Uttrakhand Ki Bhotiya Janjati | 3 Best सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक स्थिति

UTTRAKHAND KI BHOTIYA JANJATI
Uttrakhand Ki Bhotiya Janjati

Uttrakhand Ki Bhotiya Janjati सम्पूर्ण हिमालया क्षेत्र में विस्तृत है। भोटिया जनजाति के विस्तार के कारण ही चीन तथा नेपाल की सीमा क्षेत्र से जुड़े क्षेत्र को ‘भोट’ क्षेत्र कहा जाता है। भोटिया जनजाति उत्तराखण्ड के भिन्न भिन्न क्षेत्रों में आवासित होने के कारण अनेक नामों से जानी जाति है। जैसे- भूटानी, भूटिया, भोट, भोटा, जाड़, मारछा तथा तारछा, जौहरी, शौका आदि

तो आइए उत्तराखण्ड की प्रमुख और उपयोगी जनजाति भोटिया के निवास स्थान, रहन सहन, रीति रिवाज, सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक स्थिति के बारे में अध्ययन करें।

उत्तराखण्ड की भोटिया जनजाति

पिथौरागढ़ के ऊंचे पर्वतों, चमोली की हरियाली तथा उत्तरकाशी जहाँ पहाड़ों के बीच बहती नदियाँ और दूसरी तरफ जंगल स्थापित हैं वहीं उत्तरकाशी जनपद के भटवाडी तहसील में भोटिया जनजाति का निवास स्थान है।

इन क्षेत्रों के अतिरिक्त सरयू और गोमती के संगम पर स्थित बागेश्वर तीर्थ तथा अल्मोड़ा जनपद जो पूर्व में पिथौरागढ़ जिले, पश्चिम में गढ़वाल, उत्तर में बागेश्वर और दक्षिण में नैनीताल से घिरा हुआ है उनकी नदी घाटियों में भी भोटिया जनजाति निवास करतीं हैं।

भोटिया जनजाति अपने परिवार के साथ ग्रीष्म में समुद्र तल से ऊँचाई पर स्थित गावों में निवास करती हैं, ताकि गर्मी से उनकी रक्षा हो सके और सर्दी आते ही वे समुद्र तल के निचले स्थानों पर निवास करने लगते हैं। इसप्रकार वे मौसम की प्रताड़नाओं से स्वयं की तथा अपने परिवार की रक्षा करते हैं।

भोटिया शब्द तिब्बत से संबन्धित माना जाता है क्योकि भोटिया शब्द की उत्पत्ति भोट शब्द से मानी जाती है। भोट का तात्पर्य तिब्बत से ही है। भोट को पहले भूट कहा जाता था किन्तु बाद में ये भोट शब्द से जाना गया तथा भोट से ही भोटिया शब्द की उत्पत्ति हो गई। भोटिया जनजाति को अलग अलग स्थानों पर निवास करने के कारण अलग अलग नामों से जाना  जाता है जैसे– भूटानी, भूटिया, भोट, भोटा, जाड़, मारछा तथा तारछा, जौहरी, शौका आदि।

तिब्बती क्षेत्र से संबन्धित होने के कारण उनकी शारीरिक बनावट मंगोलो से मिलती जुलती है। इनका शारीरिक रंग गोरा, आखें छोटी, नाक चपटी, माथा कुछ निकला सा होता है। इनकी लंबाई औसत होती है तथा शारीरिक काया सुगठित होती है। भोटिया जनजाति के लोग हिन्दी, गढ़वाली, नेपाली भाषाएँ बोलते हैं।

UTTRAKHAND KI BHOTIYA JANJATI

सामाजिक स्थिति

भोटिया जनजाति की सामाजिक स्थिति अत्यंत सुदृढ़, सरल एवं सुव्यवस्थित होती है। इनकी मान्यता अनुसार परिवार समाज की इकाई है तथा समाज में एकता आवश्यक है। इनके परिवारों का मुखिया घर के बुजुर्ग होते हैं उनके निर्देशों और आज्ञा के अनुसार ही परिवार के आर्थिक व सामाजिक क्रियाकलाप निर्धारित होते हैं।

परिवार में एकता के साथ सदाचार, उदारता, बुजुर्गों के प्रति सम्मानीय दृष्टि, शिष्टाचार, कर्तव्यनिष्ठता व विश्वास की भावना भी विद्यमान होती है। भोटिया परिवारों में विवाह को अत्यंत पवित्र संबंध माना जाता है तथा पूर्ण श्रद्धा के साथ निभाया जाता है। यही कारण है कि स्त्रियों की स्थिति भी काफी अच्छी होती है। स्त्रियाँ भी आर्थिक क्षेत्र में अपना सहयोग देती हैं।

