Sanskrit Words | 2 Best संस्कृत शब्द निर्माण योजना और शब्दकोश

Sanskrit Words

Sanskrit Words

Sanskrit Words संस्कृत भाषा के ज्ञान प्राप्त करने का सफल माध्यम हैं। शब्दकोश में संस्कृत शब्दों का संकलन समाहित है। संस्कृत भाषा में शब्द निर्माण की अद्भुत क्षमता है।

संस्कृत शब्द निर्माण की जो प्रक्रिया संस्कृत व्याकरण में है, वह भाषा को अधिक समृद्ध बना कर उपस्थित करती है। किसी भी भाषा की वास्तविक शक्ति उसकी अभिव्यक्ति क्षमता के रूप में होती है, जो उसके शब्द सामर्थ को उजागर करती है।

संस्कृत शब्द की निष्पत्ति का अत्यंत वैज्ञानिक माध्यम है, जो मूल क्रिया रूपों से शब्द निर्माण की अदम्य क्षमता रखता है। शब्दरूप और धातुरूप के अतिरिक्त उपसर्ग, प्रत्यय, संधि, समास के माध्यम से शब्दों का गठन संस्कृत भाषा की प्रमुख विशेषता है।  

पिछले पोस्ट में मैंने संस्कृत भाषा की उत्पत्ति, स्वरूप, महत्व तथा विशेषताओं को विस्तार से वर्णित किया है। उसी क्रम में प्रस्तुत है यह लेख तो आइए संस्कृत शब्दकोश को साझा करने से पहले में आपको संस्कृत शब्द निर्माण योजना का संक्षित परिचय प्रदान करती हूँ।

Sanskrit Words

संस्कृत शब्द निर्माण

किसी भी भाषा को सीखने से पहले उसके व्याकरण को जानना आवश्यक होता है। यहाँ यह समझना भी जरूरी है कि व्याकरण क्या है? व्याकरण वह नियम है, जो भाषा को लिखने के ढंग को सुव्यवस्थित करता है। भाषा की व्याकरण के माध्यम से हम उस भाषा को सरलता से पढ़, समझ व लिख सकते हैं।

अत: सभी मनुष्य भाषा के एक ही रूप को समझें, इसके लिए भाषा के स्वरूप को और व्यवस्थित किया गया तथा नियमों में बांधा गया। इन नियमों की जानकारी देने वाले शास्त्र को ही व्याकरण कहा जाता है। अर्थात् व्याकरण वह शास्त्र है जिसके द्वारा हम किसी भी भाषा के शुद्ध रूप का ज्ञान प्राप्त करते हैं।

भाषा की शब्द निर्माण योजना व्याकरण के नियमों पर आधारित होती है। अत: संस्कृत शब्द निर्माण के संदर्भ में वैयाकरणों के सिद्धांत को ध्यान में रखना आवश्यक है। सर्वप्रथम वैयाकरणों के मत के अनुसार शब्द नित्य हैं, तथा नित्य पदार्थ का निर्माण नहीं होता। जिसका निर्माण होता है, कालांतर में वह विनष्ट होता है।

वैयाकरणों के मत शब्द निर्माण का तात्पर्य है – वैयाकरण शब्दों के प्रकृति – प्रत्यय को प्रथक करके शब्दों का अर्थ बोध करवाता है। सरल शब्दों में कह सकते है कि – व्याकरण के माध्यम से हम भाषा के अर्थ का ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं।

संस्कृत शब्द निर्माण प्रक्रिया में सर्वप्रथम शब्दों की व्युत्पत्ति की जाती है। व्युत्पत्ति से शब्दों के अर्थ निष्पन्न होते हैं, और शब्दों के अर्थ प्रकट होने से ही भाषा को समझा जा सकता है। इसके बाद प्रकृति प्रत्यय का विभाजन किया जाता है।

व्याकरणशास्त्र के अनुसार शब्द निर्माण प्रक्रिया में दो प्रक्रियाओं का योगदान प्रमुख रूप से होता है – कृदंत प्रक्रिया, तद्धित प्रक्रिया। अब हम इन दोनों प्रक्रियाओं का संक्षेप में अर्थ समझेंगे।

