Safalta prapti ke tarike | सफलता का अर्थ, 8 BEST सफलता प्राप्ति के तरीके

Safalta prapti ke tarike

Safalta prapti ke tarike

Safalta prapti ke tarike क्या हैं? सफलता क्या है? कैसे प्राप्त करें? जीवन में सफल होने के लिए क्या करें? ये सभी प्रश्न हमें घेरे रहते हैं क्योंकि हम सभी सफल होना चाहते हैं। हम सभी के जीवन में सफलता का अत्यधिक महत्व होता है। परीक्षा में उत्तीर्ण होना, नौकरी पाना, तरक्की करना, धन कमाना, उन्नति करना, आत्मनिर्भर बनना हम सभी की चाहत होती है।

क्या नौकरी में तरक्की होना, आय का बढ़ना, पढ़ाई में अव्वल आना, व्यापार में लाभ होना आदि हमारे जीवन की उपलब्धियां ही हमारी सफलता है? सफलता को कुछ शब्दों में वर्णित नहीं  किया जा सकता। प्रत्तेक व्यक्ति के दृष्टिकोण में सफलता का अर्थ व परिभाषा अलग- अलग होती है।

प्रस्तुत पोस्ट में आज मैं सफलता का अर्थ स्पष्ट करते हुए 8 महत्वपूर्ण तरीकों का वर्णन कर रही हूँ जो हमें कर्म करने की प्रेरणा प्रदान करेंगे, हमारे लक्ष्य की प्राप्ति और सफलता दिलाने में भी सहयोग करेंगें। 

सफलता का अर्थ

संक्षेप में कह सकते हैं कि स्वयं द्वारा किए गए कार्यों में संतुष्टि का अनुभव करना ही हमारी सफलता है। अपने उद्देश्य को पूर्ण कर लेना, लक्ष्य को प्राप्त कर लेना और उसमें सुख, शांति व प्रसन्नता का अनुभव करना ही उस कार्य में प्राप्त की गई सफलता है। सफलता मनुष्य की सोच, आकांक्षा, आवश्यकता, जीवन के पड़ाव तथा उद्देश्यों के अनुसार प्रथक प्रथक होती है। 

प्रत्तेक व्यक्ति के जीवन में दृष्टिकोण और उम्र के अनुसार सफलता का अर्थ भी भिन्न भिन्न होता है जैसे- व्यापारी की सफलता अच्छा लाभ, नौकरी पेशा की सफलता आय में संतुष्टि, माता-पिता की सफलता संतान को अच्छे संस्कार प्रदान करना, एक विद्यार्थी के लिए उत्तम शिक्षा प्राप्त करना, एक पुरुष की सफलता अपने परिवार की मौलिक आवश्यकताओं को पूर्ण करना, इंटरव्यू देने पर नौकरी मिलना तथा किसान द्वारा लगाई फसल का लहलहाना सफलता हो सकती है।

इसी प्रकार मनुष्य की उम्र के आधार पर भी सफलता का अर्थ बदल जाता है। मनुष्य के जीवन काल में उम्र के पाँच पड़ाव आते हैं। शैशवावस्था, बाल्यावस्था, युवावस्था, प्रौढावस्था और वृद्धावस्था हमारे जीवन की सफलता इन पड़ावों के आधार पर भी बदल जाती हैं जैसे- शैशवावस्था में बिना किसी की उंगली पकड़े चल पाना। बाल्यावस्था में घर की चार दीवारी से निकल कर स्कूल के माहौल में सामंजस्य बना पाना।

युवावस्था में अच्छी शिक्षा प्राप्त करके आत्मनिर्भर बन पाना, प्रौढावस्था में अपने परिवार को अच्छे संस्कार देकर जीविका अर्जन हेतु समर्थ बना पाना और वृद्धावस्था में स्वस्थ जीवन बिताना और जीवन के फुरसत के पलों को इन्जॉय करना भी सफलता की परिभाषा हो सकती है।

सफलता प्राप्ति के तरीके

अब बात आती है कि अपने उद्देश्यों की पूर्ति कैसे करें, लक्ष्य को निर्धारित कैसे करें, अपने कार्यों में संतुष्टि और सुख का अनुभव कैसे करें, अनेक बार असफल होने पर भी कैसे प्रयासरत रहें, बार – बार गिरगिर कर संभलना कैसे संभव है? ये सब महत्वपूर्ण प्रश्न हैं जो हमारे मन को अशांत और विचलित कर देते हैं।

तो आइए आज इन सभी प्रश्नों के उत्तर प्रस्तुत पोस्ट में प्राप्त करें। आज मैं सफलता प्राप्ति के 8 बेहतरीन तरीकों को साझा कर रही हूँ जो अवश्य सभी को कर्म पथ पर आगे बढ़ने की ऊर्जा प्रदान करेंगे और सफलता की राह भी प्रशस्त करेंगे।

आत्मचिंतन (1)

