथाएं इस प्रकार हैं –

राजा दशरथ द्वारा राम के राज्याभिषेक की घोषणा, कैकेयी की दासी मंथरा द्वारा कैकेयी को बहकाना, कैकेयी का कोपभवन, कैकेयी के दो वरदान माँगना, भरत के राज्याभिषेक की माँग, राम को चौदह वर्ष का वनवास प्राप्त होना, राम सीता व लक्ष्मण का वन गमन, राजा दशरथ की मृत्यु, भरत का ननिहाल से वापस आना।

इन कथाओं के साथ ही कैकेयी का पश्चाताप, राम को वापस लाने के उद्देश्य से भरत का वन को जाना, राम व भरत का विलाप, राम की पिता के वचन के प्रति दृढ़ता, राम की चरण पादुकाएं लेकर भरत की अयोध्या वापसी तथा राम का दंडकारण्य में प्रवेश आदि कथाएं वर्णित हैं, इन कथाओं के माध्यम से रामायण महाकाव्य में गतिशीलता आती है।

प्रस्तुत रामायण के काण्ड में बुरी संगति की हानियों का वर्णन है कि किस प्रकार व्यक्ति बुरे लोगों के बहकावे में आकार अपना सर्वस्व नष्ट कर देता है

अरण्यकाण्ड 3

यह रामायण का तीसरा काण्ड है। अरण्यकाण्ड में 75 सर्ग हैं। इन सर्गों में राम सीता व लक्ष्मण का दंडकारण्य के जंगलों में रहने से लेकर रावण द्वारा सीता के हरण की कथाएं वर्णित हैं। अरण्यकाण्ड की प्रमुख कथाएं इस प्रकार हैं –

पंचवटी में राम का आगमन, जटायु से भेट, शुपर्णखा का राम पर मोहित होना, लक्ष्मण के बाण से शुपर्णखा की नाक का काटना, शुपर्णखा का अपने भी रावण के पास जाना, मारीच का स्वर्ण मृग बनना, रावण द्वारा माता सीता का हरण, जटायु का घायल होना, राम का विलाप, राम लक्ष्मण का पंपा सरोवर के तट पर जाना।

शंबरी के निवास पर राम का जाना, शबरी से भेट, राम द्वारा शबरी के बेर खाना, सुग्रीव के पास जाना इन कथाओं के साथ ही अरण्यकाण्ड की समाप्ति होती है। इस रामायण के काण्ड में दर्शाया गया है कि बदले की भावना में अंधा होकर किस प्रकार मानव बुरे कृत्यों में लिप्त हो जाता है।   

किसकिन्धाकाण्ड 4

प्रस्तुत काण्ड रामायण का चौथा काण्ड है। इस काण्ड में माता सीता के हरण से लेकर पवन पुत्र हनुमान की राम से भेट के वृतांत वर्णित हैं। किसकिन्धाकाण्ड में मुख्य रूप से राम से हनुमान की भेट तथा हनुमान की राम के प्रति अगाध भक्ति का प्रदर्शन हुआ है। इस काण्ड की महत्वपूर्ण और प्रमुख कथाएं इस प्रकार हैं –

श्री राम द्वारा बालि का वध, सुग्रीव का राज्याभिषेक, वानर सेना का आगमन, वानर सेना का माता  सीता की वापसी हेतु राम का सहयोग, जामवान द्वारा हनुमान की कथा सुनाना, समुद्र लंघन, हनुमान का महेंद्र पर्वत चढ़ना आदि कथाओं के साथ रामायण की कथा आगे बढ़ती है। हनुमान के माध्यम से किसकिन्धाकाण्ड में ईश्वर के प्रति सच्ची भक्ति व अगाध प्रेम का वर्णन किया गया है।

सुंदरकाण्ड  5

प्रस्तुत काण्ड में 67 सर्ग हैं। सुंदर काण्ड में प्रमुख आकर्षण का केंद्र विभीषण से राम की भेट का प्रसंग रहा है। इस काण्ड की प्रमुख कथाएं हैं- राम का हनुमान तथा वानर सेना के साथ लंका को प्रस्थान करना, हनुमान का सीता माता के पास लंका जाना, अशोक वाटिका में सीता जी से हनुमान की भेट, लंका दहन, जामवान के पास हनुमान का वापस आना और माता सीता की कुशल क्षेम सुनाना आदि हैं।

प्रस्तुत काण्ड की कथाएं सुसंगति का लाभ, पतिव्रता पत्नी का विश्वास तथा हनुमान की अद्भुत शक्तियों का बुराई के साम्राज्य को नष्ट करने का अनुपम उदाहरण हैं। 

लंकाकाण्ड 6

लंका काण्ड में 68 सर्ग हैं। इन सर्गों में सुखद अनुभूति की पराकाष्ठा विद्यमान है। चौदह वर्षों के वनवास के उपरांत श्री राम का वापस अयोध्या आना और अयोध्या वासियों द्वारा उत्सव मनाना अत्यंत हर्ष से परिपूर्ण है। इस काण्ड की महत्वपूर्ण कथाएं हैं-