स्त्रियों का पहनावा शीत से रक्षा को दृष्टि में रखते अत्यंत लंबा और ऊनी होता है। इन्हें लड़वा, घाघरी, आंगड़ी कहते है। स्त्रियों के समान पुरुषों के वस्त्र भी ऊनी होते हैं। पुरुष पायजामा, कोट, कमीज़ तथा सिर को ढकने के लिए टोपी का प्रयोग करते हैं।

धीरे धीरे समय के साथ और भोटिया जनजाति का पड़ोसी समुदायों से निरंतर संपर्क के कारण इनके पहनावे में भी परिवर्तन आया और ये पहाड़ी संस्कृति के साथ साथ अन्य आधुनिक वस्त्रों को धारण करने लगे हैं।

सांस्कृतिक स्थिति

भोटिया जनजाति की सामाजिक स्थिति के समान ही सांस्कृतिक स्थिति भी अत्यंत सुव्यवस्थित, धार्मिक और आस्था पूर्ण है। ये अपने तीज-त्यौहार, पर्व, उत्सव, बड़े ही उल्लास के साथ मानते है। विशेष रूप से भोटिया समाज होली, दिवाली, जन्माष्टमी, दशहरा आदि त्यौहारों को मानते है। भोटिया समाज में उत्सवों में दीपक प्रज्ज्वलित करने का विशेष महत्व है।

लोकगीतों से परिपूर्ण सुरों के सतरंगी माहौल में स्त्रियाँ धार्मिक क्रिया कलाप व त्यौहारों को मनातीं हैं। भोटिया समाज में धार्मिक कृत्यों में स्त्रियों का विशेष महत्व है स्त्रियों के बिना धार्मिक कार्य पूर्ण नहीं माने जाते। भोटिया समाज की स्त्रियाँ शिव व शक्ति की उपासना करती हैं।

उनका मानना है की शिव कैलाश पति हैं और सदैव उनकी रक्षा करेंगें यही नहीं बल्कि मनोकामना पूर्ति के लिए नन्दा देवी की भी आराधना करते हैं। देवी देवताओं के साथ ही भोटिया समाज अपने पितरों की भी आस्था और श्रद्धा के पूजा करते हैं। आधुनिक समाज की ओर अग्रसर होते हुये भी भोटिया समाज अपनी संस्कृति और धर्म के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित है।

आर्थिक स्थिति

इस जनजाति के लोग अत्यंत कर्मनिष्ठ एवं साहसी होते हैं यही कारण है कि आर्थिक साधनों के अभाव और वातावरण की प्रतिकूलता होते हुये भी यह समुदाय अपनी आर्थिक स्थिति को सुसम्पन्न बनाए हुये है। कृषि, पशुपालन एवं लघु उद्योग इनके अर्थ उपार्जन के प्रमुख साधन हैं। ऊनी वस्त्रों और कंबलों का व्यापार पूरे देश में अपनी उपयोगिता, किस्म, सुंदरता व टिकाऊपन के कारण प्रसिद्ध है।

उत्तराखण्ड की अन्य जनजातियों की अपेक्षा भोटिया समुदाय जागरूक जनजाति मानी जाती है। इनकी जागरूकता के कारण इस समुदाय में शिक्षा का स्तर बढ़ा है। सम्पन्न भोटिया कृषि एवं पशुपालन के अतिरिक्त नौकरियों के प्रति भी आकर्षित हो रहे हैं।

किन्तु इनकी प्रगति व उन्नति के लिए सरकारों के द्वारा कोई भी ठोस कदम नहीं उठाया गया अत: राजनीतिक, प्राकृतिक और आर्थिक विषमताओं के कारण भोटिया समुदाय कठिन परिश्रम करने के बाद भी अधिक प्रगति नहीं कर पा रहे।

भोटिया जनजाति अत्यंत उपयोगी जनजाति है। व्यापारिक सम्बन्धों से लेकर सामाजिक सम्बन्धों तक जो प्रगाढ़ता भोटिया समुदाय में पाई जाती है वह स्मरणीय है। प्रतिकूल जलवायु, संसाधनों की कमी, प्राकृतिक आपदाओं से घिरे रह कर भी जिसप्रकार ये समुदाय अपनी आर्थिक स्थिति को सम्पन्न तथा सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक परम्पराओं और मान्यताओं को संरक्षित किए हुये है वह प्रशंसनीय है।

भोटिया जनजाति की उन्नति व प्रगति देश की संपन्नता, मानवता की स्थापना और संस्कृति के संरक्षण हेतु अत्यंत आवश्यक है। आप सभी स्वस्थ रहें, मस्त रहें और सुरक्षित रहें नमस्कार

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