हम सभी जानते हैं कि हमारा शरीर पाँच तत्वों से मिल कर बना है और आत्मा वह शक्ति है, जो ज्ञानेन्द्रियों और कार्मेन्द्रियों द्वारा इस शरीर का संचालन करती है। आत्मा परमात्मा का रूप है। आवश्यकता है हमें आत्मा में समाहित परमात्मा को पहचानने की और अपनी आत्मशक्ति की प्रबलता का अनुभव करने की। जिस पल हम आत्मचिंतन करने लगेंगे तभी आत्मशक्ति की प्रबलता को पहचान पाएंगे।

साथ ही अपनी कमियों को जान कर उनमें सुधार करके ही कर्मपथ पर आगे बढ़ पाएंगे। आत्मचिंतन के माध्यम से ही आत्मशक्ति और अपने मनोबल को बढ़ाया जा सकता है। अत: कहने का तात्पर्य यह है कि आत्मशक्ति का अनुभव करने के लिए, आत्मवलोकन, आत्मदर्शन व आत्मचिंतन आवश्यक है तथा हमारी सफलता में सहायक भी हैं।

इच्छाशक्ति (2)

प्रत्तेक व्यक्ति सुख- ऐश्वर्य, धन- संपदा, सफलता- तरक्की एवं स्वस्थ जीवन चाहता है। एक कामना के पूर्ण होने पर दूसरी इच्छा व कामना उभर आती है। इस प्रकार इच्छाओं का कभी अंत नही होता। यह बात हुई इच्छाओं की अब बात करते हैं इच्छाशक्ति की। किसी वस्तु को पाने की इच्छा जाग्रत होना इच्छाशक्ति नही कहलाती।

जब हम अपनी इच्छा की पूर्ति के लिए कठोर परिश्रम करते हैं, दृढ़ संकल्प एवं आत्मविश्वास से कर्तव्य करते हैं तब यह आत्मविश्वास हमें सफलता प्राप्ति के लिए प्रयत्नशील रखते हैं उस समय ऐसा अनुभव होता है – जैसे हमारे अंदर किसी अलौकिक शक्ति का उदय हुआ है। सामान्य भाषा में उसी अलौकिक शक्ति को इच्छा शक्ति का नाम दिया जाता है।

यही वह शक्ति होती है जो हमारी इच्छाओं को प्रबल करके हमारे लक्ष्य की प्राप्ति हेतु उत्साहित करती है और यही उत्साह हमें सफलता दिलाता है। तो एक बार असफल होने पर निराश नही होना चाहिए, बल्कि इच्छा शक्ति को सदैव जाग्रत रखना चाहिए।  

धारणा शक्ति (3)

किसी भी लक्ष्य की प्राप्ति के लिए दृढ़ इच्छा शक्ति के साथ प्रबल धारणा शक्ति का होना भी आवश्यक है, क्योंकि धारणा का सीधा संबंध विश्वास अथवा आत्मविश्वास से है। यदि किसी कार्य को प्रारंभ करने से पहले ही यह धारणा उत्पन्न हो जाए कि मैं यह कार्य नही कर सकता, यह कार्य मेरे जैसे साधारण व्यक्ति के लिए नही है, मैं इस कार्य में व्यर्थ ही समय व श्रम लगा रहा हूँ।

तो विश्वास कीजिए कि लाख प्रयास करने पर भी आप उस कार्य में सफलता प्राप्त नही कर पाएंगे। इसका कारण यह है की जन हम सफलता की आशा लेकर पूर्ण विश्वास के साथ किसी कार्य को आरंभ करते हैं तो हमें ऐसी अनेकों शक्तियों का सहयोग मिलता है, जो हमारे अंदर ही छुपी होती हैं और हमारे कार्य में सफलता दिलाती हैं इन शक्तियों के अभाव में लक्ष्य प्राप्त करना संभव नही होता।

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सकारात्मक सोच (4)

धारणा शक्ति के आधार पर ही हमारे मन में सकारात्मक या नकारात्मक सोच उत्पन्न होती है। जहां नकारात्मक सोच हमारे मनोबल को क्षीण करती है, वही सकारात्मक सोच हमारे मन को आत्मविश्वास से भर देता है। अत: सकारात्मक सोच का सीधा अर्थ मन में यह विश्वास उत्पन्न करना होता है कि मैं इस कार्य को पूरा करूंगा। मेरे अंदर इतनी योग्यता है की मैं अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकूँ।

ऐसी ही सकारात्मक सोच हमें नई शक्ति प्रदान करती है, हमारे अंदर उत्साह उत्पन्न करती है और इस प्रकार किसी भी लक्ष्य को प्राप्त करना हमारे लिए कोई कठिन कार्य नही होता।

जिज्ञासा (5)

जिज्ञासा का अर्थ है – किसी भी क्षेत्र व विषय को गहराई से जानने की इच्छा या भावना। यह भावना जितनी प्रबल होती है जिज्ञासा भी उतनी ही तीव्र होती है और जिज्ञासा जितनी तीव्र होती है ज्ञान की प्राप्ति भी उतनी की अधिक होती है। जीवन के किसी भी पड़ाव की सफलता हो किन्तु मनुष्य को जिज्ञासु होना आवश्यक है।