राम व वानर सेना का लंका प्रस्थान, विभीषण का राम के शरणागत होना, समुद्र पर बांध बांधना, मेघनाथ द्वारा राम व लक्ष्मण का मूर्छित होना, हनुमान द्वारा द्रोण पर्वत लाघना, मेघनाथ व कुंभकरण का वध, राम रावण युद्ध, रावण द्वारा लक्ष्मण का मूर्छित होना, श्री राम द्वारा रावण का वध, सीता और राम का मिलन, चौदह वर्षों के वनवास के बाद अयोध्या वापसी, राम आगमन के सुअवसर पर अयोध्या में उत्सव, दीपकों की साज सज्जा, दीपावली का प्रारंभ, राम का राज्याभिषेक तथा रामराज्य की स्थापना आदि।

प्रस्तुत काण्ड बुराई पर अच्छाई, असत्य पर सत्य की विजय का द्योतक है तथा दीपावली पर्व को मनाने के उद्देश्य को प्रकट करता है।

उत्तरकाण्ड 7 

उत्तरकाण्ड में 111 सर्ग हैं। उत्तरकाण्ड में राम का राज्याभिषेक तथा उसके बाद की कथाएं वर्णित हैं। जिनमें कौशिक, अगस्त्य आदि ऋषियों का राम के पास आगमन, वाल्मीकि आश्रम में माता सीता का निवास, लवणासुर राक्षस के वध हेतु शत्रुघ्न का वाल्मीकि आश्रम में रुकना, लव-कुश का जन्म, लव-कुश द्वारा रामायण का गान। इन्हीं कथाओं के साथ महाकाव्य में गति आती है।

अश्वमेघ यज्ञ, माता सीता की पवित्रता की परीक्षा, पृथिवी का फटना, सीता का पृथिवी माँ के साथ धरती में समाना, लक्ष्मण की मृत्यु, सरयू नदी पर राम का स्वर्गारोहण इन सभी रोचक और महत्वपूर्ण कथाओं के साथ ही रामायण का समापन हो जाता है।

प्रस्तुत रामायण के काण्ड की कथाएं भारतीय नारी की पवित्रता, आत्मशक्ति, सहनशीलता व रामराज्य की जीत को उजागर करती हैं।

रामायण के काण्ड और कथाएं रामायण महाकाव्य की सार्थकता तथा भारतीय संस्कृति को उजागर करते हैं। निश्चय ही रामायण एक ऐसा धार्मिक ग्रंथ है जो भारतीय संस्कृति के उत्थान, संरक्षण व अस्तित्व को स्थापित रखने में पूर्णत: सफल है।

Ramayan ke Kand Aur kathayen
वर्तमान जीवन में रामायण की आवश्यकता

वर्तमान जीवन में सर्वत्र दुख, त्रास, पीड़ा की अनुभूति छाई हुई है। हर ओर अशान्ति और संकट के ही दर्शन होते हैं। संसार के कोने कोने में लोभ, लालच, स्वार्थ व वैश्वीकता की होड मची है। धन दौलत ही सर्वोपरि हो गई है। व्यक्ति का महत्व नही रहा बस रूपियों का अहं सिर चढ़ कर बोलता है।

तो क्या ऐसे वातावरण में हमें ऐसा मार्ग दर्शक नही चाहिए, जो हमें शांति और सदाचार का बोध कराए। संयम, धैर्य व साहस के भावों से अंतर्मन को पवित्र करे तथा हमारी संस्कृति का स्मरण कराए। अवश्य जगत में प्रेम का प्रसार करने वाला, भगवतकृपा की सुखद अनुभूति कराने वाला  सशक्त संबल मानव जीवन के उद्धार हेतु आवश्यक है। भवसागर में पतवार, निराशा में आशा की लहर और विचलित मन में शांति की अनुभूति के समान है धार्मिक ग्रंथ तथा जीवन का उचित मार्ग दर्शक–रामायण।

आवश्यकता है रामायण का पठन-पाठन, चिंतन-मनन तथा अनुशीलन की। श्रीमद भगवतगीता के समान ही रामायण भी हमें नैतिकता, सदाचारिता, आदर्श चरित्र व आत्मिक शांति का संदेश दिया गया है, यदि हम इनका कुछ अंश भी आत्मसात कर लें तो अवश्य की शांति और संतुष्टि को प्राप्त कर सकेंगे।

रामायण के काण्ड और कथाएं मात्र कथाएं नही बल्कि उनमें समाहित है जीवन का सार, शिक्षा का पिटारा, ज्ञान का अथाह सागर, आदर्श जीवन का उपदेश, सच्ची भक्ति की अनुभूति, पारिवारिक सुख का महत्व, असत्य पर सत्य की विजय और बुराई पर अच्छाई की जीत। तो आइए वर्तमान जीवन की विषम परिस्थितियों में अपने जीवन को श्रेष्ठ मार्ग दर्शन प्रदान करें। आप सभी स्वस्थ रहें, मस्त रहें और सुरक्षित रहें। नमस्कार  

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