5 BEST Sammohan Vigyaan ke chamatkaar | हिप्नोटिज्म का अर्थ, आविष्कार और चमत्कार

Sammohan Vigyaan ke chamatkaar
Sammohan Vigyaan ke chamatkaar

Sammohan Vigyaan ke chamatkaar अवश्य ही हमें अक्सर चमत्कृत करते रहते हैं। हमारे मन में निश्चय ही सम्मोहन विद्या को जानने समझने की उत्सुकता उत्पन्न होती रहती है। सम्मोहन जिसे अंग्रेजी में हिप्नोटिज्म कहते हैं। क्या कोई जादू, टोना या सिद्धि है?

अधिकांश लोग सम्मोहन ज्ञान को किसी जादुई शक्ति का चमत्कार या कोई चमत्कारी सिद्धि मानते हैं, किन्तु यह सत्य नही है। सम्मोहन ज्ञान चमत्कारी सिद्धियों पर आधारित नहीं है, बल्कि वैज्ञानिक सिद्धांतों पर आधारित है और एक विज्ञान है। इसीलिए प्रस्तुत पोस्ट में सम्मोहन विद्या के लिए सम्मोहन विज्ञान शब्द का प्रयोग किया गया है।

विज्ञान के अद्भुत चमत्कार तो हम सभी दैनिक जीवन में देखते ही रहते हैं। किसी भी ज्ञान, विज्ञान व विद्या के उपयोग का तरीका उसके लाभदायी तथा हानिकारक परिणाम उपस्थित करते है, उसी प्रकार यदि सम्मोहन विद्या का दुरुपयोग किया जाए तो अनुचित व अनैतिक परिणाम सामने आते है किन्तु यदि सदुपयोग करें तो सम्मोहन विज्ञान एक वरदान ही है।

आज हम सम्मोहन विज्ञान से जुडे लाभदायी चमत्कारों का अध्ययन करेंगें। सर्वप्रथम सम्मोहन तथा हिप्नोटिज्म का अर्थ और आविष्कार के विषय में जानकारी प्राप्त करना आवश्यक है। तो आइए सम्मोहन विद्या के विषय में महत्वपूर्ण ज्ञान प्राप्त करने का प्रयास करें।

हिप्नोटिज्म का अर्थ

हिप्नोटिज्म शब्द ग्रीक भाषा के ‘हिप्नोज’ शब्द से बना है। जिसका अर्थ होता है निंद्रा। हिप्नोटिज्म के प्रयोग से रोगी का ध्यान प्रयोगकर्ता के शब्दों पर रुक जाता है, इसी को हिप्नोटिज्म होना कहते हैं। हिप्नोटिज्म में पात्र निंद्रावस्था में रहता है, किन्तु उसकी चेतना बनी रहती है।

मनुष्य तथा अन्य जीवों पर सम्मोहन या वशीकरण के प्रभाव पड़ने का कारण मस्तिष्क है। मस्तिष्क की क्रियाशीलता सम्मोहन के प्रभाव से आती है। मस्तिष्क के इसी चमत्कार और क्रियाओं के फलस्वरूप हिप्नोटिज्म, मेस्मरिज्म जैसी विद्या का आविष्कार हुआ।

इस विद्या के द्वारा मनुष्य के मस्तिष्क पर दूसरा व्यक्ति अपना अधिकार कर उससे मनचाहे कार्य करा सकता है। इस स्थिति में केवल मस्तिष्क पर अधिकार रहता है मनुष्य का शेष शरीर पूर्ववत् रहता है, वह प्रयोगकर्ता के आदेश और इच्छाओं का पालन करता है, इसी स्थिति का नाम हिप्नोटिज्म है।

सम्मोहन विद्या (हिप्नोटिज्म) का आविष्कार

अठारहवी सदी के मध्य में मैस्मेर नामक वियना के एक चिकित्सक ने सर्वप्रथम सम्मोहन का अध्ययन प्रारंभ किया था। एण्टम मैस्मेर ने सम्मोहन का प्रचार – प्रसार करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। आधुनिक जगत के सम्मोहन एवं वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर परिचय कराने वाले एण्टम मैस्मेर का विश्वास था कि मनुष्य पर उपग्रह अपने चुंबकीय वातावरण द्वारा प्रभाव डालते हैं।