जिज्ञासु व्यक्ति के मन में आत्मदर्शन एवं आत्मचिंतन की भावना विद्यमान होती है। जिज्ञासु व्यक्ति सत्य – असत्य व उचित – अनुचित का विश्लेषण बड़ी ही सरलता से कर लेते हैं क्योंकि उनके मन में सत्य जानने की उत्कंठा हमेशा बनी रहती है और यही उत्कंठा उचित मार्ग चुनने और लक्ष्य की ओर बढ़ने में सहायक होती है।

एकाग्रता (6)

एकाग्रता का अर्थ है- मन की चित्तवृतियों का किसी एक ही लक्ष्य पर स्थिर होना। किसी भी कार्य में संलग्न होने के लिए चित्त का शांत एवं एकाग्र होना परमावश्यक है। अटूट विश्वास से युक्त मन सभी विषयों से हट कर केवल अपने लक्ष्य की ओर ही देखता है। यदि मन पूर्णत: अपने उद्देश्य की पूर्ति में लगा है तो संसार की कोई भी शक्ति आपकी सफलता में बाधक नही हो सकती।

किन्तु यह भी सत्य है कि मन का एकाग्र होना आसान नही। मन का स्वभाव है उड़ना, व्यर्थ की बातें सोचना या फिर भ्रमण करना। ऐसी स्थिति में मनुष्य लक्ष्य से भटक जाता है, इसका कारण यह है की हमारी सभी आंतरिक शक्तियां मन से जुड़ी हैं। जहाँ मन होगा वहीं ये शक्तियां भी होंगी। यदि मन आपके उद्देश्य, लक्ष्य और कर्म में लगा होगा तो समस्त शक्तियां उस कार्य को पूर्ण करने में सहयोग देंगी।

इसलिए निराश न हों निरंतर अभ्यास करें माना अनेक कठिनाइयाँ आएंगी। आप मन को शांत करने का प्रयास करेंगे और मन है की उड़ कर कहीं और ही पहुँच जाएगा। लेकिन निरंतर प्रयास और अभ्यास करने से एक समय अवश्य ऐसा आएगा जब आपका मन शांत और स्थिर हो जाएगा।

प्राणायाम (7)

अब बात करते हैं मन को एकाग्र करने के सर्वोत्तम उपाय की। चित्त को शांत और लक्ष्य की ओर प्रवृत करने में प्राणायाम अत्यंत आवश्यक साधन है और सफलता की कुंजी भी। जैसा कि हम जानते हैं की मन का स्वभाव चंचल है और इधर उधर भटकना उसकी प्रवृति है। केवल विचारों में स्थिरता लाकर मन को एकाग्र करना कठिन कार्य है, इसलिए प्राणायाम का उपयोग करके मन की एकाग्रता को बढ़ाने का प्रयास करना अति उत्तम उपाय है।

प्राणायाम से मन की एकाग्रता बढ़ती है और चंचलता कम होती है। मन के शांत होने से भटकाव की स्थिति समाप्त हो जाती है और मनुष्य अपने मन की समस्त शक्तियों का उपयोग कर सफलता को प्राप्त कर सकता है।

समय का महत्व (8)

समय अमूल्य है, समय का महत्व प्रत्तेक सफलता चाहने वाले व्यक्ति के लिए है। समय सारणी बनाकर कार्य करने से व्यक्ति अति आवश्यक कार्यों से लेकर अपनी रुचि के कार्य करने के लिए भी समय निकाल सकता है। अत: अपने व्यक्तित्व का सर्वागीण विकास कर पाने में सफल हो सकता है। बीता हुआ समय लौटकर नहीं आता है। समय का दुरुपयोग दरिद्रता और अनिश्चितता ही फैलाता है।

सफलता प्राप्ति के लिए समय का महत्व समझना अति आवश्यक है और जिस व्यक्ति को समय का सदुपयोग करना आ गया वह कभी पीछे नही रहा। प्रसिद्ध नाटक कार शेक्सपियर ने समय के विषय में कहा- “मैने समय को नष्ट किया और समय मुझे नष्ट कर रहा है।“ इसलिए समय को व्यर्थ नही गवाना चाहिए, बल्कि समय का मूल्य समझना चाहिए।

सफलता पाना सभी का सपना और इच्छा होती है, किन्तु मन विपरीत विचारों की ओर खींचता है। कभी निराशा घेरती है तो कभी असफल होने का डर सताता है, किन्तु यदि हम प्रस्तुत पोस्ट में वर्णित सफलता प्राप्ति के तरीकों को अपनाए तो अवश्य अपने लक्ष्य को प्राप्त करके संतुष्टि, शांति व आनंद को प्राप्त कर सकेंगे।

आप सभी स्वस्थ रहें, मस्त रहें और सुरक्षित रहें। नमस्कार

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