Vichar Aur Bhavnaye | 2 Best अर्थ और प्रभाव

VICHAR AUR BHAVNAYE
Vichar Aur Bhavnaye

Vichar Aur Bhavnaye यह मेरे ब्लॉग पर मेरा पहला पोस्ट हैं। मैं अपने ब्लॉग के माध्यम से आप सभी को अपने विचारो, भावनाओ और उनसे उत्पन्न शोध से अवगत कराने का प्रयास करुगी।

विचार क्या हैं? कैसे उत्पन्न होते हैं? क्या भावनाएं मन में होती हैं? यह प्रश्न बहु चर्चित हैं। हर मनुष्य के विचार और भावनाएं दूसरे से भिन्न होते है, और मनन क्षमता भी भिन्न होती है। तो आइए जाने की विचार का अर्थ क्या है? भावनाएं क्या होती हैं? और हमारे जीवन पर किस प्रकार प्रभाव डालती हैं।

विचार और भावनाएं अर्थ

सरल शब्दो मे किसी वस्तु, विषय, बात, ख्याल, सोच या भावना के विषय मे अपनी बोद्धिक क्षमता के आधार पर सोचना, अपनी मनन क्षमता के आधार पर मंथन करना, तत्पश्चात अपनी चिंतन क्षमता के आधार पर उस सोच का अपनी तर्क की कसोटी पर परीक्षण करते हुए उस सोच को अंतिम रूप प्रदान करना ही विचार है।

किसी भी कार्य को पहली बार करने पर हमारे मस्तिष्क मे अनेक विचार कौधते हैं। जैसे- क्या मैं यह कर पाऊँगी/पाऊँगा? क्या मुझे इस काम मे सफलता प्राप्त होगी? क्या मैं अपने उदेश्य को पूर्ण कर पाऊँगी/पाऊँगा? क्या मैं अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकूँगी? ये सभी प्रश्न हमारे मस्तिष्क को घेर लेते हैं। उस समय हम अपनी सोच-समझ, चिंतन-मनन के आधार पर जिस एक सोच को स्थापित करते हैं वही हमारा अंतिम विचार बनता हैं।

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भावनाएं सोच, ख्याल हमारे मन से उत्पन्न होते है, हाँ उन्हे अंतिम निर्णय तक ले जाने मे हम अवश्य अपनी बुद्धि का प्रयोग करते हैं। बुद्धि से सोचना या जीना विचारो मे जीना हैं और हृदय मे भावो के आवागमन के कारण भावनाओ मे जीना हैं।

जब किसी एक ही बात, ख्याल या विषय पर हम अपनी बुद्धि व मन दोनों के प्रयोग से अंतिम निर्णय तक पहुचना चाहते हैं, तब वह स्थिति अंतरद्वंद की स्थिति हो जाती हैं, जहा हृदय और बुद्धि मे युद्ध चलता हैं और हम किसी भी निर्णय पर पहुचने मे असमर्थ हो जाते हैं, प्रश्न यह हैं की उस समय क्या करे?

कभी-कभी हमे अपनी बुद्धि पर नियंत्रण पाना आवश्यक होता हैं तो कभी मन की भावनाओ पर, यह हमारी सोच पर निर्भर करता हैं की किस विषय के निर्णय के लिए हम अपनी बुद्धि का प्रयोग करे और किस विषय के लिए अपनी भावनाओ का सहारा ले।

सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव

विचार और भावनाएं हमारे जीवन पर सकारात्मक व नकारात्मक रूप में प्रभाव डालती हैं। हमें सकरात्मकता को चुनना चाहिए।

सदेव जीवन के हर पल, हर समस्या या हर परिस्थिति का निदान एक समान नहीं होता क्यूकि समस्या एक समान नहीं होती। हम हमारी सोच विचार व भावनाओ के आधार पर ही सकारात्मक व नकारात्मक सोच वाले बनते हैं। जहा बुद्धि से सोचना हमे नकारात्मकता की ओर ले जा रहा हो तो ऐसी स्थिति मे हमे मन का सहारा लेकर सब अच्छा ही होगा” ऐसी सकारात्मक सोच के साथ जीवन मे आगे बढ़ना चाहिए।

हाँ अवश्य ही यह बात मन को बहलाने वाली हैं किन्तु यदि मन को बहला कर हम अपने जीवन की समस्याओ को समाप्त करने की क्षमता एकत्रित कर सकते हैं तो वह उस नकारात्मक सोच को मन मे उत्पन्न करने से लाख बेहतर हैं क्यूकि नकारात्मक सोच हमे हमारे पतन की ओर ले जाती है और हम मानसिक व बौद्धिक रूप से कमजोर पड़ जाते हैं। हम जितना अपनी जीवन की समस्याओ से नहीं हारते उससे कही ज्यादा अपने मन से हार जाते हैं। कहा भी गया हैं मन के हारे हार हैं मन के जीते जीत।

VICHAR AUR BHAVNAYE 

मनुष्य की सोच उसे “बुद्धिजीवी” प्राणी बनाती हैं और मन की भावनाए “मनस्वी”। सच कहू तो अपना पहला पोस्ट करते समय मेरी बुद्धि भी सकारात्मक और नकारात्मक सोच के बीच मे घिरी थी, परंतु कभी–कभी वो कार्य करने चाहिए जिसमे सफलता असफलता न सोची जाए, सराहना या प्रशंसा की इक्छा न की जाए। बस मन को अच्छा लगा और हमने किया ये विचार भी आवश्यक होते हैं । इन भावो के प्रभाव से हम तनावपूर्ण जीवन से छुटकारा पा कर स्वयं को खुश रखते हुये आत्मिक सुख व आत्मिक संतुष्टि प्राप्त कर पाते हैं।

सकारात्मक विचार और भावनाएं ही हमारी सोच को विस्तार प्रदान करते हैं। सकारात्मक विचार और भावना के प्रभाव से ही हमें जीवन में मुश्किलों का सामना करते हुये आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं। यदि हम सोचना छोड़ दें तो हमारी प्रगति अवरुद्ध हो जाएगी। विचार और भावना का उचित अर्थ और सकारात्मक प्रभाव ही हमें सीखने के लिए उत्साहित करती हैं, सीखने की प्रक्रिया ही हमारे विकास का प्रमुख कारण है।

प्रस्तुत पोस्ट में आज हमने विचार और भावनाएं उनका अर्थ एवं हमारे जीवन पर इनका नकारात्मक व सकारात्मक प्रभाव का अध्ययन किया। अब हम सोचने को स्वतंत्र है कि हमें विचारों के नकारात्मक या फिर सकारात्मक प्रभाव से प्रभावित होना है।

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