उन्होंने चुम्बकों द्वारा रोगियों की चिकित्सा आरंभ कर सफलता प्राप्त की। उन्हें चिकित्सा करते – करते अचानक एक दिन अनुभव हुआ कि केवल स्पर्श करने से रोगियों को लाभ हो रहा है। अनेक रोगियों पर उन्होंने इस शक्ति का प्रयोग किया। उन्होंने चिकित्सा हेतु उपयोगी भवन का निर्माण कराया।

वातावरण और उसकी स्वास्थ्य प्रदायिनी शक्ति रोगी के शरीर के भीतर तक पहुंचकर उसके कष्ट को दूर कर देती है- इस आधार पर की जाने वाली चिकित्सा डॉक्टर मैस्मेर के नाम पर ‘मैस्मरिज्म’ कहलाने लगी। वैसे तो सम्मोहन विद्या का प्रचार भारत में सदियों पहले से ही विद्यमान है, किन्तु आधुनिक जगत में इसे प्रचारित करने का श्रेय डॉक्टर एण्टम मैस्मेर को ही प्राप्त है।

एण्टम मैस्मेर ने सम्मोहन विद्या के विकास के लिए अत्यंत प्रयत्न किए और भारत में सम्मोहन विद्या का प्रचलन विज्ञान के रूप में हुआ। हिप्नोटिज्म शब्द का प्रयोग सबसे पहले स्कॉटलैंड के सर्जन जेम्स ब्रेड ने 1840 में किया। डॉक्टर मैस्मेर की पद्धति के आधार पर जेम्स ब्रेड ने बताया कि रोगों को दूर करने में हिप्नोटिज्म अत्यंत उपयोगी है।

जेम्स ब्रेड ने सिद्ध किया कि अगर रोगी कुछ देर तक किसी चमकीली वस्तु को अपलक देखता रहे अथवा किसी बिन्दु पर अपनी दृष्टि जमाए रहे तो रोगी हिप्नोटिज्म के क्षेत्र में पहुँच जाता है। इस अवस्था में तंत्रिकाओं का तनाव बहुत कम हो जाता है, जिससे अनेक प्रकार के रोग दूर हो जाते हैं। उन्होंने इसका नाम हिप्नोटिज्म रखा।

सम्मोहन विज्ञान के चमत्कार

आधुनिक समय में सम्मोहन विद्या अत्यंत लाभदायी सिद्ध हो रहा है। चिकित्सा के क्षेत्र से लेकर विज्ञान के क्षेत्र तक सम्मोहन विद्या संबंधी अनेक उपयोग हैं जो अचंभित करने वाले हैं। सच ही है वह वैज्ञानिक शक्ति जिसे आध्यात्म की भाषा में आत्म-शक्ति मानते हैं, किसी भी अर्थों में आणविक शक्ति से कम नही है। यह शक्ति प्रत्तेक व्यक्ति के अंदर होती है।

सम्मोहन विद्या के माध्यम से इस शक्ति को बढ़ाया जा सकता है और उससे लाभ उठाया जा सकता है। किसी भी ज्ञान, विद्या व वस्तु का उपयोग की विधि उसे लाभदायी तथा हानिकारक बनाती है। उसी प्रकार यदि सम्मोहन विद्या का दुरुपयोग किया जाए तो हानि हो सकती है।

किन्तु अगर उचित उपयोग करें तो यह विज्ञान की तरह एक वरदान भी है, जो रोगों को दूर करने, व्यक्ति में आत्मविश्वास व इच्छाशक्ति उत्पन्न करने का लाभदायी कार्य भी करती है। तो आइए आज हम सम्मोहन विज्ञान के उचित उपयोग और महत्वपूर्ण चमत्कारों का अध्ययन करें।

Sammohan Vigyaan ke chamatkaar
अध्यात्म के क्षेत्र में प्राचीनता

भारत में सम्मोहन विद्या पाँच हजार वर्ष के पहले से प्रचलित है। इसकी प्राचीनता के अनेक प्रमाण हैं, जो हमें विस्मित कर देते हैं। सम्मोहन विद्या में अदम्य शक्ति है, जो अदृश्य अवश्य है किन्तु मन मस्तिष्क को संतुलित व नियंत्रित करने का उत्तम साधन है।