कृदंत प्रक्रिया

धातु पदों के नाम पद बनाने वाले प्रत्ययों को कृत प्रत्यय कहते हैं, इन कृत प्रत्यय से बने शब्दों को कृदंत शब्द कहते हैं। उदाहरण – पठ् (धातु) + तव्य (कृत प्रत्यय) = पाठितव्यम्।

कृदंत प्रत्यय के माध्यम से शब्द बनाने की प्रक्रिया को कृदंत प्रक्रिया कहते हैं। यह सात प्रकार के होते हैं – तव्यत्, तव्य, अनीयर, यत्, ण्यत्, क्यप् और केलिमेर्।

धातुओं से प्रत्यय होने पर अपेक्षित संधि एवं सेट् धातु होने पर इट् का आगम होता है। जैसे – चि + यत् = चेयम् ( चुनने योग्य) यह कृदंत प्रक्रिया के अंतर्गत कृत्य प्रत्यय है, जो भाव और कर्म अर्थ में होते हैं। इनके अतिरिक्त कर्ता कारक के अर्थ में भी होते हैं।

तद्धित प्रक्रिया

तद्धित शब्द का अर्थ है – ऐसे प्रत्यय जिनका भव, समूह, निवृत, निवास, जात, विकार आदि अनेक अर्थों में प्रत्यय होते हैं। तद्धित में संज्ञा, सर्वनाम तथा विशेषण आदि शब्दों के साथ प्रत्यय को जोड़कर नए शब्दों को बनाते हैं।

उदाहरण के लिए – अश्वपति + अण्  = आश्वपतम् (अश्वपति की संतान) यहाँ अश्वपति संज्ञा वाचक शब्द में अण् प्रत्यय को जोड़कर – आश्वपतम् बनाया गया। आश्वपतम् का अर्थ हो गया अश्वपति की संतान। इसप्रकार अश्वपति शब्द के स्वरूप में परिवर्तन हो गया है।  

तद्धित प्रत्यय द्वारा शब्द बनाने की प्रक्रिया तद्धित प्रक्रिया कहलाई जाती है। अण्, घ, मतुप्, इनि, तमप् तथा मयट् आदि प्रत्ययों का प्रयोग करके शब्दों का निर्माण किया जाता है।

संस्कृत शब्द निर्माण प्रक्रिया का संक्षेप में वर्णन के बाद अब हम संस्कृत शब्दकोश का अध्ययन करेंगे।

संस्कृत शब्दकोश

सर्वप्रथम हम यहाँ जानेंगे की शब्दकोश क्या होता है? शब्दकोश एक ऐसी सूची या बड़ा ग्रंथ होता है, जिसमें शब्दों की वर्तनी, अर्थ, व्याकरण, प्रयोग आदि का वर्णन होता है। शब्दकोश एक ही भाषा के या फिर एक से अधिक भाषाओं के भी हो सकते हैं। भिन्न भिन्न विषयों के शब्दकोश अलग अलग होते हैं जैसे – विज्ञान, चिकित्सा, इतिहास, विधिक शब्दकोश आदि।

विचारों के आदान प्रदान एवं भावों की अभिव्यक्ति के लिए किसी भी भाषा का सही शब्द चयन आवश्यक होता है। अत: शब्दों का भाषा में तथा भाषा का मानव जीवन में महत्व को समझ कर ही शब्दों को एकत्रित करके संग्रहीत करना प्रारंभ किया गया। शब्दों के इसी संग्रहीत रूप को शब्दकोश कहा गया।

शब्दकोश अनेक प्रकार के होते है – सामान्य शब्दकोश, विशिष्ट, पारिभाषिक, प्राकृतिक भाषा संसाधन के लिए, ज्ञानकोषीय, बाल शब्दकोश, तुकांत, द्विभाषी, एलेक्ट्रानिक तथा सचित्र शब्दकोश आदि। शब्दकोश के माध्यम से किसी भी भाषा के शब्दों का अन्य भाषा में अनुवाद आसानी से समझा  जा सकता है।  

इसप्रकार शिक्षा व ज्ञान अर्जन के क्षेत्र में शब्दकोश अत्यधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। व्याकरण के साथ ही किसी भी भाषा को बोलचाल में प्रयुक्त करने के लिए या समझने के लिए शब्द भंडार की आवश्यकता होती है। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए यहाँ कुछ उपयोगी Sanskrit Words को शब्दकोश (Dictionary) के माध्यम से साझा कर रही हूँ।

फलों के नाम

अखरोट = अक्षोटम्

अनार  = दाडिमम्

अमरूद  = पेरुकम्

आम   =  आम्रम्

इमली   =  अम्लिका

कदम   =   कदम्ब:

केला    =   कदली फलम्

जामुन   =   जम्बु:

नारियल  =  नारिकेलं

नाशपाती =  रुचिफला

बेर     =  बदरीफलम्

मखाना  =  मखन्नम्

महुआ   =  मधुकम्

लीची    =   लीचिका

शरीफा   =  सीताफलम्

खीरा     =   त्रपूषम्

सब्जियों के नाम

घुइया = आलुकी

आलू = आलु:

करेला = कारवेल्लम्

कुंदरु = कुंदरु:

कद्दू = कुष्माण्ड

गाजर = गृज्जनम्

तरोई = कोशातकी 

पालक = पालक्या

भिंडी = भिंडक:

मुली = मूलकम्

लौकी = अलाबु

बथुआ = वास्तुकम्

शलगम = श्वेतकन्द:

शाक = शाकं

सेम = सिंबा

टमाटर = रक्ताड़ग् वृन्ताकम्

परवल = पटोल:

प्याज = सुकंदक:

बैगन = भण्टाकी

मटर = कलाय:

रामतरोई = राजकोशातकी

बण्डा = पिंडालु:

शकरकंद = शक्रकन्द:

सूरन = शूरण:

मसालों के नाम

लहसुन = लशुन:

अदरख = आर्द्रकम्

कालानमक = कृष्णलवणं

जीरा = जीरकम्

मसाला = वेशवार:

लौंग = लवड़ग्म्

हल्दी = हरिद्रा

अजवाइन = यवानी

इलायची = एला

काली मिर्च = कृष्णमासिवम्

तेजपत्र = तेजपत्रम्

धनिया = धन्या

मेथी = मेथिका

सुपारी = पूगफलम्

सौफ = मधुरा

हींग = जतुकम्

पान = ताम्बुलम्

पोदीना = पुदीन:

अंगों के नाम

अंग = अवयव:

अंगुली = अंगुलि:

अंगूठा = अंगगुष्ठ

आँख = नेत्रम्

आँख की पुतली = कनीनिका

एड़ी = पाश्वनी

कंधा = स्कन्ध:

कमर = कटि:

कलाई = मणिबंध:

कान = कर्ण:

कोहनी = कफणि

खोपड़ी = कपाल:

गर्दन = ग्रीवा

गला = कंठ:

गोद = कोड:

घुटना = जानु:

घुँघराले बाल = अलक:

खून = रक्तम्

भौं = भ्रू:

माँग = सीमांत:

मुख = मुखम्

छाती = वक्ष:

जीभ = रसना

दाँत = दंत:

नस = शिरा

नाक = नासिका

नाखून = नख:

नाभी = नाभि:

पलक = पक्ष्म

पीठ = पृष्ठम्

पेट = उदरम्

पैर = पाद:

बाँह = बाहु

मन = मन:

माथा = मस्तकम्

मुट्ठी = मुष्टि

हाथ = हस्त:

हृदय = हृदयम्

हथेली = करतल:

हड्डी = अस्थि

नीचे का ओंठ = अधर:

ऊपर का ओंठ = ओष्ठ   

सिर की चोटी = शिखा

सिर के सफेद बाल = केश:

वेश – भूषा के नाम    

पैंट = उरुकम्

कमीज = युतकम्

हाफ पैंट = अर्धोंरुकम्

मोजा = पादकोश:

कुर्ता = कराङशुकम्

पैजामा = पदाङशुकम्

शाल = राड्  कवम्  

स्वेटर = स्वेदकम्

रजाई = तलिका

तौलिया = प्रोछ:

धोती = वेष्टि

लूँगी = चित्रवेष्टि

टाई = गलपट:

साड़ी = शाटिका

दुपट्टा = उतरियम्

पगड़ी = उष्णीयकम्

टोपी = टोपिका

गलब्स = हस्तकोश

वाहनों के नाम

लोकयानम् = बस

रेलयानम् = रेलगाड़ी

वायुयानम् = हवाई जहाज

वृषभयानम् = बैलगाड़ी

एकाश्वयानम् = एक्का

स्कूटरयानम् = स्कूटर

कारयानम् = कार

द्विचक्रिका = साईकिल

त्रिचक्रिका = रिक्शा

रुग्नावाहनम् = एम्बुलेंस

जलयानम् = स्टीमर

भारवाहनम् = इक

टेम्पोयानम् = टेम्पो

मोटरयानम् = मोटरगाड़ी

अंग्रेजी शब्दों की संस्कृत

अपॉइंटमेंट = नियुक्ति

आडिट = लेखा परीक्षा

आनरेरी = अवैतनिक

अपील = पुनर्वाद:

आडिटर = गणना परीक्षक

आडिनेन्स = अध्यादेश

आलपिन = लघुसूचिका

एजुकेशन कोड = शिक्षा संहिता

एजेंट = अभिकर्ता

एग्रीमेंट = अनुबंध

कस्टडी = अभिरक्षा

केस = काण्डम्

गवाह = साक्षीदाता

टिकट = चिटिका

ड्राफ्ट = धनादेश

प्रोविजनल = अंतकालीनम्

बिल = प्राप्यकम्

बैलेंसशीट = देयादेयफलकम्

मार्जिन = उपरांत:

रिपोर्ट = प्रतिवेदन

सप्लायर = समायोजक:

स्टाम्प = अङ्कपत्रम्

एजेंसी = अभिकरणम्

एक्ट = अधिनियम

कलेंडर = तिथिपत्रम्

टैक्स = कर:

लाइसेंस = अनुज्ञप्ति

सर्वे = पर्यवलोकनम्

सप्लाई = समायोग:

बोनस = अधिलाभ:

मार्जिन = उपरांत:

सम्मन = आह्नम्

कोटा = यथानश:

शब्दों से संबंधित संस्कृत भाषा के ज्ञान को प्राप्त करने का सरल व आवश्यक तरीका है। किसी भी भाषा को सीखने के प्रयोजन अनेक प्रकार के होते हैं जैसे – बातचीत, काव्य, संगीत आदि का आनंद लेना, शैक्षणिक पाठ्यक्रम को पढ़ना, भाषा संबंधी ग्रंथों का अध्ययन, लेखन में रुचि, रचनाएं करना आदि।

इसके लिए सम्बद्ध भाषा में संभाषण, भाषा को समझना तथा उच्चारण करना प्रमुख अंग होते हैं। अत: भाषा का सामान्य ज्ञान प्राप्त करने हेतु प्रस्तुत लेख में फलों के नाम, सब्जियों के नाम से लेकर अंग्रेजी के शब्दों के संस्कृत शब्द भी संकलित किए गए हैं।

प्रस्तुत लेख विद्यार्थियों के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। यह विद्यार्थियों के लिए हिन्दी से संस्कृत में अनुवाद करने में भी सहायक सिद्ध होंगे।आशा करती हूँ कि संस्कृत भाषा की जानकारी प्रदान करने हेतु किया गया मेरा यह प्रयास आप सभी के लिए लाभदायक होगा। आप सभी स्वस्थ रहें, मस्त रहें और सुरक्षित रहें। नमस्कार।   

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