Stri Vimarsh Aur Bhartiya Samaj Parampara | 2 Best स्त्री विमर्श व परंपरा का अर्थ और महत्व

Stri Vimarsh Aur Bhartiya Samaj Parampara
Stri Vimarsh Aur Bhartiya Samaj Parampara

स्त्री विमर्श और भारतीय समाज परम्परा

Stri Vimarsh Aur Bhartiya Samaj Parampara चिंतन मनन का अत्यंत महत्वपूर्ण विषय रहा है। स्त्री विमर्श वृहद, विस्तृत और आवश्यक विचारणीय चर्चा का सामाजिक विषय है। भारतीय समाज सदैव से ही आदर्श समाज की श्रेणी में गिना जाता है।

भारतीय समाज की परम्परा अत्यंत प्राचीन एवं समृद्धशाली है। भारतीय समाज की परम्परा बहुआयामी है जिसमे मान्यताओं, रीति रिवाजों, नियमों, प्रथाओं और विभिन्न भाषाओं का समग्र रूप विद्यमान है।

भारतीय समाज की परम्परा का केंद्र बिन्दु भारतीय परिवार हैं और परिवार की महत्वपूर्ण कड़ी स्त्री। प्रस्तुत विषय के अंतर्गत हम भारतीय समाज परंपरा का अर्थ और महत्व समस्या एवं संघर्ष के विषय में विचार-विमर्श व चिंतन-मनन करेंगे।

स्त्री विमर्श और परंपरा का अर्थ

प्रस्तुत विषय के अंतर्गत विमर्श का शाब्दिक अर्थ है चिंतन मनन और जानने की प्रक्रिया जिसका जन्म जिज्ञासाओं के आधार पर होता है अत: स्त्री विमर्श का अर्थ है मान्यताओं, प्रथाओं, संस्कृति, परंपरा एवं समाज के अंतर्गत मानवीय दृष्टि कोण रखते हुये स्त्री की स्थिति पर विचार, चिंतन व मनन करना।

STRI VIMARSH AUR BHARTIYA SAMAJ PARAMPARA

परंपरा का अर्थ है- रीति-रिवाजों, नियमों आदि का बिना किसी परिवर्तन के एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में स्थापित रहना। यदि इतिहास के पन्ने पलट कर देखा जाए तो ज्ञात होता है कि स्त्रियाँ आदिकाल से ही परम्परा रूपी जंजीर में जकड़ी हुई हैं।

आज भी अधिकांश भारतीय महिलाएँ परम्पराओं का पालन करती हैं। वे अनेक कष्ट सहते हुए पत्नी धर्म का पालन करती रहती है, अपने धर्म से कभी भी पीछे नही हटती और सदैव पुरुष का गौरव बनाये रखने का प्रयास करती हैं। स्त्रियाँ क्षमा, त्याग, परोपकार जैसे गुणों से युक्त रहती हैं।

स्त्रीविमर्श का महत्व

हमारें शास्त्रों में कहा गया है कि- जहाँ नारी की पूजा होती है वही देवता निवास करते है। सच भी है जो नारी अपने घर-परिवार में सम्मान पाती है, वह समाज में भी सम्मानित होती है। घर-परिवार को स्वर्ग बनाने की जिम्मेदारी और कर्तव्य पुरूष की अपेक्षा स्त्रियों पर अधिक होती है।

गृहस्थ जीवन में स्त्री-पुरूष को रथ के दो पहियों की तरह माना जाता है,  जिसमें जीवन रूपी रथ तभी रफ्तार में चलता है जब दोनों पहिए (स्त्री और पुरूष) पूरी तरह रथ को चलाने में सहयोग दे। यदि ऐसा नही होता है तो गृहस्थ जीवन की स्थिति और समाज की स्थिति बिगड़ जाती है। इस स्थिति में यह कहना कठिन होता है कि दोष किसका है- पुरूष का, स्त्री का, परिवार का, समाज का या फिर सभी का।

आज का पुरूष भी चाहता है कि वह आधा-अधूरा न रह, बल्कि साथ-साथ चलकर आदर्श परिवार और आदर्श समाज का निर्माण करें। इसके लिए स्त्रियों को आगे बढ़ना होगा,  पुरूष को महत्व देते हुए स्वयं के अस्तित्व को उजागर करना होगा। यही समाज में स्त्रियों की सच्ची स्वतंत्रता होगी। डॉ0 रामविलास शर्मा ने भी स्त्रियों को इसी रूप में देखते हुए कहा है कि-

‘‘शहरों में कुछ पढ़ी-लिखी स्त्रियाँ नारी मुक्ति आन्दोलन चलाती है। कैसी मुक्ति चाहती है यह तो वही जानें। मैं कैसे कह सकता हूँ कि भारत में स्त्रियों की स्थिति में व्यापक सुधार की आवश्यकता है। इसे सामाजिक आन्दोलन के साथ मिलकर करना चाहिए। उदाहरण के लिए नारी मुक्ति आन्दोलन से जोड़ा जाए तो इसमें अधिक सफलता मिलेगी।’’

पुरूष को अपने अहंवादी प्रवृत्ति को त्याग कर स्त्रियों की भावनाओं और संवेदनाओं को समझना चाहिए। आज जबकि पूरा विश्व बहु-संस्कृति से एक संस्कृति की ओर बढ़ रहा है, स्त्री अपने को पीछे पा रही है। हमेशा से भारतीय और पाश्चात्य संस्कृति में भी विवश सहमति और स्वीकार पदस्थिति से निकलकर स्त्री अपनी स्वतंत्रता अस्मिता पहचान और अधिकार पाना चाहती है। पुरूषवादी सोच ने अप्रत्यक्ष इसका विरोध ही किया है। इसने सरलता से स्वीकार नही किया कि स्त्री उसके समकक्ष हो सकती है। इसके लिए स्त्रियों को बहुत संघर्ष करना पड़ा है।

STRI VIMARSH AUR BHARTIYA SAMAJ PARAMPARA
 

 

आज स्त्री सभी क्षेत्र में पुरूष से कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है, पुरूष की हर ऊँचाइयों को प्राप्त कर रही है। इसी कारण यह धारणा बनती जा रही है कि स्त्री उन तत्वों को भी अपना रही है, जिससे पुरूष का अस्तित्व धुमिल हो रहा है। इसे अत्यधिक जागरूकता कहें या आधुनिकता का परिणाम या फिर पुरूष सत्ता के विरोध का प्रतिफल।

कुछ भी कारण दे दें किन्तु स्त्री जागरूकता के कारण स्त्री और पुरूष के बीच दूरियाँ बढ़ती जा रही है जो कि परिवार और समाज दोनों के लिए हितकर न होकर समस्या खड़ी कर सकती है। इस समस्या का समाधान अति आवश्यक प्रतीत होता है। इस विचार का प्रसार करना होगा कि स्त्री की स्वतंत्रता का अर्थ पुरूष की स्थिति को धुमिल करना या उसका विरोध करना नहीं है। इस मानसिकता को जन्म देना चाहिए कि दोनों ही एक दूसरे के पूरक है। डॉ0 राम विलास शर्मा जी ने नारी स्वतंत्रता पर अपने विचार इस प्रकार व्यक्त किये-

’’हर स्वाधीनता सीमित होती है। कोई भी स्वतंत्रता निरपेक्ष नहीं हो सकती। मनुष्य चाहे उछाल मारे औंर आसमान में पहुँच जाए आकर्षण शक्ति उसे खींच लेगी।, वह आकर्षण शक्ति से बँधा हुआ ……इसी प्रकार नारी की स्वाधीनता का सवाल है, सामाजिक सन्दर्भ से अलग हटकर तो नारी स्वाधीनता चरितार्थ नहीं हो सकती। यह ध्यान रखना चाहिए कि नारी की स्वाधीनता से समाज को पूरी शक्ति के साथ आगे बढ़ने का अवसर मिलें, इसलिए हमें स्वाधीनता मिलनी चाहिए।……..स्वाधीनता स्वछन्दता नही, यह समाज हित में, देश के हित में, स्वयं नारी के हित में।’’

मेरे विचार के अनुसार स्त्री हो या पुरूष एक समाज को आदर्श समाज बनाने में दोनों का ही सहयोग आवश्यक होता है, परिवार खुशहाल होगें तों समाज उन्नति करेगा। यदि स्त्रियाँ घर की रूढ़ियों से मुक्ति नहीं पाती और समाज का शिकार बनती जाती हैं तो परिवार और समाज दोनों ही इस स्थिति से प्रभावित होते हैं। आजकल घर के बाहर तो और भी भयावह स्थिति हैं।

बाहर पुरूष मानसिकता इतनी गिर जाती है कि स्त्री आज कहीं भी सुरक्षित नहीं है। स्थिति तो इतनी बिगड़ गयी है कि आज रक्त सम्बन्धी रिश्ते भी इस विकृत मानसिकता के शिकार हो चुके हैं। आए दिन समाचार-पत्रों में ऐसी खबरें पढ़ने को मिल जाती हैं।

यदि स्थिति ऐसी ही रही तो समाज को समाप्त होने में अधिक समय नहीं लगेगा। स्त्री विमर्श विषय पर ध्यान देते हुए डॉ0 रागेय राघव जी ने स्त्री पतन का कारण इस प्रकार अपने शब्दों में बताया है-

‘‘कैसे परम्परावादी औरतें अपनी दया, सहनशीलता, समपर्णशीलता, शालीनता, पितृक नैतिकता को आत्मसात् करने के कारण पुरुषों की हिंसा, दमन, उत्पीड़न, अन्याय को न केवल मजबूती प्रदान कर रही है वहीं उनकी सहनशीलता, अन्तर्मुखता, खामोशी बनकर दयनीय, दरिद्र, अबला स्थिति के लिए दोषी भी है। ’’डॉ0 रागेय राघव स्त्री की चुप्पी को घोषणा का सबसे बड़ा कारण बताते है।

आज भी परिवार की बात आती है इसे बड़ी आसानी से स्त्री की जिम्मेदारी बता दी जाती है। जबकि माँ के प्यार व पिता की देखरेख से एक शिशु समाज का नागरिक बनता है। अतः जब भी किसी परिवार की बात आती है तो स्त्री पुरूष दोनों का ही सहयोग और महत्व झलक पड़ता है। डॉ0 रामविलास शर्मा जी के शब्दों से परिवार का अर्थ इस प्रकार लगाया जा सकता है-

‘‘मेरा दृष्टिकोण तो मार्क्सवादी है और मैं मानता हूँ कि मार्क्सवादी को परिवार की समस्याओं पर अधिक ध्यान देना चाहिए। जो परिवार का ढाँचा चला आ रहा है उसे हम कैसे बदलें। परिवार में केवल नारी ही नहीं बूढ़े आदमी भी हैं उनकी समस्याओं का हल क्या हो, बच्चों के साथ उनके कैसे सम्बन्ध हो, सास और बहू, भाई और बहन का सम्बन्ध कैसा होना चाहिए-इन सबके बारे में मैने सोचा।

बहुत संक्षेप में बात करूँ तो जहाँ तक हो, समानता के आधार पर सम्बन्ध बनाना चाहिए और जो लोग सोचते हैं कि अलग रहने में बड़ा सुख मिलता, मै इसका विरोध करता हूँ। मैं कहता हूँ कि अगर तुममे समानता का भाव है तो जितने अधिक लोग मिलकर रह सको, उतना ही अच्छा है। मैं पुराने संयुक्त परिवार का पक्षपाती नहीं हूँ जहाँ एक सरदारनुमा घर का शासक है और सब उसके शासन के अन्तर्गत रहते है।’’

अतः स्तष्ट रूप से कहा जा सकता है कि परिवार हमारी पहचान होती है हम जैसे संस्कार, परम्पराएँ और आदर्श उसमें भरेगें परिवार उसी का प्रतिरूप बनकर हमारे सामने खड़ा होगा। परिवार का सीधा प्रभाव हमारे समाज पर पड़ता है। अतः कहा जा सकता है कि परिवार से ही समाज की उत्पत्ति होती है। इसलिए यदि भारतीय समाज को एक स्वच्छ, स्वस्थ और आदर्श समाज के रूप में देखना है तो पुरूष जाति को महत्व देते हुए स्त्रियों के भरपूर सहयोग से इस कार्य में सफलता प्राप्त की जा सकती है।

स्पष्ट होता है कि स्त्रियाँ आज समाज व देश में अपना प्रभुत्व स्थापित कर चुकी हैं राजनीति, मीडिया, साहित्य, अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में वे अपना स्थान सुनिश्चित कर चुकी हैं। हमें यह भी ज्ञात है कि विदेश सचिव के पद पर भी भारतीय स्त्री ही विराजमान है।

स्त्रियों में अदम्य क्षमता होती है, जो परिवार कि ज़िम्मेदारी को वहन करते हुये अपने कार्य क्षेत्र के पद की गरिमा को भी उजागर करती हैं अत: स्त्री व पुरुष दोनों ही संसार की सृष्टि और प्रगति के आधार हैं, इसलिए पुरुष जाति को अहं भाव त्याग कर स्त्री के महत्व, गौरव व अस्तित्व को समझना चाहिए एवं उनकी अस्मिता की रक्षा हेतु महत्वपूर्ण कदम उठाने चाहिए।

आज प्रस्तुत विषय के आधार पर हमने स्त्री विमर्श का अर्थ और भारतीय समाज परंपरा में स्त्री व स्त्री विमर्श के महत्व का अध्ययन किया। उम्मीद करती हूँ कि यह पोस्ट समाज में स्त्री के महत्व को उजागर करने में किसी हद तक सफल रहेगा।

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