सम्मोहन विद्या का वर्णन हमारे ग्रंथों में भी प्राप्त होता है। कृष्ण का गोपिकाओं के साथ रासलीला के वृतांत में हर एक गोपी को अपने साथ कृष्ण का दिखना वास्तव में हिप्नोटिज्म या वशीकरण ही था। व्यक्ति या व्यक्तियों के साथ सम्पूर्ण वातावरण को इस प्रकार वश में कर लेना जो कहा जाए और दिखाया जाए वही लोगों को दिखे यही वशीकरण की प्रबल क्रिया है।

महाभारत काल में कौरव – पांडवों के युद्ध में नेत्रहीन धृतराष्ट्र को युद्ध का जीवंत समाचार एवं चित्रण करने का जो कार्य सारथी संजय ने किया था वह भी वशीकरण ही था। युद्ध स्थल में उपस्थित न होते हुए भी युद्धभूमि की ओर अपना ध्यान केंद्रित करके, युद्ध के वातावरण से तारतम्य स्थापित कर लेना सम्मोहन की ही क्रिया थी।

यह कोई जादू नही था, बल्कि अपने मन को इतना नियंत्रित कर लेने का अभ्यास एवं शक्ति थी कि मन को अपनी इच्छा से जहां पहुँच दिया जाए वहाँ का दृश्य देखा जा सकता है।   

चिकित्सा के क्षेत्र में चमत्कार

आधुनिक समय में सम्मोहन विद्या रोगों के उपचार में अत्यधिक महत्वपूर्ण सिद्ध हो रहा है अत: सम्मोहन क्रिया का प्रयोग चिकित्सा के क्षेत्र में सराहनीय है। किन्तु चिकित्सा के क्षेत्र में सम्मोहन का प्रयोग करने के लिए चिकित्सा विज्ञान और मनोविज्ञान दोनों का ज्ञान होना आवश्यक होता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि स्नायु संबंधी रोग से ग्रसित व्यक्ति के कुछ शरारिक और मानसिक लक्षण अन्य गंभीर रोगों के लक्षण से मिलते हैं उचित चिकित्सा के लिए इन लक्षणों को पहचानने की योग्यता अवश्य होनी चाहिए।

यह निश्चित होना चाहिए की रोगी की समस्या शारीरिक नही है, शरीर में जब समस्या होती है तब दर्द होता है और मन जब समस्याग्रस्त होता है तब रोगी चिंता व तनाव से पीड़ित होता है। दर्द और तनाव हमारी शारीरिक व मानसिक समस्या के परिचायक है इससे पता चलता है की रोग शारीरिक है या मानसिक। सम्मोहन विज्ञान द्वारा चिकित्सा के क्षेत्र में इन सभी तथ्यों पर ध्यान देना आवश्यक होता है।

मनोविश्लेषण के क्षेत्र में चमत्कार

सम्मोहन द्वारा मनोविश्लेषण उस विधि का नाम है जिसके द्वारा “दूरदर्शी विश्लेषण” किया जाता है। मनोविश्लेषण सम्मोहन संबंधी प्रयोगों का ही परिणाम है जो अवचेतन मन के गुप्त रूप, उसकी क्रिया आदि के विषय में जानने के लिए किए जाते है।

आधुनिक समय में मनोविश्लेषण संबंधी अनेक प्रयोग किए गए हैं यही करण ही की चिकित्सा विज्ञान की अन्य शाखाओं के साथ, एक साधन के रूप में सम्मोहन का प्रयोग भी बढ़ता जा रहा है। सम्मोहन चिकित्सा में दोषपूर्ण आचरण को सही करने और अनुकूल बनाने में सहायता देने की अदम्य क्षमता है।

सम्मोहन एक साधन है, जिसके माध्यम से लक्ष्य तक पहुँचा जा सकता है। पिछले अनेक वर्षों में इस क्रिया ने मनोविश्लेषण संबंधी क्षेत्र में अत्यधिक सफलता प्राप्त की है और आगे भी लाभ प्राप्त किया जा सकता है बस आवश्यकता है सम्मोहन विज्ञान को सूक्ष्म दृष्टि से समझने की, पर्याप्त ज्ञान व योग्यता की।

मनोवैज्ञानिकता के क्षेत्र में चमत्कार

हमारे अंदर अनेक ऐसी क्षमताएं हैं जो अंतर्मन में सुरक्षित व सुप्त अवस्था में रहती हैं। कभी उजागर नही होती। यही करण है की हम स्वयं भी अपनी इन आंतरिक क्षमताओं से अनभिज्ञ रहते हैं। सम्मोहन क्रिया द्वारा हमारी चेतन में कुछ परिवर्तन होते है परिणाम स्वरूप इन अदम्य क्षमताओं का विकास हो जाता है।

सम्मोहन क्रिया के माध्यम से व्यक्ति में अतिसंवेग की स्थिति उत्पन्न की जा सकती है। जब इंद्रियाँ अत्यधिक संवेदनशील हो जाति हैं और सम्मोहित किए जाने वाले व्यक्ति को सुझाव या ज्ञान दिया जाता है की उसकी कोई इंद्रिय अधिक तेज हो जाएगी तो संभवत: ऐसा हो सकता है। उदाहरण के लिए उस व्यक्ति की श्रवण क्षमता को तेज कर दिया जाए तो वह हल्की से हल्की आवाज भी सुन सकता है।

यही नही बल्कि उस व्यक्ति के अंदर बीते समय में वापस जाने की क्षमता भी उत्पन्न की जा सकती है। वह उन बातों को भी याद कर सकता है जो प्रयास किए जाने पर भी याद नही आती। यह क्रिया रोगों के निदान में बहुत महत्वपूर्ण है।

विज्ञान के क्षेत्र में चमत्कार

हिप्नोटिज्म के द्वारा हम किसी भी व्यक्ति को अपने अनुसार निर्देश दे सकते हैं और जैसा चाहे वैसा व्यवहार करा सकते हैं। यह सब किसी चमत्कार से कम नही लेकिन यह चमत्कार है विज्ञान का। सम्मोहन क्रिया में विज्ञान के नियम व सिद्धांत सक्रिय होते हैं।

जब किसी को हिप्नोटिज्म करने के लिए हम निर्देश देते हैं तब हम तत्संबंधी विचार तरंगों का प्रभावशाली प्रेषण करते हैं। जब यह शक्तिशाली तरंगें लक्ष्य से टकराती हैं, तब उस पर अपेक्षित प्रभाव पड़ता है।

लक्ष्य और सफलता के बीच की दूरी को समाप्त करने के लिए तथा लक्ष्य तक पहुँचने हेतु विचार तरंगों को उन तक पहुँचाने की आवश्यकता होती है। इस कार्य में ऊर्जा का होना अत्यंत आवश्यक होता है। यह ऊर्जा प्रकाश के द्वारा ही उपलब्ध होती है। प्रकाश के माध्यम से ऊर्जा की प्राप्ति होती है और ऊर्जा के माध्यम से विचार तरंगें लक्ष्य तक पहुँचाने में सफल होती हैं।

प्रकाश के माध्यम से ही हम अपनी विचार तरंगों को प्रेषित करते हैं। यही करण है कि हिप्नोटिज्म की क्रिया में प्रकाश का विशेष महत्व है। इसी वजह से अंधकार में की गई हिप्नोटिज्म की क्रिया असफल रहती है। अत: स्पष्ट है की सम्मोहन विद्या विज्ञान के सिद्धांतों पर आधारित है।

प्राचीनकाल के सम्मोहन व मोहिनी विद्या का परिवर्तित, विकसित व संवर्धित रूप ही आधुनिककाल का हिप्नोटिज्म है, जो किसी जादू टोना की सोच से उठकर विज्ञान के वरदान के स्वरूप में उजागर हो गया है। वो भी ऐसा विज्ञान जो चिकित्सा से लेकर व्यावहारिक व सामाजिक जीवन को भी प्रभावित कर रहा है।

सम्मोहन के द्वारा गहरी नींद में सोने, आत्मविश्वास को बढ़ाने, तनाव से दूर होने, बुरी आदतों को छोड़ने और चिंता से छुटकारा पाने में वे कई अक्षमताओं और अनेक बीमारियों के उपचार में भी सहायक हो सकते हैं। इस नवीन जानकारी से युक्त पोस्ट को समाप्त करती हूँ। आप सभी स्वस्थ रहें, मस्त रहें और सुरक्षित रहें नमस्कार

Tags:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *